देवेन्द्रनाथ महतो बोले—अब यह किसी एक व्यक्ति या इलाके की लड़ाई नहीं, पूरे झारखंड के युवाओं का आंदोलन; सरकार नहीं चेती तो और तेज होगा संघर्ष

देवघर। जमीनी आवाज के संपादक असित भट्टाचार्य की रिपोर्ट

क्या झारखंड की भर्ती व्यवस्था को लेकर युवाओं के भीतर जमा आक्रोश अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है? क्या सरकार युवाओं की बढ़ती आवाज को समय रहते सुनने के लिए तैयार है, या फिर बेरोजगारों और प्रतियोगी छात्रों का यह उबाल आने वाले दिनों में और बड़े संघर्ष का रूप लेगा?

देवघर में रविवार को जो तस्वीर सामने आई, उसने इन सवालों को और गंभीर बना दिया। JPSC-JSSC भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा के आठवें दिन भारी बारिश के बावजूद छात्र-युवाओं का जोश कम नहीं हुआ। बारिश की बूंदों के बीच सड़कों पर उमड़ा युवाओं का हुजूम मानो साफ संदेश दे रहा था कि अब भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग केवल ज्ञापन, धरना या भाषणों तक सीमित रहने वाली नहीं है।

आंदोलनकारी छात्र नेता देवेन्द्रनाथ महतो ने साफ शब्दों में कहा कि भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा अब पूरे झारखंड का जनआंदोलन बन चुकी है। यह अब किसी व्यक्ति, संगठन, जाति, धर्म या क्षेत्र की लड़ाई नहीं, बल्कि झारखंड के उन लाखों छात्र-युवाओं की साझा आवाज बनती जा रही है, जो पारदर्शी और बेहतर भर्ती व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

देवघर में यात्रा की शुरुआत नगर पुस्तकालय से हुई। इसके बाद यात्रा टावर चौक होते हुए डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक तक पहुंची। मधुपुर, इदगाह मोड़ और नारायणपुर में भी यात्रा का छात्र-युवाओं और आम लोगों ने जोरदार स्वागत किया।

लेकिन इस यात्रा की सबसे बड़ी तस्वीर भारी बारिश के बीच भी छात्रों और युवाओं की मौजूदगी रही। मौसम की मार भी उनके कदमों को नहीं रोक सकी। युवाओं के चेहरे पर संघर्ष का जुनून और व्यवस्था बदलने का संकल्प साफ दिखाई दिया।

देवेन्द्रनाथ महतो ने कहा कि देवघर के साथ भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा का संथाल परगना प्रमंडल का चरण संपन्न हो गया है। उन्होंने कहा कि संथाल परगना के छात्र-युवाओं और आम लोगों ने जाति, धर्म और क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर इस आंदोलन को अपना आंदोलन माना है।

उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान मिला समर्थन केवल फूल-मालाओं और स्वागत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प है।

संथाल परगना की क्रांतिकारी धरती का जिक्र करते हुए महतो ने कहा कि यात्रा के दौरान सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव और भोगनाडीह जैसे ऐतिहासिक संघर्ष स्थलों तक पहुंचने का अवसर मिला। इन स्थानों से आंदोलन को नई ऊर्जा और प्रेरणा मिली है। वहीं बाबा नगरी देवघर में महादेव के दर्शन को उन्होंने संघर्ष के लिए आंतरिक शक्ति और आशीर्वाद की अनुभूति बताया।

महतो ने संथाल परगना के छात्र-युवाओं, सामाजिक संगठनों और आम जनता के प्रति आभार जताते हुए कहा कि व्यापक समर्थन ने यह साबित कर दिया है कि भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा अब झारखंड के युवाओं की सामूहिक आवाज बन चुकी है।

यात्रा का अगला चरण अब धनबाद और बोकारो होते हुए कोल्हान प्रमंडल पहुंचेगा। इसके बाद आंदोलन की यह यात्रा पलामू प्रमंडल में भी जाएगी।

सरकार को स्पष्ट संदेश देते हुए देवेन्द्रनाथ महतो ने कहा कि युवाओं की मांगों पर अब गंभीर और ठोस कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि भर्ती व्यवस्था में सुधार और युवाओं के हित में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और व्यापक और तेज किया जाएगा।

अब सरकार के सामने बड़ा सवाल

झारखंड के अलग-अलग प्रमंडलों में पहुंच रही भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा को जिस तरह छात्र-युवाओं और आम लोगों का समर्थन मिल रहा है, उसने सरकार के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या सरकार युवाओं की भर्ती व्यवस्था सुधार की मांगों पर समय रहते ठोस निर्णय लेगी?

या फिर बेरोजगारी, भर्ती प्रक्रियाओं और व्यवस्था में सुधार को लेकर युवाओं का बढ़ता असंतोष आने वाले दिनों में राज्यव्यापी संघर्ष का और बड़ा रूप लेगा?

देवघर की बारिश में उमड़ा युवाओं का हुजूम इतना तो जरूर कह रहा है—झारखंड का युवा अब केवल इंतजार करने के मूड में नहीं है। सवाल उठ चुके हैं, आवाज सड़क पर आ चुकी है और अब नजरें सरकार के जवाब पर टिकी हैं।

यात्रा को सफल बनाने में मुकेश, प्रदीप, प्रीति, खुशबू, नेहा, दीपिका, राजेश, सुनील, प्रेम, उदय और अमित सहित अन्य लोगों ने अहम भूमिका निभाई।