बंद दुनिया खुली तो आर्यन ने कहा—अब मैं खुद अपनी आवाजाही कर सकता हूं

दोनों हाथ-पैर प्रभावित होने के कारण हर कदम पर दूसरों पर निर्भर थे आर्यन कुमार, संबल योजना की व्हीलचेयर ने दी चलने की नई आजादी

24 सितंबर को बुनियादी केंद्र डुमरांव से मिली निःशुल्क व्हीलचेयर, आर्यन बोले—“लगा जैसे मेरी बंद दुनिया खुल गई”

कभी घर से बाहर निकलने के लिए भी दूसरों के सहारे का इंतजार करना पड़ता था। दैनिक जीवन के छोटे-छोटे काम भी आसान नहीं थे। दोनों हाथों और दोनों पैरों से प्रभावित दिव्यांगता के कारण नया भोजपुर निवासी आर्यन कुमार, पिता चन्द्र विजय कुमार के लिए आवागमन हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा।

24 सितंबर को मिली निःशुल्क व्हीलचेयर

लेकिन 24 सितंबर 2026 का दिन आर्यन की जिंदगी में एक अलग उम्मीद लेकर आया। जिला प्रशासन बक्सर के निर्देशन में बुनियादी केंद्र डुमरांव की ओर से उन्हें ‘संबल योजना’ के तहत निःशुल्क व्हीलचेयर उपलब्ध कराई गई। आर्यन के लिए यह सिर्फ एक उपकरण नहीं, बल्कि अपने जीवन में थोड़ी और स्वतंत्रता हासिल करने का जरिया बन गई।

व्हीलचेयर मिलने के बाद आर्यन के लिए आवाजाही पहले की तुलना में आसान हुई है। अब हर बार किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर रहने की मजबूरी कुछ कम हुई है। यही बदलाव उनके चेहरे पर खुशी और शब्दों में नई उम्मीद बनकर सामने आया।

“मुझे लगा जैसे मेरी बंद दुनिया खुल गई”

आर्यन कुमार अपनी बात कहते हुए भावुक हो उठे। उन्होंने कहा—

“हाथ-पैर से लाचार होने के कारण मुझे हर काम के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। 24 सितंबर को बुनियादी केंद्र डुमरांव से जब मुझे व्हीलचेयर मिली, तो मुझे लगा जैसे मेरी बंद दुनिया खुल गई है। अब मैं खुद अपनी आवाजाही कर सकता हूं। इस नई जिंदगी के लिए मैं बक्सर जिला प्रशासन और बुनियादी केंद्र, डुमरांव का दिल से आभारी हूं।”

संबल योजना: दिव्यांगजनों को स्वावलंबन की ओर

आर्यन की कहानी यह बताती है कि कई बार किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाने के लिए बहुत बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि उसकी जरूरत के मुताबिक सही सहयोग की जरूरत होती है। एक व्हीलचेयर ने आर्यन के लिए केवल आवागमन को आसान नहीं किया, बल्कि आत्मविश्वास और स्वावलंबन की एक नई राह भी खोली है।

‘संबल योजना’ के तहत दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराने का उद्देश्य उनकी दैनिक गतिविधियों को आसान बनाना और उन्हें अधिक आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग देना है। आर्यन को मिली व्हीलचेयर इसी प्रयास की एक तस्वीर है।

आर्यन के शब्दों में “बंद दुनिया खुलने” की यह कहानी सिर्फ एक लाभार्थी की कहानी नहीं, बल्कि उस सहयोग की अहमियत भी सामने लाती है, जो किसी दिव्यांग व्यक्ति को दूसरों पर निर्भरता से आगे बढ़कर अपने जीवन में अधिक स्वतंत्रता हासिल करने का अवसर देता है।

सहायता जब जरूरत के मुताबिक मिले, तो वही सहायता स्वावलंबन की ताकत बन जाती है।