जमीनी आवाज | विशेष रिपोर्ट

नई दिल्ली। गोरी त्वचा का सपना दिखाकर करोड़ों का कारोबार करने वाली कॉस्मेटिक इंडस्ट्री के एक खतरनाक चेहरे से पर्दा उठने लगा है। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की कार्रवाई में ऐसे कई स्किन लाइटनिंग उत्पादों का खुलासा हुआ है, जिनमें पारा (Mercury) जैसी जहरीली धातु पाई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल सौंदर्य प्रसाधनों का मामला नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा गंभीर संकट है।

जांच में जिन उत्पादों के नाम सामने आए हैं, उनमें व्हाइटनिंग सोप, पार्ले गोल्डी एडवांस्ड ब्यूटी क्रीम पर्ल शाइन और हानिया ब्यूटी क्रीम शामिल हैं। इन उत्पादों के इस्तेमाल से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

त्वचा से शरीर में पहुंचता है ज़हर

पर्यावरण एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत संस्था टॉक्सिक्स लिंक की रिपोर्ट के अनुसार, पारा त्वचा के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकता है। लंबे समय तक ऐसे उत्पादों का उपयोग करने से दिमाग, गुर्दे और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

विशेषज्ञों ने चेताया है कि गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और शिशुओं पर इसका प्रभाव सबसे अधिक खतरनाक हो सकता है। इससे बच्चों के मानसिक विकास पर भी नकारात्मक असर पड़ने की आशंका रहती है।

सिर्फ इंसान ही नहीं, पर्यावरण भी खतरे में

इन उत्पादों से निकलने वाला पारा पानी और मिट्टी में मिलकर लंबे समय तक प्रदूषण फैलाता है। यह जल स्रोतों और पारिस्थितिकी तंत्र को भी प्रभावित करता है, जिसका असर आने वाली पीढ़ियों तक पड़ सकता है।

क्या सिर्फ महाराष्ट्र में कार्रवाई काफी है?

टॉक्सिक्स लिंक का कहना है कि महाराष्ट्र की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन सवाल यह है कि क्या बाकी राज्यों में बिक रहे ऐसे उत्पाद सुरक्षित हैं?

रिपोर्ट के मुताबिक, पारा युक्त कई स्किन लाइटनिंग उत्पाद आज भी देश के विभिन्न हिस्सों में दुकानों, अनौपचारिक बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खुलेआम बिक रहे हैं। ऐसे में पूरे देश में व्यापक अभियान चलाकर इनकी जांच और बिक्री पर रोक लगाना समय की मांग है।

गोरेपन की मानसिकता पर पल रहा खतरनाक कारोबार

विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ कंपनियां समाज में व्याप्त गोरे रंग की चाह और रंगभेद की सोच का फायदा उठाकर ऐसे उत्पाद बेच रही हैं। अधिकांश उपभोक्ताओं को यह तक नहीं पता होता कि उनकी "ब्यूटी क्रीम" धीरे-धीरे उनके शरीर में ज़हर घोल रही है।

केंद्र सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग

भारत मिनामाटा कन्वेंशन का सदस्य है, जिसका उद्देश्य पारे से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाना है। इसके बावजूद यदि पारा युक्त कॉस्मेटिक उत्पाद बाजार में बिक रहे हैं, तो यह चिंता का विषय है।

टॉक्सिक्स लिंक ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से मांग की है कि पारा युक्त स्किन लाइटनिंग उत्पादों के निर्माण, आयात, बिक्री और वितरण पर पूरे देश में तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही ऑनलाइन बिक्री की निगरानी, नियमित जांच और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


जमीनी आवाज़ की बात

सुंदर दिखने की चाह स्वाभाविक है, लेकिन यदि वही चाह किसी की सेहत और जीवन के लिए खतरा बन जाए, तो सावधान होने का समय आ गया है। किसी भी सौंदर्य प्रसाधन का इस्तेमाल करने से पहले उसकी गुणवत्ता, प्रमाणिकता और सामग्री की जानकारी अवश्य लें। चमकती त्वचा से कहीं अधिक कीमती आपका स्वास्थ्य है।

(स्रोत: 'डाउन टू अर्थ' में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर तैयार विशेष प्रस्तुति)