घर में घुसकर महिला से बदसलूकी, बुजुर्ग माता-पिता से धक्का-मुक्की और परिवार को जिंदा जलाने तक की धमकी का आरोप; पीड़ित पक्ष पूछ रहा—हम पर हमला हुआ या हम ही आरोपी बना दिए गए?

बीएनएस की धारा 126 समेत दोनों पक्षों पर मामला दर्ज होने से आक्रोश; 24 घंटे में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

मुसाबनी/जादूगोड़ा। असित भट्टाचार्य की रिपोर्ट

यह सिर्फ दो पक्षों के बीच विवाद का मामला है या फिर एक ऐसे कथित हमले की कहानी, जिसमें हमला झेलने वाले परिवार को ही कानून की कार्रवाई के घेरे में खड़ा कर दिया गया? कुमीरमुडी में मुसाबनी प्रमुख सह आजसू नेता रामदेव हेंब्रम के घर पर कथित रूप से करीब 80 लोगों की भीड़ के पहुंचने, घर में घुसकर उत्पात मचाने और उनकी पत्नी के साथ मारपीट व बदसलूकी के आरोपों के बाद जादूगोड़ा पुलिस की कार्रवाई अब गंभीर सवालों के घेरे में है।

पीड़ित पक्ष का सबसे बड़ा सवाल है—यदि उनके घर पर हमला हुआ, प्रमुख की पत्नी के साथ कथित मारपीट हुई, कपड़े फाड़े गए, बुजुर्ग माता-पिता के साथ धक्का-मुक्की हुई और पूरे परिवार को जान से मारने तथा घर जलाने की धमकी दी गई, तो फिर जांच का केंद्र पीड़ित परिवार की सुरक्षा और आरोपितों की पहचान होनी चाहिए थी या पीड़ित पक्ष को भी आरोपी बनाकर दोनों पक्षों को एक ही कतार में खड़ा कर देना?

पीड़ित पक्ष के अनुसार, बीएनएस की धारा 126 सहित विभिन्न धाराओं के तहत दोनों पक्षों के लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। इसी कार्रवाई के बाद ग्रामीणों और समर्थकों के बीच नाराजगी बढ़ गई है।

माइंस की बहाली का विवाद, घर तक पहुंची भीड़

मामले की पृष्ठभूमि कुमीरमुडी गांव में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के केन्दाडीह माइंस में बहाली को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ी बताई जा रही है। इसी मुद्दे पर माझी बाबा करिया हांसदा के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन प्रस्तावित था, लेकिन प्रबंधन के साथ वार्ता के बाद आंदोलन वापस ले लिया गया।

शिकायत के अनुसार, कुमीरमुडी गांव के प्रधान घसिया किस्कू के नेतृत्व में करीब 80 लोगों की भीड़ रामदेव हेंब्रम के घर पहुंची। उस समय प्रमुख घर पर मौजूद नहीं थे और खेत में कृषि कार्य करवा रहे थे।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि प्रमुख के घर पहुंची भीड़ ने गाली-गलौज की और परिवार को भयभीत किया। शिकायत में घर को जलाने तथा पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।

पत्नी पर हमला, कपड़े फाड़ने और बुजुर्गों से धक्का-मुक्की का आरोप

मामले का सबसे गंभीर पहलू प्रमुख की पत्नी शिवानी हेंब्रम के साथ कथित मारपीट और बदसलूकी का आरोप है।

लिखित शिकायत के अनुसार, कुछ लोग गाली-गलौज करते हुए घर के अंदर घुस गए। आरोप है कि शिवानी हेंब्रम को थप्पड़ मारा गया और उनके कपड़े फाड़ दिए गए। वहीं प्रमुख के पिता सिंगू हेंब्रम और माता मायनों हेंब्रम के साथ भी धक्का-मुक्की किए जाने का आरोप लगाया गया है।

अब सवाल यह है कि क्या पुलिस ने महिला के आरोपों की अलग से और गंभीरता के साथ जांच की? क्या पीड़िता का विस्तृत बयान लिया गया? क्या घर में मौजूद बुजुर्ग माता-पिता के बयान दर्ज किए गए? क्या कथित रूप से घर में घुसने वाले लोगों की भूमिका की पहचान की गई? और सबसे बड़ा सवाल—क्या कथित 80 लोगों की भीड़ के पहुंचने की घटना की निष्पक्ष जांच हुई?

घटना के बाद पीड़ित से मिलने तक नहीं पहुंची पुलिस?

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना के बाद पुलिस की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े हुए। उनका कहना है कि मारपीट और बदसलूकी के इतने गंभीर आरोपों के बावजूद पीड़ित परिवार की स्थिति जानने और उनसे मिलने को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई।

ऐसे में ग्रामीण पूछ रहे हैं—क्या किसी महिला के साथ कथित मारपीट और कपड़े फाड़ने के आरोप को भी सामान्य विवाद की तरह देखा जा सकता है?

पहले भी मिल चुकी है जान से मारने की धमकी

शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्रमुख रामदेव हेंब्रम को इससे पहले भी जान से मारने की धमकी मिल चुकी है। ऐसे में कुमीरमुडी की यह घटना केवल एक दिन की मारपीट तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि प्रमुख और उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

24 घंटे में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन

पीड़ित पक्ष और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर कथित दोषियों के खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

अब पूरा मामला जादूगोड़ा पुलिस के सामने है।

क्या पुलिस पीड़ित और आरोपित की भूमिका का अलग-अलग और निष्पक्ष परीक्षण करेगी? क्या महिला के साथ कथित मारपीट और बदसलूकी के आरोपों की स्वतंत्र जांच होगी? क्या कथित रूप से घर में घुसने और परिवार को धमकाने वालों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी?

या फिर—"दोनों पक्षों पर केस दर्ज" की एक पंक्ति के पीछे पूरे मामले की गंभीरता दबकर रह जाएगी?

जमीनी आवाज का सीधा सवाल है—अगर किसी घर में कथित रूप से हमला हो, महिला के साथ मारपीट और बदसलूकी के आरोप हों, बुजुर्गों से धक्का-मुक्की की शिकायत हो और परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई हो, तो न्याय का पहला कदम पीड़ित की आवाज सुनना होना चाहिए या उसे भी आरोपी बनाकर मामला बराबर कर देना?

कुमीरमुडी अब सिर्फ एक गांव का विवाद नहीं, बल्कि कानून की निष्पक्षता और पुलिस कार्रवाई की परीक्षा बन चुका है।