घाटशिला। सरकारी कागजों में प्रक्रिया भले ही सिर्फ एक फॉर्म भरने और जमा करने की हो, लेकिन घाटशिला पंचायत में मंगलवार को यही प्रक्रिया आम ग्रामीणों के लिए किसी परीक्षा से कम नजर नहीं आई। 15 सितंबर की दोपहर करीब 2 बजे SIR के तहत जारी नोटिस और फॉर्म भरने व जमा करने के लिए पंचायत परिसर में ऐसी भीड़ उमड़ी कि लंबी कतार में बुजुर्गों समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण घंटों खड़े रहने को मजबूर हो गए।
पानी-पंखे-बैठने तक की व्यवस्था न होने का आरोप
तपती गर्मी में लोग अपने हाथों में कागजों की फाइलें लिए अपनी बारी का इंतजार करते रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत परिसर में पर्याप्त पेयजल, पंखे और बैठने की व्यवस्था नहीं थी। सबसे ज्यादा परेशानी उम्रदराज लोगों को हुई, जिन्हें घंटों खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। मौके पर घाटशिला की BDO यूनिका शर्मा भी पहुंचीं। इस दौरान लोगों में नाराजगी और आक्रोश की स्थिति भी देखने को मिली।
जिसके पास पुराने कागज ही नहीं, वह कहां से लाए?
घाटशिला और आसपास के इलाकों में ऐसे परिवार भी हैं, जिन्होंने बीमारी, आर्थिक संकट, आगजनी, विस्थापन या दूसरी विपदाओं में अपना घर-सामान और जरूरी कागजात तक गंवा दिए। किसी की पुरानी फाइलें नहीं बचीं, किसी के दस्तावेज नष्ट हो चुके हैं और किसी के पास उन्हें दोबारा बनवाने के लिए जरूरी पैसा तक नहीं है।
सिस्टम में सुविधा किसके लिए?
सरकार और चुनाव आयोग का उद्देश्य यदि मतदाता सूची को सही और पारदर्शी बनाना है तो यह बेहद जरूरी प्रक्रिया है। लेकिन पारदर्शिता के नाम पर आम आदमी को ऐसी व्यवस्था में धकेल देना, जहां उसे घंटों लाइन में खड़ा होना पड़े, व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल जरूर खड़ा करता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि दस्तावेजों की जांच आवश्यक है तो प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था, पर्याप्त काउंटर, पीने का पानी, पंखे, बैठने की सुविधा और बुजुर्गों के लिए अलग प्राथमिकता व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
घाटशिला पंचायत में मंगलवार की भीड़ ने फिलहाल यही सवाल प्रशासन के सामने खड़ा कर दिया है—“सिस्टम जनता के लिए है या जनता सिस्टम की परेशानियों के लिए?”





