घाटशिला..... असित भट्टाचार्य
अमर कथा शिल्पी विभूतिभूषण बंध्योपाध्याय की साहित्यिक विरासत को याद करने और घाटशिला की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से एक बार फिर घाटशिला में उत्सव का माहौल बनने जा रहा है। गौरीकुंज उन्नयन समिति के तत्वावधान में 12 और 13 सितंबर को ‘विभूति उत्सव 2026’ का आयोजन किया जाएगा। उत्सव को लेकर शुक्रवार को जेसी हाई स्कूल स्थित आशा ऑडिटोरियम में प्रेस वार्ता आयोजित कर समिति ने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा साझा की। समिति के अध्यक्ष तापस चटर्जी ने बताया कि दो दिवसीय आयोजन में साहित्य के साथ झारखंड की लोक-संस्कृति, कला, संगीत और पारंपरिक खानपान की भी झलक देखने को मिलेगी। साहित्य से लोक-संस्कृति तक—दो दिनों तक सजेगा घाटशिला समिति के अनुसार 12 सितंबर को शाम 4 बजे से उत्सव की शुरुआत होगी।
वहीं 13 सितंबर को दोपहर 12 बजे से रात 9 बजे तक विभिन्न सांस्कृतिक और मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उत्सव का प्रमुख आकर्षण झारखंड के पारंपरिक लोकनृत्य होंगे। पाता नृत्य, छऊ नृत्य, काठी नृत्य, करम नृत्य और घटि नृत्य की प्रस्तुतियां दर्शकों को झारखंड की लोक परंपरा और सांस्कृतिक जड़ों से रूबरू कराएंगी। इसके अलावा कोलकाता से आए विशेष कलाकारों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे। मंच पर संस्कृति, स्टॉल में झारखंड का स्वाद ‘विभूति उत्सव’ केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहेगा।
आयोजन स्थल पर झारखंड के पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए जाएंगे। यहां मांस पीठा, गुड़ पीठा, गड़गड़ा पीठा, शालपाता चिकन, पोड़ा मूढ़ी, घुघनी और धुस्का जैसे पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लोगों को मिलेगा। इसके साथ ही स्थानीय हस्तशिल्प की प्रदर्शनी और बिक्री की भी व्यवस्था रहेगी, जिससे स्थानीय कला और कारीगरों को भी अपनी प्रतिभा और उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। घाटशिला की पहचान से जुड़ा है विभूतिभूषण का नाम विभूतिभूषण बंध्योपाध्याय की साहित्यिक स्मृतियों से जुड़ी घाटशिला की धरती पर आयोजित यह उत्सव केवल जन्मदिन समारोह नहीं, बल्कि साहित्य और संस्कृति के उस रिश्ते को जीवंत करने का प्रयास है, जिसने घाटशिला को लंबे समय से साहित्य प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बनाए रखा है।
कल ही विभूतिभूषण बंध्योपाध्याय की साहित्यिक विरासत को लेकर खबर सामने आई थी और अब प्रेस वार्ता के बाद यह स्पष्ट है कि 12 और 13 सितंबर को घाटशिला साहित्य, लोककला और झारखंडी संस्कृति के रंग में रंगने वाला है। प्रेस वार्ता में समिति की शिल्पी सरकार, सोमा सरकार और प्रदीप भद्र समेत अन्य सदस्य उपस्थित थे। समिति के पदाधिकारियों ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर ‘विभूति उत्सव 2026’ को सफल बनाने की अपील की है। प्रवेश पत्र आयोजन स्थल पर ही उपलब्ध रहेंगे।





