श्रेया के बाद पिता सुब्रतो सिन्हा की भी मौत, 2 सितंबर का हादसा बना परिवार के लिए कभी न भरने वाला जख्म

चालक की गिरफ्तारी के बाद अब बड़ा सवाल—गाड़ी का मालिक कहां है? हादसे के लिए जिम्मेदार पूरे सिस्टम की जवाबदेही कब तय होगी?

घाटशिला। असित भट्टाचार्य

2 सितंबर की वह शाम… जब अमाईनगर पुल पर एक सफेद रंग की रेनॉल्ट ट्राइबर ने कई जिंदगियों को घायल कर दिया था। उस हादसे में एक ही परिवार के चार लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए थे। शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह हादसा एक परिवार से दो जिंदगियां छीन लेगा।

सुब्रतो सिन्हा (41), उनकी पत्नी सुष्मिता सिन्हा (33), पांच वर्षीय बेटी श्रेया कृष्णा सिन्हा और कृष्णा सिन्हा हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए थे।

3 सितंबर को पांच साल की मासूम श्रेया जिंदगी की जंग हार गई।

और अब… 9 सितंबर को उसके पिता सुब्रतो सिन्हा की भी मौत हो गई।

टीएमएच से परिजन सुब्रतो सिन्हा को एंबुलेंस से घाटशिला अनुमंडल की ओर ले जा रहे थे। रास्ते में ही उनकी हालत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। घाटशिला अनुमंडल अस्पताल के चिकित्सक ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

एक पिता अपनी पांच साल की बेटी को खो चुका था… और कुछ ही दिनों बाद वही पिता भी इस दुनिया से चला गया।

एक ही हादसा। एक ही परिवार। दो मौतें। और पीछे रह गए कई सवाल।

लेकिन सवाल सिर्फ हादसे का नहीं है… सवाल जवाबदेही का है

क्या सड़क पर हुई हर मौत को महज एक दुर्घटना मानकर फाइल बंद कर देना ही व्यवस्था का काम है?

चालक गिरफ्तार हो गया—यह कार्रवाई है। लेकिन क्या सिर्फ चालक की गिरफ्तारी से पूरी जिम्मेदारी खत्म हो जाती है?

जिस वाहन से इतना बड़ा हादसा हुआ, उस वाहन का मालिक कौन है? क्या वाहन की फिटनेस की जांच हुई थी? क्या उसके कागजात दुरुस्त थे? क्या चालक के पास वैध लाइसेंस था? क्या वाहन की गति, तकनीकी स्थिति और हादसे के वास्तविक कारणों की निष्पक्ष जांच हुई? क्या हादसे से जुड़े हर जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका जांच के दायरे में आई?

और सबसे बड़ा सवाल—अगर किसी की लापरवाही ने एक मासूम बच्ची और उसके पिता की जान ले ली, तो क्या कानून की नजर सिर्फ चालक तक सीमित रहेगी?

श्रेया की मौत सिर्फ एक मौत नहीं थी

पांच साल की बच्ची श्रेया कृष्णा सिन्हा की मौत ने कई सवाल पहले ही खड़े कर दिए थे।

वह अस्पताल पहुंची। इलाज हुआ। लेकिन क्या उसे समय पर वह चिकित्सा सहायता मिल सकी, जिसकी उसे जरूरत थी?

किस सिस्टम की कमी ने उसकी जिंदगी छीन ली—इसका जवाब कौन देगा?

अगर इलाज में कहीं चूक हुई, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। अगर सड़क व्यवस्था में कमी थी, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। अगर वाहन या चालक से जुड़ी कोई लापरवाही थी, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। क्योंकि हर मौत के बाद केवल मुआवजा और संवेदना पर्याप्त नहीं होती।

जमीनी आवाज का सवाल

एक परिवार उजड़ गया। एक पांच साल की बच्ची चली गई। कुछ दिन बाद उसका पिता भी चला गया। परिवार के दूसरे सदस्य आज भी हादसे के दर्द और इलाज से जूझ रहे हैं।

दो मौतें हो गईं… लेकिन क्या सिस्टम जागा? क्या इस हादसे की पूरी जिम्मेदारी तय होगी? क्या वाहन मालिक से पूछताछ होगी? क्या वाहन की तकनीकी जांच और फिटनेस की रिपोर्ट सार्वजनिक होगी? क्या अस्पताल और इलाज की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच होगी? क्या हादसे के हर पहलू की निष्पक्ष जांच होगी?

या फिर—चालक की गिरफ्तारी के बाद मामला धीरे-धीरे कागजों में दब जाएगा और एक और परिवार की चीख व्यवस्था के शोर में खो जाएगी?

श्रेया अब वापस नहीं आएगी। सुब्रतो सिन्हा भी वापस नहीं आएंगे। लेकिन अगर उनकी मौत के बाद भी जिम्मेदारी तय नहीं हुई, तो अगली श्रेया और अगला सुब्रतो कौन होगा?

जमीनी आवाज मांग करता है कि अमाईनगर हादसे की निष्पक्ष और व्यापक जांच हो, वाहन मालिक सहित सभी संभावित जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो दोषियों पर कानून के तहत कठोर कार्रवाई हो।

यह सिर्फ एक परिवार का सवाल नहीं है। यह हर उस परिवार का सवाल है, जो सड़क पर निकलता है और सुरक्षित घर लौटने की उम्मीद करता है।