घाटशिला... असित भट्टाचार्य 

 किसी इंसान की जिंदगी को केवल उसके अतीत से नहीं, बल्कि उसके आज और आने वाले कल से भी देखा जाना चाहिए। कान्हू मुंडा की कहानी शायद इसी नजरिए से देखने की जरूरत है। पूर्व माओवादी एरिया कमांडर के रूप में संगठन का प्रमुख चेहरा माने जाने वाले कान्हू मुंडा कभी 25 लाख रुपये के इनामी नक्सली थे। उन्होंने अपने साथियों के साथ 15 मार्च 2017 को पुलिस-प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद करीब नौ वर्षों तक जेल में रहे। विभिन्न मामलों में जमानत मिलने के बाद पुरुलिया से जुड़े मामले में भी जमानत का रास्ता साफ हुआ और अंततः उनकी रिहाई का रास्ता खुला। राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटने वाले कान्हू मुंडा को आर्थिक सहायता के साथ ढाई कट्ठा जमीन उपलब्ध कराए जाने की जानकारी है। लेकिन अब कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा सामने है—कान्हू मुंडा अपने घर लौट चुके हैं। लंबे इंतजार के बाद घर में उनकी वापसी से परिवार के बीच खुशी का माहौल है। वर्षों बाद अपने लोगों के बीच लौटना उनके और उनके परिवार के लिए निश्चित रूप से भावनाओं से भरा पल होगा। अतीत को कुरेदना नहीं, भविष्य को संवारना है कान्हू मुंडा आखिर किन परिस्थितियों में नक्सली आंदोलन से जुड़े, उनके जीवन में क्या बीती और उन्हें उस रास्ते पर जाने के लिए किन परिस्थितियों ने प्रभावित किया—इन सवालों का जवाब उनसे बातचीत के बाद ही सामने आ सकता है। 

 जमीनी आवाज न तो बिना प्रमाण किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहता है और न ही किसी व्यक्ति के बीते हुए दर्द को कुरेदकर उसे फिर से दुख देना चाहता है। आज महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आने वाला कल कैसा होगा? एक लंबा अध्याय पीछे छूट चुका है। अब सामने घर है, परिवार है, अपनी मिट्टी है और एक नई जिंदगी है। यही वह समय है जब समाज भी किसी व्यक्ति को उसके अतीत की पहचान से आगे बढ़कर उसके वर्तमान और भविष्य के कामों से पहचानने का अवसर दे। जियान के लिए कान्हू मुंडा बन सकते हैं नई उम्मीद की आवाज कान्हू मुंडा का गांव जियान आज भी विकास की दृष्टि से पिछड़े इलाकों में गिना जाता है। यहां शिक्षा, रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल और युवाओं के भविष्य जैसे कई सवाल हैं। कान्हू मुंडा स्वभाव से शांत, गंभीर और दूरदर्शी बताए जाते हैं। अपने गांव और अपने क्षेत्र को उन्होंने करीब से देखा और जिया है। ऐसे में जमीनी आवाज महसूस करता है कि जियान और आसपास के लोगों के लिए उनके मन में कोई अलग सोच जरूर होगी। अगर उनके अनुभव और सोच आने वाले दिनों में गांव के बच्चों की शिक्षा, युवाओं के रोजगार, सामाजिक एकता और क्षेत्र के विकास के काम आएं, तो यह केवल कान्हू मुंडा की नई शुरुआत नहीं होगी, बल्कि उनके गांव के लिए भी एक नई उम्मीद की शुरुआत होगी। जमीनी आवाज कान्हू मुंडा और उनके परिवार को घर वापसी की इस खुशी और नई जिंदगी की शुरुआत के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देता है। हमारी कामना है कि आने वाला समय उनके परिवार के लिए सुख, शांति और सम्मान लेकर आए। और कान्हू मुंडा अपने जीवन के इस नए अध्याय में ऐसा सकारात्मक काम करें कि उनका नाम उनके अतीत से नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए अच्छे कार्यों से याद किया जाए। क्योंकि इतिहास में सबसे खूबसूरत जगह उस व्यक्ति को मिलती है, जो अपने बीते कल से सीखकर आज को बेहतर और आने वाले कल को रोशन करने की कोशिश करता है। जमीनी आवाज की यही शुभकामना है—कान्हू मुंडा की नई पहचान उनके अतीत से नहीं, उनके आने वाले अच्छे कामों से बने।