घाटशिला। असित भट्टाचार्य
मुख्यमंत्री सारथी योजना को लेकर जमीनी आवाज लगातार सवाल उठा रहा है। घाटशिला के गोपालपुर में संचालित संस्था को लेकर सामने आए तथ्यों ने ऐसे सवाल खड़े किए हैं, जिनका जवाब अब केवल बयान से नहीं, रिकॉर्ड से देना होगा।
पहली खबर प्रकाशित होने के बाद संस्था के डायरेक्टर सुशील दुबे ने 28-29 अगस्त तक घाटशिला आने की बात कही थी, लेकिन यह दावा हवा में ही रह गया। इसके बाद 1 सितंबर को संस्था के कामकाज की देखरेख करने वाले कृष्णा सिंह घाटशिला पहुंचे और 4 सितंबर को वापस रांची चले गए।
सवालों का जवाब अब भी अधूरा
जमीनी आवाज के संपादक से हुई बातचीत में दिनेश वाल्मीकि, अमित हाजरा, विवेक महापात्र और नीरज कुमार भारती भी मौजूद थे। कृष्णा सिंह की ओर से सभी बिंदुओं का स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा सका, हालांकि उन्होंने जाने से पहले सभी मामलों को सुलझाने का भरोसा दिया था।
चैलेंज स्वीकार—बहस नहीं, दस्तावेज
जमीनी आवाज ने साफ किया है कि जवाब बहस से नहीं, दस्तावेज और रिकॉर्ड से चाहिए—कितने प्रशिक्षणार्थी हैं, कितनों ने प्रशिक्षण पूरा किया, किसे यात्रा भत्ता व रोजगार मिला और किसके खाते में कितनी राशि गई।
एसडीओ ने मामले को गंभीरता से लेने की बात कही
घाटशिला के अनुमंडल पदाधिकारी को पूरे मामले की जानकारी दी गई है। एसडीओ ने एसएआर की व्यवस्था और मामले को गंभीरता से देखने की बात कही है। जमीनी आवाज का कहना है कि जांच कागज पर नहीं, जमीन पर होनी चाहिए—प्रशिक्षण केंद्र, रजिस्टर, उपस्थिति, बैंक भुगतान और डीबीटी की स्थिति की जांच हो।





