मुसाबनी... असित भट्टाचार्य

शिक्षक दिवस पर मुसाबनी प्रखंड प्रमुख रामदेव हेंब्रम ने अपने पुराने गुरुजनों का सम्मान कर केवल गुरु-शिष्य परंपरा को याद नहीं किया, बल्कि शिक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता को भी सामने रखा। अपने जीवन में शिक्षा और संस्कार की नींव रखने वाले शिक्षकों से मिलकर उन्होंने अंगवस्त्र एवं उपहार भेंट किए और उनका आशीर्वाद लिया।

रामदेव हेंब्रम ने अपनी शिक्षा की शुरुआत गांव के प्राथमिक विद्यालय से की थी। शिक्षक दिवस पर वे अपने पुराने विद्यालय पहुंचे, जहां भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पूजा-अर्चना कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने अपने समय की प्रधान अध्यापिका रीना कुमारी एवं शिक्षक चुनका मार्डी को सम्मानित किया। इसके अलावा उत्क्रमित मध्य विद्यालय सूरदा में कार्यरत शिक्षक मुकेश कुमार मिश्रा को भी अंगवस्त्र एवं उपहार भेंट किया। मुकेश कुमार मिश्रा को याद करते हुए रामदेव हेंब्रम भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि यही वह शिक्षक हैं, जिन्होंने बचपन में उनकी उंगली पकड़कर उन्हें विद्यालय तक पहुंचाया था।

रामदेव हेंब्रम ने उच्च विद्यालय चापड़ी के पूर्व प्रधानाचार्य चंद्र मोहन सोरेन तथा मुसाबनी माइंस इंटर कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर अशोक सतपति से भी मुलाकात की और उन्हें उपहार भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

सम्मान से आगे बढ़कर शिक्षा की जिम्मेदारी

रामदेव हेंब्रम लंबे समय से जरूरतमंद विद्यार्थियों की पढ़ाई में अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करते रहे हैं। विद्यार्थियों को शैक्षणिक किताबें उपलब्ध कराने के उनके प्रयास भी इसी सोच का हिस्सा हैं।

शिक्षक दिवस पर उन्होंने जरूरतमंद विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि जिस बच्चे को पढ़ाई के लिए किताबों की जरूरत है, वह किताब के अभाव में अपनी पढ़ाई न रोके। जिस जरूरतमंद विद्यार्थी को जहां तक पढ़ाई करनी है, उसकी जरूरत के अनुसार किताबें उपलब्ध कराने का प्रयास वे करेंगे।

उनका कहना है कि आर्थिक कठिनाई किसी बच्चे की पढ़ाई के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। समाज में यदि सक्षम लोग आगे आएं और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी अपने स्तर पर उठाएं, तो अनेक बच्चों के सपनों को उड़ान मिल सकती है।

गुरु का आशीर्वाद, बच्चों के भविष्य की चिंता

इस अवसर पर रामदेव हेंब्रम ने कहा कि गुरु केवल किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की दिशा, संस्कार और सही रास्ते पर चलने की सीख देते हैं। शिक्षक के मार्गदर्शन से विद्यार्थी सफल होने के साथ-साथ एक अच्छा इंसान भी बन सकता है।

जमीनी आवाज की नजर में, शिक्षक दिवस पर गुरुजनों का सम्मान निश्चित रूप से सम्मान और संस्कार की बात है, लेकिन इसकी असली सार्थकता तब होगी, जब समाज का हर सक्षम व्यक्ति किसी न किसी जरूरतमंद बच्चे की शिक्षा में योगदान देने का संकल्प ले।

किसी बच्चे के हाथ में किताब पहुंचाना शायद एक छोटी मदद दिखाई दे, लेकिन उसी किताब में उसके भविष्य का रास्ता छिपा हो सकता है।

रामदेव हेंब्रम की यह पहल अब सिर्फ एक दिन के सम्मान समारोह तक सीमित न रहे, बल्कि मुसाबनी क्षेत्र के जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए एक निरंतर शिक्षा-सहयोग अभियान का रूप ले—यही समाज के लिए सबसे बड़ा संदेश है।

जमीनी आवाज का सवाल भी यही है—अगर एक जनप्रतिनिधि जरूरतमंद बच्चों की किताबों की जिम्मेदारी उठाने के लिए आगे आ सकता है, तो समाज के सक्षम लोग क्यों नहीं?