प्रखंड मुख्यालय में जुटे दिसोम ग्राम प्रधान, जमीन-मकान के MMD R भुगतान के नाम पर रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप; 15 पंचायतों के सरदारों की बैठक में बनेगी आगे की रणनीति

धालभूमगढ़। झारखंड मुक्ति मोर्चा के स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों के बीच जमीन के बदले मिलने वाले MMD R भुगतान को लेकर कथित रिश्वतखोरी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। धालभूमगढ़ प्रखंड क्षेत्र में जमीन और मकान के बदले मिलने वाली राशि के भुगतान में कथित रूप से रिश्वत मांगने के आरोपों से ग्रामीणों में आक्रोश है।

इसी मुद्दे को लेकर रविवार को प्रखंड मुख्यालय में दिसोम ग्राम प्रधान और विभिन्न पंचायतों के सरदार एकत्रित हुए। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जमीन और मकान के बदले मिलने वाली राशि के भुगतान में अनावश्यक अड़चनें खड़ी की जा रही हैं और लाभुकों से रिश्वत की मांग की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

बैठक में मौजूद सरदारों ने कहा कि यदि जमीन देने वाले ग्रामीणों को उनका वैधानिक और उचित मुआवजा पाने के लिए भी कथित रूप से रिश्वत देनी पड़े, तो यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

7 सितंबर को फिर जुटेंगे 15 पंचायतों के सरदार

मामले को लेकर 7 सितंबर को धालभूमगढ़ प्रखंड क्षेत्र की सभी 15 पंचायतों के सरदारों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में कथित रिश्वतखोरी के आरोपों, प्रभावित लोगों की शिकायतों और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

सरदारों का कहना है कि बैठक में सामूहिक निर्णय लेकर प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रखी जाएगी। यदि ग्रामीणों की शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की रूपरेखा भी तय की जा सकती है।

बड़ा सवाल—अपनी जमीन देने वाले को हक की राशि के लिए क्यों करना पड़ रहा है संघर्ष?

धालभूमगढ़ में अब यह मामला केवल भुगतान में देरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जमीन के बदले मिलने वाली राशि में कथित रिश्वतखोरी के आरोपों ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और सरदारों का सवाल है कि आखिर अपनी जमीन और मकान देने वाले लोगों को उनके हक की राशि पाने के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है?

अब सबकी निगाहें 7 सितंबर की बैठक पर टिकी हैं, जहां 15 पंचायतों के सरदार एक मंच पर जुटकर इस मुद्दे पर बड़ा निर्णय ले सकते हैं।

क्या धालभूमगढ़ में जमीन के बदले मिलने वाले हक की राशि पर कथित रिश्वतखोरी का यह आरोप प्रशासनिक जांच तक पहुंचेगा, या फिर ग्रामीणों को अपने अधिकार के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा? यही सवाल अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।