जमशेदपुर/घाटशिला। असित भट्टाचार्य की रिपोर्ट
एक मायूस पिता पिछले कई महीनों से अपनी बेटी की मौत का सच जानने के लिए भटक रहा है। पिता का आरोप है कि उनकी बेटी की मौत की परिस्थितियां संदिग्ध हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच होनी चाहिए।
'जमीनी आवाज' के पास इस मामले से संबंधित कुछ दस्तावेज उपलब्ध हैं। दस्तावेजों, परिजनों के बयानों और मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल में कई ऐसे सवाल सामने आए हैं, जिनका जवाब जांच एजेंसियों से मिलना जरूरी है। जमीनी आवाज स्पष्ट करता है कि यह रिपोर्ट किसी को दोषी नहीं ठहराती—ये परिवार के आरोप और जांच से जुड़े खुले सवाल हैं।
2010 में हुई थी शादी, 2025 में हुई मौत
परिजनों के अनुसार, घाटशिला की रहने वाली युवती की शादी 8 फरवरी 2010 को जमशेदपुर के बिरसानगर निवासी मुकेश अग्रवाल के साथ हुई थी।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार महिला की मौत 29 अक्टूबर 2025 को शाम लगभग 4 बजे से रात 9 बजे के बीच हुई। प्रारंभिक तौर पर मामला फांसी लगाने का बताया गया, लेकिन मौत की वास्तविक परिस्थितियां जांच का विषय हैं।
इसी मामले में बिरसानगर थाना कांड संख्या 87/25, दिनांक 30 अक्टूबर 2025 दर्ज होने की बात सामने आई है। लेकिन अब सवाल यह है कि करीब आठ महीने गुजर जाने के बाद भी जांच किस मुकाम पर है?
पति के विदेश जाने पर परिवार का सवाल
मृतका के पिता का कहना है कि उनकी बेटी की मौत की परिस्थितियां संदिग्ध हैं। परिवार का दावा है कि जांच पूरी होने से पहले पति सिंगापुर चला गया।
यहीं से 'जमीनी आवाज' का सवाल सामने आता है—यदि किसी मामले में जांच अभी लंबित हो, तो क्या संबंधित व्यक्ति जांच पूरी होने से पहले देश छोड़कर विदेश जा सकता है? अगर वह कानूनी रूप से विदेश गया, तो क्या उसके विदेश जाने की अनुमति किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में मिली? क्या पुलिस ने उसका बयान लिया था? क्या उसका पासपोर्ट जांच के दायरे में आया? इन सवालों का जवाब पुलिस प्रशासन को देना चाहिए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी परिवार के सवाल
मृतका के पिता और परिवार का दावा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ऐसे बिंदु हैं, जिनकी गंभीरता से जांच आवश्यक है। 'जमीनी आवाज' किसी रिपोर्ट को अपने स्तर पर अंतिम सत्य नहीं मानता, लेकिन परिवार के आरोपों की वैज्ञानिक जांच होनी चाहिए—क्या शव परीक्षण के दौरान सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन हुआ, क्या घटनास्थल से प्राप्त साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया, और क्या फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट मामले की जांच में शामिल है।
परिवार के अनुत्तरित सवाल
परिवार करीब 15 वर्षों के वैवाहिक जीवन के बाद अपनी बेटी को खो चुका है। परिजनों के पास कई अनुत्तरित सवाल हैं—घटना के दिन घर में कौन मौजूद था, मौत से पहले मृतका की स्थिति क्या थी, घटना की सूचना सबसे पहले किसने और कैसे दी, घटनास्थल से क्या बरामद हुआ, मोबाइल फोन और कॉल डिटेल जैसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच हुई या नहीं, और मृतका के वैवाहिक जीवन से जुड़े पुराने विवादों की जांच हुई या नहीं।
जमीनी आवाज की पड़ताल जारी
इस मामले में 'जमीनी आवाज' के पास उपलब्ध दस्तावेजों की क्रमवार पड़ताल की जा रही है। हमारी टीम किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं कर रही है और न ही जांच एजेंसी के निष्कर्ष से पहले किसी आरोप को अंतिम सत्य मान रही है।
यदि यह आत्महत्या थी तो उसके पीछे की परिस्थितियां सामने आनी चाहिए। यदि किसी तरह की आपराधिक भूमिका थी तो जिम्मेदार व्यक्ति कानून के सामने आना चाहिए। और यदि जांच में कोई कमी रही है तो उस कमी की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
आठ महीने बहुत लंबा वक्त है। एक परिवार अपनी बेटी की मौत का सच जानने के लिए भटक रहा है। सवाल सिर्फ यह नहीं कि मौत कैसे हुई, बल्कि यह भी—जांच कहां पहुंची? किसकी जिम्मेदारी तय हुई? विदेश जाने की अनुमति कैसे मिली? और अगर मौत संदिग्ध थी, तो परिवार को इंसाफ के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा?
'जमीनी आवाज' इस मामले की दस्तावेजी पड़ताल जारी रखेगा।





