सरायकेला.... जमीनी आवाज की खास रिपोर्ट

दक्षिण पूर्वी रेलवे के आद्रा मंडल अंतर्गत चांडिल जंक्शन स्टेशन के पार्किंग परिसर में मैजिक वाहनों से निर्धारित शुल्क से कथित तौर पर तीन गुना अधिक राशि वसूले जाने का मामला सामने आया है। पार्किंग ठेकेदार M/S ADIBA ENTERPRISE पर वाहन चालकों ने मनमानी वसूली का आरोप लगाते हुए रेलवे प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और जांच की मांग की है।

मैजिक वाहन चालकों का आरोप है कि पार्किंग के अधिकृत चालान में चार पहिया वाहनों के लिए छह घंटे तक का शुल्क ₹20 निर्धारित किया गया है। इसके बावजूद चांडिल स्टेशन पार्किंग में मैजिक वाहनों से कथित रूप से ₹60 प्रति वाहन वसूले जा रहे हैं। चालकों का कहना है कि निर्धारित दर और वसूली जा रही राशि में तीन गुना का अंतर है, जिससे रोजाना स्टेशन आने-जाने वाले वाहन चालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

एक महीने से चल रही कथित मनमानी

चालकों के अनुसार यह स्थिति पिछले करीब एक महीने से बनी हुई है। उनका कहना है कि वे लगातार निर्धारित शुल्क से अधिक राशि दिए जाने को लेकर आपत्ति जता रहे हैं, लेकिन कथित तौर पर कोई समाधान नहीं निकला।

एक वाहन चालक ने जब अधिक राशि वसूले जाने को लेकर पार्किंग कर्मियों से सवाल किया तो कथित तौर पर उसे जवाब दिया गया कि ₹60 ही शुल्क है और सभी स्टेशनों पर इतनी ही राशि ली जाती है। चालकों का सवाल है कि यदि अधिकृत दर वास्तव में ₹20 है, तो फिर ₹60 किस आधार पर वसूला जा रहा है और अतिरिक्त राशि की रसीद किस प्रावधान के तहत दी जा रही है?

चालकों में बढ़ता आक्रोश

वाहन चालकों का कहना है कि वे रेलवे के नियमों के अनुसार पार्किंग शुल्क देने के लिए तैयार हैं, लेकिन निर्धारित दर से तीन गुना अधिक राशि की वसूली किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। उनका आरोप है कि रोजाना कमाई करने वाले छोटे वाहन चालकों से इस प्रकार अतिरिक्त राशि वसूलने से उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है।

चालकों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि पार्किंग के ठेके, अधिकृत शुल्क और ठेकेदार द्वारा वसूली जा रही राशि की तत्काल जांच कराई जाए। साथ ही पार्किंग परिसर में निर्धारित शुल्क की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने और निर्धारित दर से अधिक राशि की वसूली पर रोक लगाने की मांग की गई है।

कैमरे के सामने सवाल पर भागा कर्मी

मामले की पड़ताल के दौरान स्थानीय पत्रकार द्वारा पार्किंग ठेकेदार के कर्मी से निर्धारित शुल्क और ₹60 वसूले जाने को लेकर सवाल किया गया। आरोपों पर जवाब देने के बजाय कर्मी कैमरा देखते ही वहां से भाग गया। इससे पूरे मामले को लेकर सवाल और गहरा गया है।

हालांकि, इस संबंध में ठेकेदार या उसके अधिकृत प्रतिनिधि का पक्ष सामने नहीं आया है। रेलवे प्रशासन की ओर से भी इस कथित अधिक वसूली को लेकर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

रेलवे प्रशासन से कार्रवाई की मांग

मैजिक वाहन चालकों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई और मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। चालकों ने रेलवे के संबंधित अधिकारियों से पार्किंग स्थल की जांच, शुल्क निर्धारण के दस्तावेजों की जांच तथा पिछले एक महीने में वसूली गई राशि का सत्यापन कराने की मांग की है।

अब सवाल यह है कि जब अधिकृत शुल्क ₹20 है, तो मैजिक वाहनों से ₹60 की वसूली किस नियम और किस आदेश के आधार पर की जा रही है? रेलवे प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पार्किंग ठेकेदार द्वारा वास्तव में निर्धारित दर से अधिक राशि वसूली जा रही है या इसके पीछे कोई अन्य अधिकृत प्रावधान है।