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गणपति आए हैं, अब विवेक भी जगना चाहिए: नशे के खिलाफ जागरूकता की जरूरत
By असित भट्टाचार्य14 September 2026 at 05:16 am170 views

गणपति पूजा के पहले दिन एक संपादकीय सवाल—क्या हम उस समाज को बचा पा रहे हैं जिसकी सबसे ज्यादा जरूरत है? युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर एक भावनात्मक और विचारोत्तेजक अपील।
## गणपति आए हैं, अब विवेक भी जगना चाहिए
**आज देवताओं की पूजा का पहला दिन है… लेकिन क्या हम उस समाज को भी देखेंगे, जिसे बचाने की सबसे ज्यादा जरूरत है?**
*गणपति बुद्धि के देवता हैं—तो आइए, आज नशे के अंधेरे के खिलाफ अपने घर से एक नई रोशनी जलाएं।*
ॐ गं गणपतये नमः।
आज गणपति की पूजा है। आज से शुभता की शुरुआत है। आज से देवताओं की आराधना का क्रम शुरू होता है।
लेकिन आज मैं पूजा के बीच एक सवाल रखना चाहता हूं— अगर आज देवता सचमुच हमारे चारों ओर विचरण कर रहे हों और हमारे समाज को देख रहे हों, तो उन्हें सबसे ज्यादा चिंता किस बात की होगी?
शायद मंदिरों की सजावट देखकर उन्हें प्रसन्नता होगी। भक्तों की आस्था देखकर संतोष होगा। लेकिन क्या हमारे घरों से निकलती कोई तस्वीर उन्हें बेचैन भी करती होगी?
वह तस्वीर है—**नशे की गिरफ्त में जाता हुआ हमारा युवा।**
जिस उम्र में आंखों में सपने होने चाहिए, वहां नशे की लालिमा क्यों है? जिस हाथ में किताब, कलम, हुनर और रोजगार होना चाहिए, वहां नशे का सामान कैसे पहुंच रहा है? जिस बेटे को मां-बाप ने अपनी पूरी जिंदगी लगाकर बड़ा किया, वह धीरे-धीरे किसी ऐसी दुनिया में क्यों जा रहा है, जहां से लौटना उसके लिए मुश्किल होता जा रहा है?
यह सवाल सिर्फ पुलिस से नहीं है। यह सवाल सिर्फ सरकार से नहीं है। **यह सवाल हम सब से है।**
### हाथी, गणेश और लालच की साजिश
गणपति का स्वरूप हमें हाथी की याद दिलाता है। हाथी हमारे जंगलों, हमारी प्रकृति और हमारे अस्तित्व का हिस्सा है। लेकिन इंसान की लालच ने वहां भी खतरे पैदा कर दिए हैं। देश के कुछ हिस्सों में नशीले पदार्थों का इस्तेमाल कर हाथियों को प्रभावित करने और उनके जरिए अवैध गतिविधियां चलाने जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं।
सोचिए… जिस हाथी में हम गणेश का स्वरूप देखते हैं, अगर वही नशे की साजिश का शिकार हो जाए, तो इससे बड़ी विडंबना क्या होगी?
और फिर अपने घरों की तरफ देखिए। आज हमारा युवा भी नशे के निशाने पर है। फर्क सिर्फ इतना है कि जंगल का हाथी अपनी भाषा में खतरे का विरोध नहीं कर सकता, लेकिन **हमारा युवा कर सकता है—अगर हम उसकी आवाज समय रहते सुन लें।**
### क्या हम वही समाज दे रहे हैं जिसकी देवता कल्पना करते हैं?
महादेव सबके स्वामी हैं। गणपति उनके पुत्र हैं। आज गणपति की पूजा करते हुए हमें शायद महादेव की ओर भी देखना चाहिए और खुद से पूछना चाहिए— क्या हम अपने बच्चों को वह समाज दे रहे हैं, जिसकी कल्पना हमारे देवताओं के आशीर्वाद में की जाती है?
