सरायकेला। विजय कुमार गोप की रिपोर्ट
चांडिल डैम परियोजना के विस्थापितों का 44 वर्षों से चला आ रहा संघर्ष अब एक नए चरण में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। पुनर्वास, मुआवजा, भूमि अधिकार, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं जैसे लंबित सवालों को लेकर चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच ने सामूहिक नेतृत्व के साथ गांव-गांव पहुंचने का निर्णय लिया है।
शनिवार को चांडिल स्थित द गोल्डन रिसोर्ट में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंच ने स्पष्ट किया कि अब विस्थापितों की समस्याओं को "एक परियोजना–एक मंच–एक आवाज–सामूहिक नेतृत्व" के तहत मजबूती से उठाया जाएगा।
7 से 12 सितंबर तक गांव-गांव संवाद यात्रा
मंच के सदस्य राकेश रंजन महतो ने बताया कि 7 से 12 सितंबर तक 116 गांवों एवं 13 पुनर्वास स्थलों में संवाद यात्रा निकाली जाएगी, जिसकी शुरुआत ईचागढ़ प्रखंड की सोडो पंचायत के जारगोडीह गांव से होगी। प्रत्येक गांव की समस्याओं का दस्तावेज तैयार किया जाएगा।
90 प्रतिशत जमीन डूब क्षेत्र में, फिर भी अधूरे अधिकार
मंच के सदस्य मनोहर महतो ने कहा कि हाड़ात, पहाड़पुर, चिरकुई, सोनागाढ़ा और रुगड़ी समेत कई गांवों की 90 प्रतिशत से अधिक जमीन जल भंडारण क्षेत्र में चली गई, इसके बावजूद कई परिवारों को पूर्ण विस्थापित का दर्जा नहीं मिला है।
नारायण गोप ने आरोप लगाया कि विस्थापित आयोग के प्रावधानों को पूरी तरह लागू नहीं किया जा रहा है। अंबिका यादव ने चांडिल डैम के पानी से कंपनियों को मिलने वाले लाभ का मुद्दा उठाया, जबकि मकसूद आलम ने रोजगार के अवसरों के अभाव पर चिंता जताई।
दस्तावेज बनेगा आंदोलन का आधार
मंच ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार लंबित सवालों पर गंभीर पहल नहीं करती है, तो आने वाले दिनों में सामूहिक नेतृत्व के तहत व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंबिका यादव, नारायण गोप, श्यामल मार्डी, राकेश महतो, अकलू धीवर सहित मंच के कई सदस्य उपस्थित थे।





