घाटशिला। असित भट्टाचार्य

सड़क पर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे कुणाल ने आखिरकार शुक्रवार की सुबह करीब 10:30 बजे दम तोड़ दिया। चिकित्सकीय रिपोर्ट के अनुसार उसकी मृत्यु की पुष्टि की गई। 15 वर्ष की जिंदगी जीने वाला यह बच्चा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन अपने पीछे ऐसा सवाल छोड़ गया है जिसका जवाब सिर्फ कुणाल के परिवार को नहीं, बल्कि पूरे समाज और प्रशासन को देना होगा।

कुणाल के मां-बाप का दुख शब्दों में लिखना शायद संभव नहीं। जिस बच्चे को उन्होंने कभी लावारिस हालत में पाया था, उसे अपना बनाया, परिवार का हिस्सा बनाया, संस्कार दिए, शिक्षा दी और अपनी सामर्थ्य के अनुसार उसकी परवरिश में कोई कमी नहीं छोड़ी—आज वही कुणाल उनके सामने नहीं है।

श्रेया कृष्णा सिंह की मौत के बाद कुणाल की मौत ने घाटशिला की संवेदनाओं को फिर झकझोर दिया है। शहर में डर, गुस्सा, दुख और बेचैनी है।

समाजसेवियों का सवाल—कार्रवाई में देरी क्यों?

समाजसेवी और शिक्षक विजय कुमार पांडे ने कहा कि अब तो रास्ते पर निकलने से भी डर लगता है। निर्दोष लोगों की जान जा रही है और जिन पर आरोप लग रहे हैं, उनके इलाज और सुरक्षा को लेकर व्यवस्था दिखाई देती है।

लोगों का सवाल सीधा है—अगर मामला सड़क दुर्घटना और कथित हिट एंड रन का है तो कानून अपना रास्ता कब अपनाएगा? कार्रवाई में देरी क्यों?

मोहम्मद जावेद और आदिवासी अधिकारी मारपीट मामले पर भी सवाल

चर्चा के दौरान मोहम्मद जावेद से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठे। एक आदिवासी सरकारी अधिकारी के साथ कथित मारपीट के मामले में अब तक कार्रवाई न होने पर लोगों ने प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए।

कुणाल चला गया। श्रेया चली गई। अब सवाल सिर्फ दो मौतों का नहीं है—अगला कुणाल कौन होगा? अगली श्रेया कौन होगी? घाटशिला की जनता जवाब चाहती है।