डामपाड़ा में बाहरी नेटवर्किंग टीमों की सक्रियता
घाटशिला के ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर मनी मार्केटिंग और नेटवर्किंग के नाम पर आर्थिक गतिविधियों की हलचल ने सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार पिछले तीन-चार दिनों से डामपाड़ा क्षेत्र में पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर इलाके से आए कुछ कथित नेटवर्किंग लीडर्स सक्रिय हैं, जो गांवों में लोगों से संपर्क कर कम समय में अच्छी कमाई के सपने दिखा रहे हैं।
यहीं से जमीनी आवाज का सबसे बड़ा सवाल शुरू होता है—आखिर मेदिनीपुर से आने वाले ये नेटवर्किंग लीडर्स घाटशिला के गांवों तक क्यों पहुंच रहे हैं? उनकी कंपनी कौन-सी है? पैसा किस तरह लगाया जाएगा?
मेदिनीपुर—सिर्फ संयोग या नेटवर्किंग का नया रास्ता?
अगर यह सिर्फ वैध कारोबार है तो उसके दस्तावेज सामने आने चाहिए। और अगर यह ऐसी योजना है जिसमें पहले लोगों से पैसा लिया जाता है, फिर नए सदस्य जोड़ने पर कमीशन दिया जाता है, तो सवाल और गंभीर हो जाता है। “आज थोड़ा लगाइए, कल ज्यादा कमाइए” का लालच सबसे बड़ा खतरा बन सकता है।
सत्ता बदली, सवाल वही
पश्चिम बंगाल में 2026 में सत्ता परिवर्तन हुआ और सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने। इससे पहले लंबे समय तक ममता बनर्जी के शासनकाल में सारधा चिटफंड और नारदा स्टिंग जैसे प्रकरणों ने राज्य की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर बहस खड़ी की थी। किसी वर्तमान गतिविधि को इन पुराने मामलों से जोड़कर अवैध घोषित नहीं किया जा सकता, लेकिन इतिहास एक चेतावनी जरूर देता है।
प्रशासन से सीधे सवाल
- पैसा कहां जमा होगा?
- किसके खाते में जाएगा?
- कंपनी कहां पंजीकृत है?
- उत्पाद क्या है?
- रिटर्न की गारंटी कौन दे रहा है?
- नए सदस्य जोड़ना कमाई की मुख्य शर्त क्यों है?
ग्रामीणों से जमीनी आवाज की अपील
किसी भी नेटवर्किंग या मनी-मार्केटिंग योजना में पैसा लगाने से पहले कंपनी का नाम, रजिस्ट्रेशन, वास्तविक उत्पाद, रिफंड व्यवस्था और कमाई के स्रोत की पूरी जानकारी जरूर लें। अगर इन सवालों के जवाब साफ नहीं हैं तो अपनी मेहनत की कमाई लगाने में जल्दबाजी न करें।
जमीनी आवाज की मांग है कि प्रशासन मेदिनीपुर से आने वाले कथित नेटवर्किंग लीडर्स की गतिविधियों की जांच करे और कंपनी व पैसों के मॉडल को सार्वजनिक करे।





