घाटशिला : असित भट्टाचार्य श्रेया कृष्ण सिन्हा की मौत की खबर ने घाटशिला को झकझोर कर रख दिया था। अब श्रेया का अंतिम संस्कार भी हो चुका है। मां के कलेजे से उसकी बेटी को अंतिम विदाई के लिए निकालना पड़ा, लेकिन इस हादसे का दर्द यहीं खत्म नहीं हुआ है। श्रेया के पिता सुब्रतो सिन्हा अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। हालत ऐसी कि वे अपनी बेटी को आखिरी बार देख तक नहीं सके। हादसे के बाद चालक गोवर्धन पातर की गिरफ्तारी हुई है और उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में कार्रवाई भी की गई है। कानून अपना काम करेगा और अदालत अपना फैसला देगी। लेकिन घाटशिला की जनता के सामने अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—क्या सिर्फ चालक की गिरफ्तारी से इस पूरे मामले की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है? आखिर गाड़ी का मालिक कौन है? जिस वाहन ने कथित तौर पर एक के बाद एक कई लोगों और वाहनों को टक्कर मारते हुए लगभग डेढ़ किलोमीटर तक तबाही मचाई, उस वाहन का मालिक कौन है? उस गाड़ी को किसने खरीदा था? गाड़ी किसके नाम पर पंजीकृत है? उसका फाइनेंसर कौन है? वाहन का बीमा किसके नाम पर है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या वाहन मालिक की भी कोई जिम्मेदारी तय होगी? घाटशिला की जनता यह सवाल इसलिए पूछ रही है क्योंकि हादसे में केवल जानें ही नहीं गईं, बल्कि कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। जिन परिवारों ने अपनी गाड़ी खोई या उसे भारी नुकसान पहुंचा, उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा? चालक जेल जाएगा, सजा भी हो सकती है—लेकिन पीड़ित परिवारों का क्या? कानून के तहत आरोपी को सजा मिल सकती है। पांच साल, दस साल या उससे अधिक की सजा—यह अदालत तय करेगी। लेकिन पीड़ित परिवारों के लिए सवाल सिर्फ सजा का नहीं है। श्रेया वापस नहीं आएगी। सुब्रतो सिन्हा की जिंदगी सामान्य होगी या नहीं, यह भी अभी कहना मुश्किल है। क्षतिग्रस्त गाड़ियों की मरम्मत या उनके मालिकों का आर्थिक नुकसान कौन उठाएगा? क्या केवल आपराधिक मुकदमा इन सवालों का जवाब दे देगा? प्रशासन से सीधा सवाल: मालिक की तस्वीर और पूरी जानकारी सामने क्यों नहीं? घाटशिला की जनता यह जानना चाहती है कि जिस वाहन से इतना बड़ा हादसा हुआ, उसके मालिक और वाहन के वित्तीय पक्ष की जांच कहां तक पहुंची? अगर वाहन मालिक की पहचान हो चुकी है तो प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी भूमिका क्या थी। अगर वाहन किसी फाइनेंस कंपनी के माध्यम से खरीदा गया था, तो वाहन के स्वामित्व, बीमा और अन्य दस्तावेजों की जांच हुई या नहीं? जनता को चालक की गिरफ्तारी की जानकारी मिल गई, लेकिन अब सवाल वाहन मालिक तक पहुंच चुका है। यह सिर्फ श्रेया की मौत का मामला नहीं—जवाबदेही का सवाल है आज श्रेया की मां की गोद सूनी है। पिता अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। कई परिवारों के वाहन क्षतिग्रस्त हैं। ऐसे में घाटशिला पूछ रहा है— मौत का जिम्मेदार सिर्फ वह व्यक्ति है जो गाड़ी चला रहा था, या उस व्यवस्था और वाहन से जुड़े दूसरे जिम्मेदार लोगों की भी जवाबदेही तय होगी? प्रशासन को चाहिए कि मामले की जांच को केवल चालक की गिरफ्तारी तक सीमित न रखे। वाहन के मालिक, बीमा, फाइनेंस, वाहन की वैधता और हादसे के बाद हुए आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी—हर पहलू की जांच सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जाए। क्योंकि घाटशिला की जनता का सवाल सीधा है— "चालक तो सामने आ गया… लेकिन जिस गाड़ी ने मौत का तांडव मचाया, उसका मालिक कहां है?" और जब तक इस सवाल का जवाब नहीं मिलता, श्रेया की अंतिम विदाई के बाद भी यह मामला खत्म नहीं माना जा सकता।