रात के तीसरे पहर में बदलती तस्वीर

घाटशिला की सड़कों पर दिन में सब कुछ सामान्य नजर आता है, लेकिन रात के तीसरे पहर के बाद तस्वीर बदलने का दावा किया जा रहा है। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रात करीब 3 बजे के बाद बालू लदे हाइवा और ट्रैक्टरों की आवाजाही तेज हो जाती है। आरोप है कि ओडिशा नंबर OD-11 समेत कई वाहनों को घाटशिला मुख्य सड़क पर तेज रफ्तार से दौड़ाया जा रहा है।

सवाल सीधा है—अगर बालू का परिवहन वैध है तो यह गतिविधि मुख्य रूप से रात के अंधेरे में ही क्यों दिखाई देती है?

गोपालपुर से मऊभंडार तक रोजाना 50-60 वाहन

सूत्रों के मुताबिक गोपालपुर से लेकर मऊभंडार तक सड़क मार्ग पर रोजाना बड़ी संख्या में बालू लदे वाहन गुजरते हैं। दावा है कि प्रतिदिन लगभग 50 से 60 वाहनों की आवाजाही होती है। यदि यह दावा सही है तो मामला एक-दो ट्रिप का नहीं, बल्कि लगातार चल रहे बड़े पैमाने के परिवहन नेटवर्क का हो सकता है।

OD-11 की गाड़ी किसकी? बालू कहां से आ रहा?

सबसे बड़ा सवाल ओडिशा के OD-11 रजिस्ट्रेशन वाली उन गाड़ियों को लेकर उठ रहा है। आखिर ये वाहन किसके हैं? बालू कहां से लाया जा रहा है? किस घाट से उठाव हो रहा है? किसके नाम पर चालान या परिवहन अनुमति है?

राजस्व किसका, फायदा किसका?

बालू प्राकृतिक संसाधन है और इसके वैध उठाव एवं परिवहन से सरकार को राजस्व प्राप्त होता है। यदि नियमों को दरकिनार कर इसका कारोबार होता है तो नुकसान केवल सरकारी खजाने का नहीं, जनता का होता है

प्रशासन की आंखों में धूल या निगरानी में बड़ी चूक?

  • चेकिंग कहां है?
  • परिवहन विभाग की निगरानी कहां है?
  • खनन विभाग की टीम कहां है?
  • पुलिस की रात्री गश्ती कहां है?
  • वाहनों के दस्तावेजों की जांच कौन कर रहा है?

अब विशेष जांच अभियान जरूरी

अब जरूरत है कि रात 3 बजे से सुबह तक घाटशिला मुख्य सड़क पर विशेष जांच अभियान चलाया जाए। OD-11 सहित सभी संदिग्ध वाहनों के ई-चालान, रॉयल्टी, परिवहन परमिट, लोडिंग प्वाइंट और गंतव्य की जांच हो। रात का अंधेरा बालू के कारोबार को नहीं, व्यवस्था की जिम्मेदारी को छिपा सकता है। सच सामने आना ही चाहिए।