सरायकेला/घाटशिला। जमीनी आवाज परिवार की रिपोर्ट....

बारिश के बीच चांडिल डैम से छोड़े जा रहे पानी ने सुवर्णरेखा और खरकई नदी के तटीय इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। चांडिल अनुमंडल क्षेत्र की बहुउद्देशीय चांडिल डैम परियोजना के जलाशय में जलस्तर बढ़ने के बाद मंगलवार, 18 अगस्त की सुबह 8 बजे 13 रेडियल गेट खोलकर कुल 750.42 क्यूमेक्स पानी छोड़ा गया। डैम का जलस्तर उस समय 179.50 मीटर दर्ज किया गया। सुरक्षा के मद्देनजर पानी की निकासी की जा रही है और डैम प्रबंधन लगातार जलस्तर तथा बारिश की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

डैम से निकल रहे पानी का असर चांडिल से आगे घाटशिला तक नदी के प्रवाह में साफ दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर सुवर्णरेखा का जलस्तर तेजी से बढ़ा है और नदी की धार तेज हो गई है। सबसे बड़ी चिंता नदी के दोनों किनारों पर हो रहा भूमि कटाव है। कई जगह नदी की धार किनारे की जमीन को काट रही है। स्थानीय लोगों के लिए यह महज पानी बढ़ने का मामला नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में जमीन के नदी में समाने का खतरा भी है।

13 गेटों से 641.47 क्यूमेक्स, कुल डिस्चार्ज 750.42 क्यूमेक्स

डैम प्रबंधन के अनुसार 13 रेडियल गेटों से 641.47 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। अलग-अलग गेट 0.448 मीटर से 1.020 मीटर तक खोले गए हैं। इसके अलावा नदी स्लुइस से 4.37 क्यूमेक्स, आपातकालीन स्लुइस से 76.07 क्यूमेक्स तथा नहर से 28.51 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। इस तरह बांध से कुल जल प्रवाह 750.42 क्यूमेक्स दर्ज किया गया।

वर्तमान भंडारण 438.81 एमसीएम बताया गया है। डैम प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि बारिश और जलस्तर की स्थिति को देखते हुए रेडियल गेटों की संख्या और उनकी ऊंचाई में बदलाव किया जा सकता है।

डैम से निकला पानी, नीचे के इलाकों में बढ़ी निगरानी

पानी छोड़े जाने के बाद प्रशासन ने सुवर्णरेखा और खरकई नदी के निचले तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है। लोगों से नदी के किनारे नहीं जाने और मवेशियों को नदी के आसपास नहीं ले जाने की अपील की गई है।

विस्थापित प्रतिनिधि राकेश रंजन महतो का कहना है कि लगातार बारिश और ऊपर से आने वाले पानी को देखते हुए जलस्तर पर नजर रखना बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते गेटों से पानी की निकासी नियंत्रित तरीके से नहीं की गई और जलस्तर लगातार बढ़ता रहा, तो ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के निचले इलाकों के कई गांवों पर बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।

घाटशिला में नदी का रौद्र रूप, कटाव बना सबसे बड़ा खतरा

चांडिल से छोड़े गए पानी के साथ घाटशिला की ओर सुवर्णरेखा का प्रवाह भी तेज हुआ है। नदी अपने उफान पर है। नदी के दोनों किनारों पर हो रहा कटाव स्थानीय लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

नदी की धार जहां एक ओर चौड़ी होती जा रही है, वहीं दूसरी ओर किनारे की जमीन लगातार कट रही है। ग्रामीणों की चिंता है कि यदि बारिश और जलप्रवाह इसी तरह जारी रहा तो कई स्थानों पर नदी का कटाव और तेज हो सकता है।

पानी बढ़ा तो नदी किनारे के युवाओं में 'रोमांच', पुल बना स्टंट का अड्डा

नदी का बढ़ता पानी जहां प्रशासन और ग्रामीणों के लिए खतरे की घंटी है, वहीं कुछ युवाओं के लिए यह रोमांच का मौका बन गया है। घाटशिला क्षेत्र में नदी के तेज बहाव के बीच कुछ युवक पुलों और नदी किनारे से पानी में छलांग लगाते और तैरते नजर आ रहे हैं।

इन युवकों का तर्क है कि वे नदी किनारे ही पले-बढ़े हैं और पानी उनके लिए नया नहीं है। उनका कहना है कि तेज धार में तैरना उनके लिए जोखिम नहीं, बल्कि रोमांच है। कुछ युवकों का दावा है कि तेज पानी में चोट लगने की संभावना कम रहती है और वे आसानी से तैरकर दूसरी ओर पहुंच सकते हैं।

लेकिन सवाल यह है कि नदी किसी की पहचान नहीं पूछती। स्थानीय होने का दावा तेज धार, अचानक बने गड्ढे, भंवर या बदलती नदी की दिशा को नियंत्रित नहीं कर सकता। जिस पानी को कोई युवक आज रोमांच समझ रहा है, वही एक पल में हादसे में बदल सकता है।

प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती—बाढ़ से बचाव भी, स्टंट पर रोक भी

एक तरफ डैम से पानी छोड़े जाने के कारण नदी के निचले इलाकों की निगरानी जरूरी है, तो दूसरी तरफ नदी और पुलों पर खतरनाक स्टंट करने वालों को रोकना भी प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।

पानी का बढ़ना नदी किनारे रहने वालों के लिए चेतावनी है, मनोरंजन का निमंत्रण नहीं। पुल से छलांग लगाना या तेज बहाव में तैरना किसी भी स्थिति में सुरक्षित गतिविधि नहीं माना जा सकता। एक छोटी सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है।

अगले दो दिन महत्वपूर्ण

मौसम की स्थिति भी इस पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बना रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के 18 अगस्त के बुलेटिन के अनुसार झारखंड में 18-19 अगस्त को व्यापक बारिश की संभावना है।

ऐसे में यदि ऊपर के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश होती है और चांडिल डैम में पानी की आवक बढ़ती है, तो नदी का जलस्तर आगे और बढ़ सकता है। यही वजह है कि चांडिल से घाटशिला तक नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं।

एक तरफ डैम के गेटों से निकलता 750 क्यूमेक्स से ज्यादा पानी, दूसरी तरफ आसमान से बरसता पानी और बीच में नदी के कटते किनारे—सुवर्णरेखा का यह बढ़ता जलस्तर फिलहाल सिर्फ खूबसूरत नजारा नहीं, बल्कि संभावित खतरे का संकेत भी है।