जमशेदपुर। कानून की जानकारी सिर्फ अदालतों और शहरों तक सीमित रहे तो गांव के बच्चे अपने अधिकारों से कैसे परिचित होंगे? इसी सवाल को जमीन तक ले जाते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), जमशेदपुर का मोबाइल वैन बुधवार को बोड़ाम प्रखंड के माधवपुर गांव पहुंचा। राजकीय मध्य विद्यालय में आयोजित कानूनी जागरूकता शिविर में स्कूली बच्चों को कानून, अधिकार और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई।

प्रधान जिला जज के निर्देश पर हुआ आयोजन

जिला विधिक सेवा प्राधिकार जमशेदपुर के अध्यक्ष सह प्रधान जिला जज अरविंद कुमार पांडेय के निर्देश तथा डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी के मार्गदर्शन में आयोजित शिविर में बच्चों को बताया गया कि किसी भी तरह की परेशानी या अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में वे कानूनी सहायता कहां और कैसे प्राप्त कर सकते हैं।

बाल विवाह, बाल मजदूरी और पॉक्सो पर विशेष जोर

शिविर में बच्चों को बाल विवाह, बाल श्रम, पॉक्सो एक्ट, चाइल्ड ट्रैफिकिंग और चाइल्ड प्रोटेक्शन जैसे संवेदनशील विषयों की जानकारी दी गई। इसके अलावा शिशु प्रोजेक्ट, डायन प्रथा, नशा उन्मूलन, नागरिकों के मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य, पेंशन योजना, प्राकृतिक आपदा और दुर्घटना बीमा सहित विभिन्न कानूनी एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बारे में भी समझाया गया।

कानून से डरने की नहीं, समझने की जरूरत

डालसा टीम ने बच्चों को यह संदेश भी दिया कि कानून से डरने की नहीं, बल्कि उसे समझने और जरूरत पड़ने पर उसका सहारा लेने की जरूरत है। किसी भी कानूनी समस्या के समाधान के लिए स्थानीय लीगल एड क्लीनिक अथवा सिविल कोर्ट स्थित डालसा कार्यालय से संपर्क करने की जानकारी दी गई। शिविर में लीगल एड डिफेंस कौंसिल की सदस्य रंजना पांडेय तथा पीएलवी नागेन्द्र कुमार, दिलीप जायसवाल, राजेश राव, निताई चंद्र गोराई, गीता रानी दास और मिथिलेश तिवारी मौजूद रहे।

जमीनी आवाज की नजर में सवाल सिर्फ इतना नहीं कि बच्चों को कानून बताया गया, बल्कि यह भी है कि गांव का हर बच्चा अपने अधिकार को पहचान पाए और जरूरत पड़ने पर उस अधिकार के लिए आवाज उठा सके।