घाटशिला। असित भट्टाचार्य की रिपोर्ट...
इंडियन कॉपर कॉम्प्लेक्स (ICC) से जुड़े साकेत कुमार सिन्हा प्रकरण अब केवल नौकरी, स्थानांतरण और शैक्षणिक योग्यता का मामला नहीं रह गया है। जमीनी आवाज के पास उपलब्ध ईमेल और इससे संबंधित दस्तावेजों में ऐसे आरोप सामने आए हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होने पर कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं।
मामले का एक पहलू यह है कि साकेत कुमार सिन्हा के संबंध में उपलब्ध शिकायत/जांच सामग्री में उनके कार्यकाल, शैक्षणिक स्थिति और ICC में उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए हैं। जांच रिपोर्ट में यह सवाल भी सामने आता है कि वर्ष 1996 में मजदूर प्रशिक्षु के रूप में कार्यभार ग्रहण करने के बाद यदि वे घाटशिला कॉलेज में नियमित छात्र के रूप में बीएससी रसायन विज्ञान (ऑनर्स) की पढ़ाई कर रहे थे, तो उनकी नियमित पढ़ाई और नौकरी की जिम्मेदारियां किस प्रकार साथ-साथ चल रही थीं। कॉलेज की उपस्थिति, परीक्षा रिकॉर्ड, ICC की attendance और ड्यूटी रिकॉर्ड इस सवाल का वस्तुनिष्ठ उत्तर दे सकते हैं।
लेकिन ईमेल में उठाया गया दूसरा पहलू इससे कहीं अधिक गंभीर और संवेदनशील है।
एक घर के टूटने की कहानी भी ईमेल में
उपलब्ध ईमेल में साकेत कुमार सिन्हा से जुड़े एक व्यक्तिगत संबंध और उसके कथित परिणामों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में आरोप है कि एक प्रेम-संबंध के कारण दूसरे लोगों के जीवन और परिवार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा तथा एक परिवार/घर के टूटने की स्थिति बनी। इसमें संबंधित लोगों के साथ कथित अन्याय और अत्याचार की बातें भी कही गई हैं।
जमीनी आवाज स्पष्ट करना चाहता है कि इन व्यक्तिगत आरोपों को हम अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं। ये ईमेल/शिकायत में लगाए गए आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच का विषय है।
लेकिन सवाल यह है कि जब शिकायत में किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत आचरण से जुड़े इतने गंभीर आरोप लगाए गए हों और साथ ही सरकारी उपक्रम में उसके कार्य, स्थानांतरण तथा प्रशासनिक संरक्षण को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हों, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं की गई?
CCTV बताएगा कौन सच बोल रहा है?
इस पूरे मामले में CCTV का उल्लेख महज एक आरोप नहीं, बल्कि जांच का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। यदि संबंधित अवधि की CCTV फुटेज सुरक्षित है, तो उसे कॉलेज की उपस्थिति और ICC के attendance/duty records से मिलाया जा सकता है।
यदि रिकॉर्ड बताते हैं कि संबंधित व्यक्ति एक ही समय में कॉलेज में नियमित उपस्थिति दर्ज करा रहा था और दूसरी ओर ICC में ड्यूटी कर रहा था, तो यह गंभीर प्रशासनिक प्रश्न होगा। वहीं यदि दोनों रिकॉर्ड में कोई विरोधाभास नहीं है तो आरोपों की वास्तविकता भी स्पष्ट हो जाएगी।
यानी CCTV, attendance register, कॉलेज के admission एवं examination records, नियुक्ति फाइल, वेतन रिकॉर्ड और ICC की ड्यूटी शीट—ये सभी दस्तावेज इस मामले में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
तबादला रोकने की सिफारिश ने बढ़ाए सवाल
तीसरे ईमेल में यह आरोप सामने आया है कि लोहरा पहल के माध्यम से ICC प्रबंधन और यूनियन पदाधिकारियों के समर्थन से साकेत सिन्हा का स्थानांतरण निरस्त कराने के लिए श्री सेठी और श्री संजीव सिन्हा (DoP) के कथित अनौपचारिक आदेश के आधार पर कॉरपोरेट प्रबंधन से सिफारिश की गई।
ईमेल में यह भी उल्लेख है कि संबंधित मामले में मिथिलेश सिन्हा का भंडाफोड़ किए जाने के लिए दूसरी चरण की कार्रवाई शेष थी।
यहां सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ इतने गंभीर आरोपों की शिकायत और दस्तावेज मौजूद थे, तो उसके स्थानांतरण को रोकने की सिफारिश क्यों की गई?
