मुसाबनी। बीमारी देखकर नहीं आती, लेकिन क्या मुसाबनी में बीमारी के साथ इलाज की सुविधा भी उपलब्ध है? अगर किसी मरीज की हालत अचानक गंभीर हो जाए तो क्या उसे तत्काल और पर्याप्त चिकित्सा सुविधा मिल पाएगी, या फिर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल का रास्ता पकड़ना पड़ेगा? मुसाबनी की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर यही सवाल अब आंदोलन का रूप लेने लगा है।

2 अक्टूबर को गांधी प्रतिमा के समक्ष धरना

घाटशिला अनुमंडल जन अधिकार मंच ने मुसाबनी में अतिरिक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने की मांग को लेकर बुधवार को बैठक की। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 2 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे मुसाबनी नंबर-1 स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया जाएगा। मंच का कहना है कि मुसाबनी क्षेत्र में बेहतर और त्वरित स्वास्थ्य सुविधा के लिए अतिरिक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की आवश्यकता है।

"आश्वासन बहुत मिले, ठोस पहल नहीं हुई"

झारखंड नवनिर्माण अभियान के अध्यक्ष सह रांची उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मदन सोरेन ने कहा कि मुसाबनी शहर में आकस्मिक स्वास्थ्य सेवा की नितांत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की ओर से बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद समस्या के समाधान की दिशा में अब तक ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने की स्थिति में उनकी जान पर संकट उत्पन्न हो सकता है।

अधिक संख्या में शामिल होने की अपील

वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता वीरेन घोष ने लोगों से एकजुट होकर अपनी मांग को मजबूत करने तथा 2 अक्टूबर के धरने में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। बैठक का संचालन मोहम्मद गुलाम ने किया। इस अवसर पर मदन सोरेन, वीरेन घोष, मुकेश कर्माकर, खुदीराम हांसदा, अफरोज अंसारी, मोहम्मद सनवार, नंदू मदीना, गौरव क्रांति सहित अन्य लोग उपस्थित थे।