ऊंची उड़ान—संपूर्णता की ओर राजयोग तपस्या शिविर का भव्य शुभारंभ
स्वमान, क्षमा, कृतज्ञता और आत्म-चिंतन के जरिए जीवन में सकारात्मक बदलाव का संदेश; माउंट आबू से पहुंचे वरिष्ठ राजयोगी सूरज भाई
ब्रह्माकुमारी संस्थान से जुड़े नियमित राजयोग साधकों के लिए आयोजित दो दिवसीय "ऊंची उड़ान—संपूर्णता की ओर" राजयोग तपस्या शिविर का शनिवार को बिष्टुपुर स्थित लॉयला स्कूल ऑडिटोरियम में भव्य शुभारंभ हुआ। शिविर में जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों के अलावा झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल एवं अन्य स्थानों से करीब एक हजार भाई-बहनों ने भाग लिया।
इस अवसर पर माउंट आबू स्थित ब्रह्माकुमारी संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय से पहुंचे वरिष्ठ राजयोगी एवं वक्ता ब्रह्माकुमार सूरज भाई, वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका गीता दीदी और रोहित भाई विशेष रूप से उपस्थित रहे।
"मैं मास्टर सर्वशक्तिमान आत्मा हूं"—स्वमान पर केंद्रित रहा पहला सत्र
शिविर के प्रथम सत्र में सूरज भाई ने "स्वमान" यानी Self Respect के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि व्यक्ति यदि स्वयं को आत्मिक स्वरूप में पहचानता है, तो उसके चिंतन और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है।
क्षमा और कृतज्ञता को बताया आंतरिक शांति का आधार
वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका गीता दीदी ने क्षमा और कृतज्ञता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी के व्यवहार से मिले दुःख को बार-बार दोहराते रहने से व्यक्ति स्वयं ही मानसिक बोझ ढोता रहता है, जबकि क्षमा का भाव मन को हल्का करता है।
"Self Checking" से अपनी स्थिति को परखने का संदेश
शाम के सत्र में ब्रह्माकुमारी अंजू दीदी ने Self Checking की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अच्छे विचारों और शुभ कर्मों को "इमोशनल बैंक अकाउंट" से जोड़ते हुए समझाया कि सकारात्मक विचार जीवन में सकारात्मक पूंजी का निर्माण करते हैं।
कई राज्यों और शहरों से पहुंचे राजयोग साधक
आयोजकों के अनुसार दो दिवसीय शिविर में जमशेदपुर के अलावा गया, हजारीबाग, रामगढ़, पटना, मुजफ्फरपुर, देवघर, कोलकाता, रांची और चांडिल सहित विभिन्न स्थानों से साधक पहुंचे। शिविर का उद्देश्य नियमित राजयोग साधकों को स्वमान, सकारात्मक चिंतन, क्षमा, कृतज्ञता और परमात्म-स्मृति के माध्यम से आत्मिक उन्नति की दिशा में प्रेरित करना है।





