घाटशिला/मुसाबनी।

घाटशिला में सड़क हादसों का सिलसिला अब सिर्फ दुर्घटना नहीं, बल्कि मासूमों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल बनता जा रहा है। लगातार दूसरे दिन सड़क हादसे ने बच्चों को अपना निशाना बनाया। एक दिन पहले दर्दनाक हादसे में एक मासूम की जान चली गई, तो अगले ही दिन तेज रफ्तार पल्सर बाइक ने स्कूल बच्चों को ले जा रहे मैजिक वाहन में पीछे से जोरदार टक्कर मार दी।

मुसाबनी-घाटशिला मुख्य मार्ग पर सूरदा चर्च के समीप हुए इस हादसे में मैजिक वाहन में सवार तीन स्कूली बच्चे घायल हो गए। दुर्घटना में बाइक सवार दो युवक भी घायल हुए। घायल बच्चों में केंद्रीय विद्यालय सूरदा के छात्र कुणाल लामा समेत अन्य बच्चे शामिल हैं। सभी घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केंदाडीह पहुंचाया गया।


बताया गया कि मैजिक वाहन बच्चों को लेकर सूरदा चर्च के बगल वाले रास्ते से सौदा बस्ती की ओर जा रहा था। इसी दौरान मुसाबनी की ओर से तेज रफ्तार में आ रही पल्सर बाइक अनियंत्रित होकर मैजिक वाहन से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहन में बैठे बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए।

दो दिन से एक ही सवाल—बच्चे ही क्यों?

एक तरफ एक परिवार अपने मासूम को खोने के गम में है, दूसरी तरफ अगले ही दिन स्कूल के बच्चे सड़क हादसे में घायल हो रहे हैं। सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि बाइक कितनी तेज थी। सवाल यह है कि घाटशिला-मुसाबनी की सड़कों पर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?

स्कूल जाने वाले बच्चे हों या सड़क किनारे खड़े परिवार—अगर तेज रफ्तार और अनियंत्रित वाहन इसी तरह दौड़ते रहे तो अगला हादसा किस घर का चिराग बुझाएगा, इसका जवाब कौन देगा?

जमीनी आवाज सवाल करती है—क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है?