नीमडीह CHC का LT सुनील राम विवादों में, तीन गर्भवती महिलाओं से अवैध वसूली और डराने का आरोप, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं

“जांच नहीं कराई तो बच्चा अधूरा पैदा होगा”—गर्भवती महिला का आरोप; दूसरी पीड़िता से ₹500 लेने का दावा, तीसरे मामले ने भी बढ़ाए सवाल

उपायुक्त, सिविल सर्जन और ईचागढ़ विधायक तक पहुंची शिकायतें, रिसीविंग के बावजूद कार्रवाई पर सवाल—क्या स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की मजबूरी कमाई का जरिया बन गई?

नीमडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित लैब टेक्नीशियन सुनील कुमार राम पर तीन गर्भवती महिलाओं से जांच के नाम पर पैसे लेने, डराने-धमकाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए गए हैं। खास बात यह है कि शिकायतें स्थानीय स्तर से लेकर सिविल सर्जन, उपायुक्त और ईचागढ़ विधायक तक पहुंच चुकी हैं, लेकिन शिकायतकर्ताओं के अनुसार अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आरोप गर्भवती महिलाओं की जांच से जुड़े हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी जांच को लेकर पहले से भय और चिंता में रहने वाली महिलाओं को कथित तौर पर गंभीर परिणामों का डर दिखाकर पैसे देने के लिए मजबूर किया गया।

पहला मामला: “जांच नहीं कराई तो बच्चा अधूरा पैदा होगा”

हिलसी गांव निवासी मंजूषा महतो, पति फूलचांद महतो, ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दिए लिखित आवेदन में आरोप लगाया है कि वह 10 अगस्त 2025 को गर्भावस्था की जांच के लिए नीमडीह CHC पहुंची थीं। शिकायत के अनुसार, वहां तैनात LT सुनील कुमार राम ने जांच के नाम पर उनसे पैसे लिए और कथित तौर पर कहा—

“अगर मेरे पास बार-बार जांच नहीं कराई तो तुम्हारा बच्चा अधूरा पैदा होगा।”

मंजूषा का कहना है कि इस घटना के बाद वह मानसिक तनाव में हैं। उन्होंने 20 अगस्त को लिखित शिकायत दी। आवेदन पर जिला परिषद उपाध्यक्ष की मुहर और हस्ताक्षर होने के साथ 22 अगस्त और 1 सितंबर की रिसीविंग भी दर्ज है। शिकायत की प्रतिलिपि BDO नीमडीह, प्रखंड प्रमुख, जिला परिषद, सिविल सर्जन सरायकेला-खरसावां, उपायुक्त और ईचागढ़ विधायक को भी दिए जाने की बात आवेदन में दर्ज है।

दूसरा मामला: ₹500 लेकर फिर डराने का आरोप

दूसरा मामला महकमडीह, सिरूम निवासी मनी गोप, पति कर्ण गोप, से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक वह 3 सितंबर 2026 को रक्त जांच के लिए नीमडीह CHC पहुंची थीं। मनी गोप ने आरोप लगाया है कि LT सुनील कुमार राम ने रक्त जांच के नाम पर उनसे ₹500 लिए और कथित तौर पर कहा—

“अगर मुझसे रक्त जांच नहीं कराओगी तो बच्चा सात महीने में ही पैदा हो सकता है, जल और रक्तस्राव के साथ बच्चा नष्ट भी हो सकता है।”

मनी गोप ने 7 सितंबर 2026 को शिकायत दी, जिसकी 15 सितंबर की रिसीविंग होने की बात सामने आई है। शिकायत की प्रतियां भी संबंधित प्रखंड एवं जिला स्तरीय अधिकारियों को भेजे जाने का दावा किया गया है।

परिवार का आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को जांच और बीमारी के नाम पर डराना गंभीर मामला है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र इलाज और भरोसे की जगह है, भय पैदा करने की जगह नहीं।

तीसरा मामला भी सामने आया, शिकायतों की संख्या ने बढ़ाई चिंता

इसी LT के खिलाफ मानसरी मार्डी, हाइतिरुल सिरूम से जुड़े तीसरे मामले का भी उल्लेख शिकायतों में सामने आया है। हालांकि इस मामले से जुड़े आरोपों और दस्तावेजों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण इसकी पुष्टि किए बिना कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन एक ही स्वास्थ्य केंद्र के एक ही कर्मचारी के खिलाफ अलग-अलग महिलाओं की शिकायतें सामने आने से पूरे मामले की निष्पक्ष और विभागीय जांच की जरूरत जरूर बढ़ गई है।

एक शिकायत में HIV जांच को लेकर भी गंभीर सवाल

शिकायत से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में HIV जांच के परिणाम को लेकर भी परिवार के परेशान होने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, पहली जांच में पॉजिटिव बताए जाने के बाद वे CHC प्रभारी के पास पहुंचे। उन्हें MGM अस्पताल में जांच कराने की सलाह दी गई। परिवार दो बार जमशेदपुर गया, जहां दूसरी जांच में रिपोर्ट HIV नेगेटिव आने की बात कही गई।

इस घटनाक्रम ने ग्रामीण मरीजों के बीच जांच की विश्वसनीयता और समय पर सही चिकित्सकीय परामर्श को लेकर चिंता पैदा कर दी है। हालांकि किसी रिपोर्ट की चिकित्सकीय वैधता पर निष्कर्ष संबंधित अधिकृत स्वास्थ्य विशेषज्ञों की जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।

सवाल सिर्फ ₹500 का नहीं, मरीज के भरोसे का है

नीमडीह जैसे ग्रामीण इलाके में बड़ी संख्या में गरीब और सामान्य परिवार इलाज के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी पर गर्भवती महिलाओं को गंभीर चिकित्सकीय परिणामों का डर दिखाकर जांच कराने या पैसे देने के लिए दबाव बनाने के आरोप लगते हैं, तो यह केवल व्यक्तिगत शिकायत का मामला नहीं रह जाता। सवाल यह है कि—

  • क्या सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच की निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क की जानकारी मरीजों को स्पष्ट रूप से दी जाती है?
  • क्या किसी कर्मचारी को जांच के लिए मरीज से निजी तौर पर पैसा लेने की अनुमति है?
  • यदि शिकायतें अधिकारियों तक पहुंच चुकी हैं तो जांच की स्थिति क्या है?

और सबसे बड़ा सवाल—शिकायत के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

पूर्व कार्यस्थल को लेकर भी लगाए जाते रहे आरोप

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि सुनील कुमार राम पूर्व में कुचाई CHC में कार्यरत थे और वहां भी उन पर लोगों से पैसे लेने के आरोप लगते रहे थे। हालांकि इन पुराने आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन आरोपों की सत्यता विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

शिकायतकर्ताओं की मांग—जांच हो, दोषी मिले तो कार्रवाई हो

तीनों पीड़ित महिलाओं और उनके परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो भविष्य में किसी अन्य गर्भवती महिला को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट व्यवस्था करनी चाहिए।

अब निगाह स्वास्थ्य विभाग पर है। क्या विभाग इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराएगा? शिकायतों में लगाए गए आरोप सही हैं या गलत—यह जांच के बाद सामने आएगा। लेकिन शिकायतों पर लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने से नीमडीह CHC की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं।

जमीनी आवाज की पड़ताल जारी है।