बहरागोड़ा, घाटशिला। स्थानीय संवाददाता
बांग्ला भाषा के संरक्षण, संवर्धन और उसके सम्मान को लेकर बहरागोड़ा के विधायक समीर महंती ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। गुरुवार को विधायक समीर महंती के कार्यालय में झारखंड बांग्ला भाषा उन्नयन समिति एवं बांग्लाभाषी समाज का एक प्रतिनिधिमंडल घाटशिला शहर केंद्रीय संयुक्त सचिव तथा झारखंड बांग्ला भाषी उन्नयन समिति से जुड़े तापस चटर्जी के नेतृत्व में विधायक से मिला।
प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा सदन में बांग्ला भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रमुखता से उठाने के लिए विधायक समीर महंती के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि किसी समाज की संस्कृति, इतिहास, परंपरा और पहचान की सबसे मजबूत कड़ी होती है। ऐसे में बांग्ला भाषा के सम्मान और उसके संरक्षण के लिए जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर विधायक समीर महंती ने कहा कि बांग्ला भाषा झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग बांग्ला भाषा बोलते और समझते हैं तथा इसका यहां की सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से गहरा संबंध रहा है। उन्होंने कहा कि भाषा किसी समाज को जोड़ने का काम करती है और अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान बनाए रखना प्रत्येक पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
विधायक ने कहा कि बांग्ला भाषा के संरक्षण, संवर्धन और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी समृद्ध विरासत को पहुंचाने के लिए वे लगातार मजबूती से आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि विधानसभा जैसे लोकतांत्रिक मंच पर भाषा और संस्कृति से जुड़े विषयों को सामने रखना केवल किसी एक समाज की मांग नहीं, बल्कि राज्य की बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक विरासत के सम्मान का विषय है।
वहीं प्रतिनिधिमंडल की ओर से तापस चटर्जी ने कहा कि बांग्ला भाषा के सम्मान और रक्षा का सवाल केवल भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ प्रश्न है। उन्होंने कहा कि झारखंड में बांग्लाभाषी समाज लंबे समय से अपनी भाषा, साहित्य, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए प्रयासरत रहा है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों द्वारा विधानसभा में इस मुद्दे को उठाना समाज के लिए उत्साह और भरोसे का विषय है।
तापस चटर्जी ने कहा कि बांग्ला भाषा की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सरकारी स्तर पर भी सकारात्मक पहल की आवश्यकता है। विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा बांग्ला भाषा के संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि भाषा बचाने का अर्थ केवल शब्दों को बचाना नहीं, बल्कि उस भाषा से जुड़ी संस्कृति, इतिहास, लोकपरंपरा और सामूहिक पहचान को सुरक्षित रखना है।
उन्होंने विधायक समीर महंती के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बांग्ला भाषा से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर गंभीरता से देखने की आवश्यकता है। समाज की अपेक्षा है कि भविष्य में भी भाषा और संस्कृति से जुड़े विषयों को विधानसभा एवं सार्वजनिक मंचों पर मजबूती से उठाया जाता रहे।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विधायक के प्रति सम्मान एवं विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि बांग्ला भाषा के सम्मान की लड़ाई किसी के विरोध में नहीं, बल्कि अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए है। प्रतिनिधिमंडल ने विधायक को सहयोग और समर्थन का भरोसा भी दिलाया।
मौके पर बांग्लाभाषी समाज एवं समिति से जुड़े अन्य प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक स्वर में भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया।
"भाषा का सम्मान, हमारी संस्कृति का सम्मान है।"





