RTI में मांगे गए AEBAS Raw Server Log से लेकर प्लेसमेंट, EPF/ESIC और सरकारी भुगतान के रिकॉर्ड—आरोपों की सच्चाई दस्तावेजों से सामने आ सकती है
सुशील दुबे के 'मंत्रियों तक पहुंच' के दावे के बीच बेरोजगार युवाओं का सवाल—अगर सब कुछ पारदर्शी है तो स्वतंत्र जांच से परहेज क्यों?
घाटशिला। असित भट्टाचार्य की रिपोर्ट
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को टैग करते हुए मुख्यमंत्री सारथी योजना, घाटशिला केंद्र और उससे जुड़े गंभीर सवालों की जांच की मांग अब सोशल मीडिया के जरिए भी सामने आ गई है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मामले में आरोपों की जांच के लिए इतने महत्वपूर्ण डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, तो इसकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच का रास्ता अब तक कितना आगे बढ़ा है?
सोशल मीडिया पर विक्रम सिंह चौहान के नाम से किए गए पोस्ट में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सीधे संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सारथी योजना की जांच की मांग की गई है। पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि संबंधित संस्था भाजपा नेता से जुड़ी है और सरकार JMM गठबंधन की है। पोस्ट में यहां तक कहा गया है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो जनता यह समझने को मजबूर होगी कि भाजपा हो या JMM, दोनों ही झारखंड को लूटने में लगे हैं।
जमीनी आवाज़ इस राजनीतिक आरोप को सत्य मानकर प्रस्तुत नहीं कर रहा है। लेकिन यह जरूर पूछ रहा है कि मुख्यमंत्री सारथी योजना से जुड़े जिन सवालों के जवाब सरकारी रिकॉर्ड से आसानी से मिल सकते हैं, उन रिकॉर्डों की स्वतंत्र जांच सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं दिखाई देती?
RTI आवेदन ने खोल दिया जांच का रास्ता
घाटशिला निवासी कृष्ण सिंह द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(1) के तहत दिए गए आवेदन में मुख्यमंत्री सारथी योजना के घाटशिला केंद्र से संबंधित विस्तृत सूचनाएं मांगी गई हैं। आवेदन लोक सूचना अधिकारी, झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी (JSDMS), श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग तथा जिला कौशल कार्यालय, पूर्वी सिंहभूम को संबोधित है।
RTI में विशेष रूप से मुख्यमंत्री सारथी योजना के घाटशिला केंद्र की संचालक संस्था M/s Nirman Services Pvt. Ltd. के वित्तीय दावों, मूल्यांकन-निगरानी दल, फर्जीवाड़े की जांच तथा अभ्यर्थी दिनेश कुमार वाल्मीकि के अभिलेखों से संबंधित प्रमाणित सूचना मांगी गई है।
यानी मामला केवल मौखिक आरोपों तक सीमित नहीं है। आवेदन में ऐसे रिकॉर्ड मांगे गए हैं, जिनसे यह पता लगाया जा सकता है कि प्रशिक्षण वास्तव में हुआ या नहीं और सरकारी राशि किस आधार पर जारी की गई।
AEBAS Raw Server Log बताएगा कौन आया, कौन नहीं
RTI में अभ्यर्थियों के नामांकन एवं उपस्थिति ऑडिट के तहत मूल प्रवेश फॉर्म, बैच कोड, ट्रेड, प्रशिक्षण अवधि तथा पूरे सत्र की आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति का AEBAS Raw Server Log और भौतिक उपस्थिति रजिस्टर की प्रमाणित प्रति मांगी गई है।
यदि इन रिकॉर्डों की स्वतंत्र जांच हो जाए तो यह पता लगाना कठिन नहीं होगा कि कौन-सा विद्यार्थी किस दिन प्रशिक्षण केंद्र पर उपस्थित था। यही वह रिकॉर्ड है, जिसके आधार पर कथित फर्जी उपस्थिति अथवा कागजी प्रशिक्षण के आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकती है।
जियो-टैग फोटो और Live Captured Image भी मांगी गई
RTI आवेदन में अंतिम मूल्यांकन/परीक्षा के समय की अनिवार्य जियो-टैग और टाइम-स्टैम्प फोटो तथा पहचान पत्र हाथ में पकड़े हुए ली गई डिजिटल फोटो यानी Live Captured Image Log की स्पष्ट प्रमाणित प्रति भी मांगी गई है।
सवाल सीधा है—अगर प्रशिक्षण और मूल्यांकन वास्तविक था तो इन डिजिटल रिकॉर्डों को जांच के सामने रखने में परेशानी क्या है?
