घाटशिला। बाहर से देखिए तो घाटशिला अनुमंडल अस्पताल साफ-सुथरा दिखाई देता है। परिसर में सफाई दिखती है, व्यवस्था को संभालने की कोशिश भी नजर आती है। लेकिन सवाल यह है कि अगर अस्पताल इतना व्यवस्थित है तो फिर यहां आने वाले मरीजों को बार-बार दूसरे अस्पतालों में रेफर क्यों किया जाता है? इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने के लिए बुधवार को जमीनी आवाज की टीम घाटशिला अनुमंडल अस्पताल पहुंची।

गायनी और बच्चों का इलाज क्यों नहीं?

पड़ताल के दौरान सबसे बड़ा सवाल सामने आया महिला और बच्चों के इलाज को लेकर। बातचीत में अस्पताल से जुड़े लोगों की ओर से बताया गया कि गायनी विशेषज्ञ और पेडियाट्रिक चिकित्सक की उपलब्धता नहीं होने के कारण मरीजों को रेफर करना पड़ता है।


एमडी डॉक्टर अस्पताल में जरूरी या जेल में?

पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि अस्पताल में उपलब्ध एमडी चिकित्सक को घाटशिला जेल की ड्यूटी में लगाया गया है। बातचीत के दौरान लोगों का कहना था कि यदि विशेषज्ञ चिकित्सक अस्पताल में नियमित रूप से उपलब्ध रहें तो कई मरीजों को बाहर रेफर करने की आवश्यकता कम हो सकती है।

सर्जन के बाद नहीं आया कोई विकल्प

स्थानीय स्तर पर यह भी बताया गया कि वर्षों पहले अस्पताल में सर्जन डॉ. बक्शी की मौजूदगी के समय सर्जरी से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध थीं। उनके बाद अस्पताल में सर्जरी विशेषज्ञ की कमी महसूस की जाती रही।

तीन डेंटिस्ट घाघीडीह में, यहां की सेवा प्रभावित क्यों?

दंत चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी बातचीत में एक अलग सवाल सामने आया। बताया गया कि घाघीडीह में पहले से तीन डेंटिस्ट उपलब्ध हैं, जबकि घाटशिला अनुमंडल अस्पताल के डेंटिस्ट को भी वहां रखा गया है।

108 एंबुलेंस : व्यवस्था की गाड़ी कब चलेगी?

अस्पताल परिसर में एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर भी तस्वीर संतोषजनक नहीं दिखी। जमीनी पड़ताल के दौरान 108 एंबुलेंस की स्थिति खराब दिखाई दी और करीब सात एंबुलेंस के बेकार पड़े होने की बात सामने आई। पहले 108 एंबुलेंस व्यवस्था एक संस्था के माध्यम से संचालित होती थी, लेकिन बाद में संस्था ने अपना योगदान देना बंद कर दिया। सरकार की ओर से ममता वाहनों को भी 108 की तर्ज पर चलाने की बात कही गई और दो-तीन बैठकें भी हुईं, लेकिन असली सवाल यही है कि बैठकों के बाद जमीन पर व्यवस्था कब दिखाई देगी।