जमशेदपुर ---+असित भट्टाचार्य जमशेदपुर के प्रसिद्ध आर्थोपेडिक चिकित्सक डॉ. अमित मुखर्जी के निधन की खबर से शहर में शोक की लहर है। लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से संघर्ष कर रहे डॉ. मुखर्जी ने आखिरकार दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन को चिकित्सा जगत के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र के लिए भी अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। डॉ. अमित मुखर्जी केवल एक कुशल चिकित्सक के रूप में ही नहीं, बल्कि अपने सरल, सहज, संवेदनशील और मिलनसार व्यक्तित्व के लिए भी लोगों के बीच विशेष पहचान रखते थे। मरीजों के प्रति संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी सक्रियता ने उन्हें आम लोगों से जोड़कर रखा। उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कृष्णा हांसदा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के साथ उनके परिवार का वर्षों पुराना आत्मीय संबंध रहा है। उन्होंने कहा कि एक कुशल चिकित्सक के साथ-साथ डॉ. मुखर्जी सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। उनका सेवाभाव और मानवीय संवेदनाएं लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेंगी। बीमारी से लड़ते रहे, लेकिन नहीं छोड़ा जीवन के प्रति जज्बा लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद डॉ. अमित मुखर्जी का व्यक्तित्व लोगों के लिए प्रेरणा बना रहा। बीमारी के कठिन दौर में उनका निधन उनके परिवार, शुभचिंतकों, परिचितों और पूरे सामाजिक परिवेश के लिए बेहद पीड़ादायक है। डॉ. मुखर्जी का जाना सिर्फ एक चिकित्सक का चले जाना नहीं है, बल्कि एक ऐसे संवेदनशील इंसान का जाना है, जिसने चिकित्सा सेवा को मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा। उनके निधन पर परिजनों, मित्रों, शुभचिंतकों और सामाजिक संगठनों ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की है।