19 साल बाद फिर खुला बाघुड़िया का बंद दरवाजा: हाईकमान के आदेश की पुष्टि, मगर आदेश देने वाला कौन?
सचिन के खुलासे ने जांच की दिशा फिर मोड़ी, मदन महतो की गिरफ्तारी से सामने आई ऑपरेशन की कड़ी
बाघुड़िया के मैदान में चली गोलियों का जवाब 19 साल बाद भी अधूरा, जांच एजेंसियों की पड़ताल के बावजूद "हाईकमान" का चेहरा अब तक सामने क्यों नहीं आया?
चार मार्च 2007। होली का दिन। घाटशिला के बाघुड़िया का फुटबॉल मैदान। हजारों लोगों के बीच तत्कालीन जमशेदपुर सांसद सुनील महतो मौजूद थे। उन्हें पुरस्कार वितरण करना था। लेकिन कुछ ही क्षणों में मैदान गोलियों की आवाज से दहल उठा। सांसद सुनील महतो, उनके दो अंगरक्षक और झामुमो नेता प्रभाकर महतो की हत्या कर दी गई।
19 साल बाद यह हत्याकांड फिर सुर्खियों में है। वजह है—माओवादी संगठन से जुड़े रहे रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन का हालिया आत्मसमर्पण और पूछताछ में सामने आया कथित खुलासा।
अगर आदेश हाईकमान का था, तो वह हाईकमान कौन था?


सचिन के अनुसार, सुनील महतो की हत्या किसी स्थानीय नक्सली कमांडर का स्वतः लिया गया फैसला नहीं थी, बल्कि संगठन के हाईकमान के निर्देश पर की गई थी। उसके मुताबिक बड़े ऑपरेशन के फैसले संगठन के पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी स्तर पर लिए जाते थे। सचिन ने यह भी कहा कि वह वारदात में शामिल था, लेकिन सांसद पर गोली उसने नहीं चलाई थी; रंजीत पाल उर्फ राहुल समेत अन्य नक्सलियों ने गोली चलाई थी।
19 साल से इस हत्याकांड में गिरफ्तारियों, आत्मसमर्पण और पूछताछ का सिलसिला चलता रहा। कई नाम सामने आए—रंजीत पाल उर्फ राहुल, असीम मंडल उर्फ आकाश, रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन, शकुंतला समेत कई माओवादी इस मामले से जुड़े बताए गए। लेकिन घटनास्थल पर गोली चलाने वाले हाथों और उस गोलीबारी का अंतिम आदेश देने वाले नेतृत्व के बीच की पूरी कड़ी अब भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हो सकी है।
मदन महतो की गिरफ्तारी ने जोड़ा एक और महत्वपूर्ण सिरा
अगस्त 2026 में सरायकेला-खरसावां जिले से 15 लाख रुपये के इनामी माओवादी मदन महतो की गिरफ्तारी ने भी इस पुराने मामले को नई दिशा दी। पूछताछ से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार मदन महतो वारदात के समय बाघुड़िया मैदान में मौजूद था, और उसकी भूमिका माओवादियों को घटनास्थल तक पहुंचाने तथा वारदात के बाद सुरक्षित रास्ते से बाहर निकालने की बताई गई है।
यानी अब जांच के सामने सिर्फ यह सवाल नहीं है कि गोली किसने चलाई। सवाल यह भी है—किसने टीम तैयार की? किसने उन्हें बाघुड़िया तक पहुंचाया? किसने वापसी का रास्ता तय किया? किसने ऑपरेशन की निगरानी की? और सबसे ऊपर—किसके आदेश पर यह पूरा ऑपरेशन शुरू हुआ?
राहुल ने आत्मसमर्पण किया, फिर भी सवाल क्यों नहीं खत्म हुए?
हत्याकांड में प्रमुख भूमिका बताए गए रंजीत पाल उर्फ राहुल ने 2017 में पश्चिम बंगाल पुलिस के सामने अपनी पत्नी के साथ आत्मसमर्पण किया था। इसके बावजूद, वर्षों बाद भी हत्याकांड की वह पूरी श्रृंखला सार्वजनिक नहीं हुई जिसमें नीचे के दस्ते से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक आदेश पहुंचने की प्रक्रिया स्पष्ट हो।
सुनील महतो सिर्फ एक सांसद नहीं थे—यह जमशेदपुर की राजनीतिक हत्या थी
सुनील महतो की हत्या ने पूर्वी सिंहभूम की राजनीति को गहरा झटका दिया था। एक निर्वाचित सांसद की खुले मैदान में, जनता के बीच हत्या ने यह सवाल खड़ा किया था कि उस समय माओवादी नेटवर्क की पहुंच किस स्तर तक थी।
परिवार का दर्द भी वही है—19 साल बाद भी पूरी सच्चाई बाकी
दिवंगत सांसद की पत्नी सुमन महतो ने हालिया बातचीत में कहा है कि 19 साल बाद भी परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है। उनके अनुसार मामले की जांच विभिन्न एजेंसियों तक पहुंची, लेकिन परिवार के लिए हत्याकांड की पूरी साजिश और उससे जुड़े सभी सवाल अब भी समाप्त नहीं हुए हैं।
अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा मौका
सचिन की पूछताछ और मदन महतो से मिली जानकारी को अगर जांच एजेंसियां आपस में जोड़ती हैं, तो 2007 के बाघुड़िया हत्याकांड की घटनाक्रम-श्रृंखला को फिर से खंगालने का आधार बन सकता है। अब जरूरत इस बात की है कि मैदान में मौजूद लोगों, वारदात को अंजाम देने वाले दस्ते और संगठन के शीर्ष नेतृत्व के कथित आदेश—इन तीनों कड़ियों को जोड़कर यह सार्वजनिक किया जाए कि आदेश कहां से आया था।
नोट: इस रिपोर्ट में किसी व्यक्ति को अंतिम आदेशकर्ता या हत्या का मास्टरमाइंड नहीं बताया गया है, क्योंकि उपलब्ध ताजा सार्वजनिक रिपोर्टों में ऐसा निर्णायक प्रमाण सामने नहीं आया है। सचिन के बयान में "हाईकमान" और संगठन के पीबीएम/सीसीएम स्तर का उल्लेख है। अंतिम जिम्मेदारी तय करना जांच और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।





