बच्चे गुनहगार या नेटवर्क के शिकार?

नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई तेज है। ब्राउन शुगर और दूसरे नशीले पदार्थों के खिलाफ लगातार जांच, छापेमारी और गिरफ्तारी हो रही है। कई मामलों में कम उम्र के बच्चे और युवा भी पुलिस की पकड़ में आ रहे हैं। लेकिन जमीनी आवाज का सवाल है—क्या सिर्फ वही बच्चे इस पूरे खेल के गुनहगार हैं, जिन्हें नशे के जाल में फंसाया गया?

हरगिज नहीं। अगर कोई बच्चा नशे की गिरफ्त में पहुंच रहा है, तो यह जांच का विषय भी होना चाहिए कि उसे वहां पहुंचाने वाला कौन है, पैसा किसका है, माल किसका है, नेटवर्क किसका है और संरक्षण किसका है।

चुनाव से पहले राजनीति, युवाओं के बीच जाल?

जादूगोड़ा से लेकर डुमरिया तक कुछ ऐसे प्रभावशाली लोगों को लेकर चर्चा है, जो खुद को नेता बताते हैं या राजनीति में सक्रिय हैं। पंचायत चुनाव की सरगर्मी के बीच सवाल है कि राजनीति सेवा का माध्यम बनेगी या युवाओं की बेरोजगारी का इस्तेमाल प्रभाव बढ़ाने के लिए किया जाएगा।

पंचायत भवन के आसपास ‘अंधेरे’ की गतिविधियों पर सवाल

जमीनी आवाज को मिली जानकारी के अनुसार, एक पंचायत भवन के आसपास कथित तौर पर कुछ संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि देर शाम या रात में वहां वाहन खड़े दिखाई देते हैं और लोगों की आवाजाही होती है। सवाल यह नहीं कि वहां कौन खड़ा था, सवाल यह है कि वहां क्या हो रहा था।

‘म्यूल अकाउंट’ बन रहे हैं युवाओं के लिए नया जाल

नशे के साथ अब साइबर अपराध का खतरा भी तेजी से जुड़ता दिख रहा है। म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसका इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति या अपराधी गिरोह के पैसों को प्राप्त करने, रखने या आगे भेजने के लिए किया जाता है। कई मामलों में अपराधी लालच, कमीशन या दबाव देकर युवाओं से खाते उपलब्ध कराते हैं।

इसलिए जांच को यह भी देखना चाहिए कि खाता किसने उपलब्ध कराया, किसने लेनदेन कराया, किसने कमीशन दिया और पैसे का अंतिम लाभार्थी कौन था।

पुलिस कार्रवाई कर रही है, अब ‘बड़े नामों’ की बारी

अगर किसी बड़े नेटवर्क के पीछे प्रभावशाली लोग हैं, तो केवल छोटे सप्लायर या नशे की गिरफ्त में आए युवाओं पर कार्रवाई से समस्या खत्म नहीं होगी:

  • नशे की सप्लाई लाइन तोड़नी होगी
  • पैसे की लाइन पकड़नी होगी
  • म्यूल अकाउंट का स्रोत खोजना होगा
  • मोबाइल और डिजिटल लेनदेन की कड़ियां जोड़नी होंगी
  • संरक्षण देने वालों तक पहुंचना होगा

सरकारी कुर्सी किसी व्यक्ति की निजी ढाल नहीं हो सकती।

जमीनी आवाज का रुख

जमीनी आवाज किसी व्यक्ति को बिना प्रमाण अपराधी घोषित नहीं कर रहा। लेकिन जहां गंभीर आरोप हैं, वहां सवाल पूछना पत्रकारिता का अधिकार ही नहीं, जिम्मेदारी है। नशे के खिलाफ लड़ाई तभी पूरी होगी, जब गिरफ्तारी सिर्फ उस हाथ की नहीं होगी जिसमें नशे की पुड़िया मिली, बल्कि उस हाथ तक भी पहुंचेगी जिसने वह पुड़िया युवा की मुट्ठी में रखी।