मऊभंडार। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) मऊभंडार को लेकर एक बार फिर विस्थापितों की आवाज मुखर होने की तैयारी में है। शंख नदी के किनारे 20 सितंबर को सेट मैदान में विस्थापितों और ग्रामीणों का बड़ा जमावड़ा होने की जानकारी सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक इस जुटान में केंद्राडीह, सूरदा, साउथ सूरदा सहित अन्य प्रभावित एवं विस्थापित क्षेत्रों के लोग भी शामिल हो सकते हैं।

रिकॉग्नाइज्ड यूनियन की संभावित एंट्री से गरमाएगा मामला

सबसे महत्वपूर्ण बात यह बताई जा रही है कि इस जमावड़े में एक रिकॉग्नाइज्ड यूनियन की भी संभावित एंट्री हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो वर्षों से चले आ रहे विस्थापन, रोजगार, मुआवजा, नामिनी और पुनर्वास से जुड़े सवालों को लेकर चर्चा को नया आयाम मिल सकता है।

क्या 34 साल पुराने सवालों का खुलेगा पिटारा?

सूत्रों का दावा है कि 20 सितंबर की बैठक में करीब 34 वर्षों से दबे माने जा रहे मुद्दों और पुराने घटनाक्रमों को सामने लाने की कोशिश होगी। चर्चा का केंद्र यह भी हो सकता है कि जिन परिवारों ने अपनी जमीन, आजीविका और भविष्य की कीमत पर परियोजनाओं के लिए रास्ता दिया, उनके हिस्से में आज क्या आया। विस्थापन के बाद रोजगार और पुनर्वास का वास्तविक लाभ किसे मिला और विस्थापित नामिनी तथा काम के दौरान मृत्यु के मामलों में प्रभावित परिवारों के साथ क्या हुआ—ये सवाल अब पूरे क्षेत्र के सवाल बनते जा रहे हैं।

प्रबंधन और यूनियन से जवाब मांगने की तैयारी

विस्थापितों की ओर से प्रबंधन और यूनियन से जुड़े पुराने फैसलों, समझौतों और उनके वास्तविक लाभ को लेकर सवाल उठाए जाने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार बैठक में यह भी चर्चा हो सकती है कि विस्थापितों के नाम पर वर्षों से चली आ रही व्यवस्था में वास्तविक लाभार्थी कौन रहे। हालांकि इन आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

शंख नदी से उठेगी आवाज

मऊभंडार क्षेत्र में HCL से जुड़े विस्थापन और रोजगार के मुद्दों पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अब देखने वाली बात होगी कि 20 सितंबर को सेट मैदान से उठने वाली आवाज सिर्फ विरोध तक सीमित रहती है या फिर विस्थापितों के अधिकार, रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास को लेकर किसी बड़े आंदोलन की नींव रखती है।