नशा केवल शरीर को नहीं खाता। वह धीरे-धीरे **सपनों को खाता है। फिर आत्मविश्वास को खाता है। फिर परिवार का सुख खाता है। फिर रिश्तों को खाता है।** और अंत में कभी-कभी पूरी जिंदगी को निगल जाता है।
लेकिन आज का संपादकीय डर पैदा करने के लिए नहीं है। **आज का संदेश उम्मीद का है।**
क्योंकि कोई भी युवा केवल नशे की पहचान नहीं है। वह किसी मां का बेटा है। किसी पिता की उम्मीद है। किसी बहन का भाई है। किसी परिवार का भविष्य है।
### माता-पिता के लिए एक अपील
इसलिए अगर कोई बच्चा नशे की तरफ बढ़ रहा है, तो उसे सिर्फ डांटिए मत। उसके पास बैठिए। उससे पूछिए—
*"बेटा, आखिर तुम्हारे भीतर ऐसा क्या चल रहा है?"*
हो सकता है उसके पीछे गलत संगत हो। हो सकता है तनाव हो। हो सकता है असफलता का दर्द हो। हो सकता है अकेलापन हो। हो सकता है वह किसी ऐसी परेशानी से लड़ रहा हो, जिसे वह किसी से कह नहीं पा रहा।
**हर बदला हुआ बच्चा बिगड़ा हुआ बच्चा नहीं होता। कभी-कभी वह मदद मांग रहा होता है।**
माता-पिता के लिए आज गणपति का सबसे बड़ा संदेश यही हो सकता है—
- अपने बच्चों पर नजर जरूर रखिए, लेकिन उनसे दूरी मत बनाइए।
- उनके मोबाइल को देखने से पहले कभी उनके मन को पढ़ने की कोशिश कीजिए।
- उनके दोस्तों पर सवाल उठाने से पहले उनसे दोस्ती कीजिए।
- उनकी गलती पर गुस्सा करने से पहले यह समझिए कि गलती की शुरुआत कहां से हुई।
### युवाओं के नाम एक संदेश
आपके सामने पूरी जिंदगी पड़ी है। किसी नशे को इतना अधिकार मत दीजिए कि वह आपके भविष्य का फैसला करने लगे।
**आपका शरीर आपका है। आपका दिमाग आपका है। आपके सपने आपके हैं।** किसी नशे को इन तीनों का मालिक मत बनने दीजिए।
और अगर आप पहले से इस जाल में फंस चुके हैं, तो भी देर नहीं हुई। **वापस लौटना कमजोरी नहीं है। वापस लौटना ही असली हिम्मत है।**
### आज का संकल्प
आज गणपति के सामने एक संकल्प क्यों न लिया जाए?
- न खुद नशा करेंगे।
- किसी दोस्त को नशे की तरफ जाते देखेंगे तो चुप नहीं रहेंगे।
- अपने बच्चों से संवाद करेंगे।
- जरूरत पड़े तो विशेषज्ञ या उपचार की मदद लेने में शर्म नहीं करेंगे।
**क्योंकि नशे से लड़ाई शर्म की नहीं, साहस की लड़ाई है।**
आज गणपति आए हैं। आइए, हम सिर्फ उनके सामने दीपक न जलाएं। अपने घरों के भीतर भी एक दीपक जलाएं—विवेक का। एक दीपक संवाद का। एक दीपक उम्मीद का। एक दीपक अपने बच्चों के भविष्य का।
क्योंकि शायद आज देवता हमारे मंदिरों में ही नहीं, हमारे घरों के दरवाजे पर भी खड़े हैं। वे देख रहे हैं—
कौन अपने बच्चे को समझ रहा है? कौन उसे बचा रहा है? कौन नशे के खिलाफ आवाज उठा रहा है? और कौन सब कुछ देखकर भी चुप है?
आज गणपति से सिर्फ इतना मत मांगिए कि "मेरे घर में सुख रहे।" यह भी मांगिए—
*"हे गणपति, मेरे घर के बच्चों को सही रास्ता पहचानने की बुद्धि देना… और गलत रास्ते से लौटने का साहस देना।"*
यही पूजा होगी। यही प्रसाद होगा। यही नई शुरुआत होगी।
**गणपति बप्पा मोरया। नशामुक्त युवा—हमारा संकल्प हो।**
और याद रखिए—
> **मूर्ति में गणेश को देखना आस्था है, लेकिन अपने बच्चे में भविष्य के गणेश को बचा लेना—सच्ची जिम्मेदारी है।**
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