सरायकेला : नीमडीह CHC में गर्भवती से जांच के नाम पर कथित वसूली का आरोप

सरायकेला। सरकारी अस्पताल में जहां गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्वास्थ्य सुविधा और भरोसा मिलना चाहिए, वहीं नीमडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) से सामने आई एक शिकायत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

हिलसी गांव निवासी मंजूषा महतो, पति फूलचांद महतो ने CHC में तैनात लैब टेक्नीशियन सुनील कुमार राम पर गर्भावस्था की जांच के नाम पर कथित रूप से पैसे लेने और उसके होने वाले बच्चे को लेकर भय पैदा करने का आरोप लगाया है।

जांच के नाम पर पैसे लेने और डराने का आरोप

मंजूषा महतो ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दिए लिखित आवेदन में बताया है कि वह 10 अगस्त 2025 को गर्भावस्था की जांच कराने नीमडीह CHC गई थीं।

शिकायत के अनुसार, वहां पदस्थापित लैब टेक्नीशियन सुनील कुमार राम ने जांच के एवज में उनसे कथित रूप से पैसे लिए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि महिला को कहा गया—

“अगर मेरे पास बार-बार जांच नहीं कराई तो तुम्हारा बच्चा अधूरा पैदा होगा।”

महिला ने शिकायत में कहा है कि इस घटना के बाद से वह मानसिक तनाव से गुजर रही हैं।

शिकायत कई अधिकारियों तक पहुंची

मामले को लेकर पीड़िता ने 20 अगस्त को लिखित शिकायत देकर संबंधित कर्मी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

शिकायत की प्रतिलिपि BDO नीमडीह, प्रखंड प्रमुख, जिला परिषद, सिविल सर्जन सरायकेला, उपायुक्त सरायकेला और ईचागढ़ विधायक को भी दिए जाने की बात शिकायत में कही गई है।

आवेदन पर जिला परिषद उपाध्यक्ष की मुहर और हस्ताक्षर होने की बात भी सामने आई है। शिकायत से जुड़े आवेदन की 22 अगस्त और 1 सितंबर की कार्यालयी रिसीविंग भी मौजूद होने का दावा किया गया है।

कार्रवाई को लेकर सवाल

शिकायत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मामले की निष्पक्ष जांच कब होगी और शिकायत में लगाए गए आरोपों की सच्चाई सामने कब आएगी?

पीड़िता के परिवार का कहना है कि कार्रवाई नहीं होने से वे चिंता और भय की स्थिति में हैं। परिवार चाहता है कि शिकायत की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय की जाए।

आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही

मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि शिकायत में लगाए गए आरोप अभी आरोप हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। संबंधित लैब टेक्नीशियन सुनील कुमार राम का पक्ष भी सामने आना बाकी है।

यदि आरोप गलत हैं तो जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर ऐसी शिकायतें स्वास्थ्य व्यवस्था में भरोसे का महत्वपूर्ण सवाल उठाती हैं।

अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर

अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर हैं कि शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है और क्या मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाती है।

जमीनी आवाज इस मामले में शिकायत से जुड़े दस्तावेजों और प्रशासनिक कार्रवाई पर अपनी नजर बनाए रखेगा।