- क्या यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी?
- क्या इसके पीछे कोई आधिकारिक आदेश था?
- क्या यूनियन ने प्रशासनिक निर्णय को प्रभावित किया?
- और यदि सिफारिश हुई, तो फाइल में उसका आधार क्या दर्ज है?
जमीनी आवाज की जांच की मांग
जमीनी आवाज किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं करता। लेकिन जिन दस्तावेजों और ईमेल के आधार पर सवाल उठे हैं, उनकी जांच होना आवश्यक है।
जांच में कम से कम इन बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए—
- साकेत कुमार सिन्हा की वर्ष 1996 से अब तक की नियुक्ति एवं सेवा फाइल की जांच
- घाटशिला कॉलेज में नियमित छात्र के रूप में उनके admission, attendance और examination records की जांच
- उसी अवधि के ICC attendance, duty chart और वेतन/भुगतान रिकॉर्ड का मिलान
- उपलब्ध CCTV फुटेज को सुरक्षित कर उसकी स्वतंत्र जांच
- स्थानांतरण एवं उसे निरस्त कराने से संबंधित पूरी फाइल और correspondence की जांच
- ईमेल में जिन अधिकारियों एवं यूनियन पदाधिकारियों की भूमिका का उल्लेख है, उनसे आधिकारिक स्पष्टीकरण
- परिवार टूटने और व्यक्तिगत संबंधों से जुड़े आरोपों की उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्र जांच
- यदि किसी व्यक्ति के साथ कथित अत्याचार या अन्याय का आरोप लगाया गया है तो संबंधित शिकायत/दस्तावेजों का सत्यापन
- जांच में यदि कोई अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित सेवा नियमों के तहत जिम्मेदारी तय करना
सवाल सिर्फ साकेत सिन्हा का नहीं, व्यवस्था का है
एक सरकारी उपक्रम में काम करने वाले कर्मचारी को यदि नियमों के विरुद्ध कोई लाभ मिला है, तो सवाल केवल उस कर्मचारी से नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से भी पूछा जाना चाहिए जिसने वह लाभ दिया।
और यदि आरोप गलत हैं, तो निष्पक्ष जांच ही संबंधित व्यक्ति को आरोपों से मुक्त करने का सबसे मजबूत माध्यम है।
इसलिए जमीनी आवाज का सवाल सीधा है—जब CCTV मौजूद होने की बात कही जा रही है, कॉलेज के रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकते हैं, ICC की सेवा और attendance फाइलें मौजूद हैं और अधिकारियों को ईमेल के माध्यम से शिकायतें भेजी गई हैं, तो जांच आखिर क्यों नहीं? क्या सरकारी उपक्रम में नियम व्यक्ति देखकर बदलते हैं? और क्या एक टूटे हुए परिवार से लेकर सरकारी नौकरी और प्रशासनिक सिफारिश तक उठे सभी सवालों का जवाब एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और दस्तावेज-आधारित जांच से नहीं मिलना चाहिए?
जमीनी आवाज की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं, ताकि सच सामने आए—चाहे वह आरोप लगाने वालों के पक्ष में हो या आरोपों से घिरे व्यक्ति के।





