जामडीह रेलवे फाटक पर तीन दिन से जाम

नीमडीह थाना क्षेत्र का जामडीह रेलवे फाटक इन दिनों राहगीरों के लिए परेशानी का पर्याय बन गया है। पिछले तीन दिनों से सड़क पर खराब पड़ी एक गाड़ी ने पहले से जाम की समस्या से जूझ रहे इस मार्ग की स्थिति और बिगाड़ दी है। जमशेदपुर-पुरुलिया मुख्य मार्ग NH-18/32 पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग रही है और राहगीरों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर खराब खड़ी गाड़ी को अब तक नहीं हटाए जाने से आवागमन प्रभावित है। रेलवे फाटक बंद होने के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। खास बात यह है कि इस मार्ग से गुजरने वाली एंबुलेंस भी जाम में फंस रही हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ रही है।

अधूरा ओवरब्रिज और बढ़ता ट्रैफिक—समस्या की जड़ क्या है?

जामडीह रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज का निर्माण लंबे समय से अधूरा पड़ा है। ऐसे में फाटक ही इस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों के लिए प्रमुख रास्ता बना हुआ है। फाटक बंद होने पर स्वाभाविक रूप से वाहनों की कतार लगती है और सड़क पर कोई वाहन खराब हो जाए तो पूरी यातायात व्यवस्था प्रभावित हो जाती है।

यही स्थिति जामडीह में दिखाई दे रही है। एक खराब वाहन तीन दिन तक सड़क पर पड़ा रह जाए और उसके बाद भी यातायात व्यवस्था सामान्य न हो सके, तो यह केवल जाम की समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की चुनौती भी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस ओवरब्रिज को फाटक पर निर्भरता कम करनी थी, वह आखिर कब पूरा होगा?

वाहन चालकों का कहना है कि घंटों जाम में फंसने से समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है। वहीं ग्रामीणों की चिंता मरीजों और एंबुलेंस को लेकर ज्यादा है।

ग्रामीणों की तीन मांगें

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और रेलवे प्रशासन से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • सड़क पर खराब पड़ी गाड़ी को तत्काल हटाया जाए।
  • जामडीह रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण जल्द पूरा कराया जाए।
  • जाम की स्थिति में यातायात नियंत्रित करने के लिए पुलिस की तैनाती की जाए।

ग्रामीणों ने कहा है कि यदि समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में परेशानी और बढ़ सकती है। उन्होंने समाधान नहीं होने की स्थिति में सड़क जाम कर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

आखिर कब तक झेलेंगे परेशानी?

अब सवाल सिर्फ जाम का नहीं है—सवाल यह है कि अधूरे ओवरब्रिज और बदहाल यातायात व्यवस्था के बीच मरीजों, एंबुलेंस और आम राहगीरों को आखिर कब तक परेशानी झेलनी पड़ेगी?