घाटशिला.... असित भट्टाचार्य

कुछ समय पहले जमीनी आवाज ने एक सड़क दुर्घटना से जुड़ी खबर प्रकाशित की थी, जिसमें दुर्भाग्यवश गलत सूचना के आधार पर कुणाल की मृत्यु होने की बात लिख दी गई थी।

यह सूचना गलत थी।

जमीनी आवाज को अभी-अभी शमशेर खान से मिली जानकारी के अनुसार कुणाल की मृत्यु नहीं हुई है। वह जिंदा है और गंभीर स्थिति में इलाज के लिए कोलकाता के अस्पताल ले जाया गया है।

इस महत्वपूर्ण जानकारी के सामने आते ही जमीनी आवाज अपनी पूर्व खबर में तत्काल सुधार करता है।

कुणाल की मौत की खबर लिखना हमारे लिए भी बेहद पीड़ादायक था, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी है कि एक पत्रकार के रूप में हम अपनी गलती को स्वीकार करें।

इसलिए आज जमीनी आवाज बिना किसी संकोच के कहता है—कुणाल की मृत्यु की खबर गलत थी। कुणाल जिंदा है।

बाकी दुर्घटना से जुड़ी खबर और उसके पीछे की पूरी मानवीय कहानी अपनी जगह कायम है।

15 साल पहले सड़क से मिला था लावारिस बच्चा

करीब 15 वर्ष पहले बड़ा घाट के रास्ते पर एक मासूम बच्चा लावारिस हालत में मिला था। उसके जन्मदाता कौन थे, उसकी जाति क्या थी—यह किसी को मालूम नहीं था।

लेकिन कृष्ण लामा और उषा लांबा ने उसकी जाति नहीं पूछी। उन्होंने उसका अतीत नहीं पूछा। उन्होंने सिर्फ इतना देखा कि एक मासूम बच्चा सहारे के बिना सड़क पर पड़ा है।

प्रधान और ग्रामीणों से पूछताछ के बाद उन्होंने उस बच्चे को अपने साथ लिया। उसे घर दिया, परिवार दिया, प्यार दिया, संस्कार दिए और शिक्षा का अवसर दिया। कुणाल का दाखिला सूरदास सेंट्रल स्कूल में कराया गया।

जिस बच्चे की पहचान कभी सड़क पर पड़ी एक लावारिस जिंदगी के रूप में थी, वह उनके घर में बेटा बनकर बड़ा हुआ।

और अब वही कुणाल सड़क दुर्घटना के बाद जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।

बताया गया है कि स्कूल से छुट्टी के बाद विद्यार्थियों को ले जा रहे मैजिक वाहन में बच्चे सवार थे। इसी दौरान पल्सर बाइक पर सवार दो युवक तेज रफ्तार में आए और मैजिक से टकरा गए। दुर्घटना में कई विद्यार्थी घायल हुए।

लेकिन अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है—कुणाल जिंदा है।

और इस समय हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी आरोप लगाने से पहले उसके लिए प्रार्थना करना है।

जमीनी आवाज की भगवान से प्रार्थना

हे भगवान…

जिस बच्चे को कभी उसके जन्मदाता सड़क पर छोड़ गए थे, उसे कृष्ण लामा और उषा लांबा ने अपना बनाकर जिंदगी दी।

आज वही बच्चा आपकी शरण में है।

उसकी सांसों को मजबूती देना।
उसके जीवन को बचाना।
उसके माता-पिता की आंखों में फिर खुशी लौटाना।
कुणाल को लंबी आयु देना।

और जमीनी आवाज की कलम से हुई इस गंभीर भूल के लिए हमें क्षमा करना।

हमने जल्दबाजी में मिली गलत सूचना को सत्य मानकर उसकी मृत्यु की खबर लिख दी।

आज हम उसी खबर को पूरी जिम्मेदारी के साथ सुधार रहे हैं।

पत्रकारिता में गलती होना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन गलती को स्वीकार न करना उससे भी बड़ी गलती है।

इसलिए जमीनी आवाज अपने पाठकों से भी क्षमा चाहता है और स्पष्ट करता है—

कुणाल की मृत्यु नहीं हुई है। कुणाल जीवित है और कोलकाता में उसका इलाज चल रहा है।

अब हमारी प्रार्थना सिर्फ इतनी है—

कुणाल वापस आए।
अपने माता-पिता के पास वापस आए।
स्कूल वापस जाए।
और 15 साल पहले जिस जिंदगी को इंसानियत ने उसे दिया था, वह जिंदगी उसे पूरी मिले।

जमीनी आवाज की कलम आज आरोप से पहले दुआ लिख रही है—
"हे भगवान, कुणाल को बचा लीजिए।"