घाटशिला, 5 सितंबर।
घाटशिला के दाहीगोड़ा सहित पूरे क्षेत्र के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन को गहरा आघात पहुंचा है। दाहीगोड़ा में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध रावण दहन एवं टुसू मेला की शुरुआत से जुड़े संस्थापक सदस्य मृत्युंजय बोस उर्फ गोपू बोस का शनिवार को निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही दाहीगोड़ा से लेकर पूरे घाटशिला क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
गोपू बोस लंबे समय से क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से सक्रिय रूप से जुड़े रहे। रावण दहन और टुसू मेला को स्थापित करने और उसे लगातार आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। आज ये आयोजन जिस पहचान के साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा बन चुके हैं, उसके पीछे गोपू बोस जैसे लोगों की वर्षों की मेहनत और समर्पण रहा है।
उनके निधन से केवल एक आयोजन समिति ने अपना एक महत्वपूर्ण सदस्य नहीं खोया, बल्कि घाटशिला ने अपनी लोक-सांस्कृतिक चेतना से जुड़े एक ऐसे व्यक्ति को खो दिया, जिसने उत्सवों को समाज को जोड़ने का माध्यम बनाया।
आयोजक से कहीं अधिक—सामाजिक सरोकारों से जुड़ी पहचान
गोपू बोस की पहचान केवल आयोजक के रूप में नहीं थी। वे सामाजिक सरोकारों से जुड़े, मिलनसार और लोगों के सुख-दुख में खड़े रहने वाले व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे। दाहीगोड़ा के रावण दहन और टुसू मेला जैसे आयोजनों को उन्होंने केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं माना, बल्कि समाज, संस्कृति और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया।
जमीनी आवाज परिवार के लिए व्यक्तिगत क्षति
गोपू बोस का निधन जमीनी आवाज के संपादक के लिए भी व्यक्तिगत रूप से बेहद पीड़ादायक क्षण है। वे संपादक के मित्र रहे और वर्षों से आत्मीय संबंध बना रहा। ऐसे में उनकी विदाई की खबर केवल एक समाचार नहीं, बल्कि एक अपने व्यक्ति के चले जाने का दुख है।
जमीनी आवाज परिवार गोपू बोस के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करता है। उनकी स्मृतियां, उनके द्वारा शुरू की गई सांस्कृतिक परंपराएं और समाज के लिए उनका योगदान लंबे समय तक लोगों के बीच जीवित रहेगा।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों, मित्रों एवं शुभचिंतकों को यह अपार दुख सहने की शक्ति दें।