मूल्यांकन टीम तक की जानकारी मांगी गई
आवेदन में परीक्षा के दिन केंद्र पर मौजूद सभी पर्यवेक्षकों, बाह्य परीक्षकों, Sector Skill Council Assessor, विभागीय नोडल पदाधिकारी एवं अन्य कर्मचारियों के नाम, पदनाम, नियुक्ति आदेश और उपस्थिति हस्ताक्षर रजिस्टर की प्रमाणित प्रति भी मांगी गई है।
इससे यह भी जांचा जा सकता है कि मूल्यांकन प्रक्रिया वास्तव में निर्धारित नियमों के अनुसार हुई थी या नहीं।
प्रमाणपत्र और प्लेसमेंट पर भी सवाल
RTI में अभ्यर्थियों की OMR/प्रैक्टिकल असेसमेंट शीट, प्रदत्त प्रमाणपत्र की सत्यापित प्रति तथा प्रमाणपत्र हस्ताक्षर करने की मूल रसीद अथवा डिजिटल डाउनलोड आईडी लॉग तक मांगा गया है।
इसके साथ ही यह भी पूछा गया है कि अभ्यर्थियों के नाम पर यात्रा अथवा दैनिक भत्ते का DBT भुगतान हुआ या नहीं और संस्था द्वारा किसी कंपनी में अभ्यर्थी को 'Placed' दिखाकर सरकारी क्लेम लिया गया या नहीं। इसके प्रमाण के रूप में बैंक ट्रांजैक्शन स्लिप, ऑफर लेटर और क्लेम इनवॉयस की प्रमाणित प्रति मांगी गई है।
संस्था से 2024 से अब तक का पूरा हिसाब मांग लिया गया
RTI का दूसरा हिस्सा और भी महत्वपूर्ण है। इसमें M/s Nirman Services Pvt. Ltd. से संबंधित आवेदन, अनुबंध/MoU/Work Order, स्वीकृत ट्रेड/सीट तथा केंद्र के प्रारंभिक भौतिक निरीक्षण की Centre Due Diligence Report मांगी गई है।
इसके अलावा वर्ष 2024 से अब तक संचालित सभी बैचों के कुल छात्रों, जारी प्रमाणपत्रों, नियोजित छात्रों की सूची तथा विभाग द्वारा कराए गए थर्ड-पार्टी/EPF-ESIC आधारित स्वतंत्र प्लेसमेंट सत्यापन रिपोर्ट की प्रति भी मांगी गई है।
यही नहीं, बिना कक्षा संचालित किए फर्जी प्रमाणपत्र और कागजी प्लेसमेंट के आरोपों पर विभाग द्वारा गठित जांच समिति की मूल आख्या तथा संस्था के विरुद्ध की गई दंडात्मक कार्रवाई/ब्लैकलिस्टिंग का विवरण भी मांगा गया है।
सबसे अंत में प्रशिक्षण, खान-पान, असेसमेंट शुल्क और प्लेसमेंट इंसेंटिव के मद में विभाग द्वारा संस्था को स्वीकृत और वितरित कुल सरकारी राशि के Bill-wise Sanction Orders एवं Payment Vouchers की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई हैं।
फिर जांच के लिए और क्या चाहिए?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है। यदि सरकार वास्तव में यह जानना चाहती है कि मुख्यमंत्री सारथी योजना के घाटशिला केंद्र में कोई गड़बड़ी हुई या नहीं, तो जांच एजेंसी को शुरुआत में किसी राजनीतिक बयान की जरूरत नहीं है।
उसे केवल चाहिए—बैचवार सूची, AEBAS Raw Server Log, भौतिक उपस्थिति रजिस्टर, जियो-टैग फोटो, मूल्यांकन रिकॉर्ड, प्रमाणपत्र रिकॉर्ड, DBT भुगतान, प्लेसमेंट सूची, कंपनियों के नियुक्ति-पत्र, EPF/ESIC रिकॉर्ड और सरकारी भुगतान वाउचर।
इन दस्तावेजों को आपस में मिलाने के बाद काफी हद तक तस्वीर खुद सामने आ सकती है।
'मंत्रियों तक पहुंच' के दावे के बीच बेरोजगार युवाओं का सवाल
गौरतलब है कि सुशील दुबे ने जमीनी आवाज़ से फोन पर बातचीत के दौरान यह दावा किया था कि उनकी पहुंच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से लेकर विभिन्न मंत्रियों तक है।
जमीनी आवाज़ किसी व्यक्ति के इस दावे को सत्यापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं कर रहा है। लेकिन यदि किसी संस्था के निदेशक की सचमुच सत्ता के शीर्ष स्तर तक इतनी पहुंच होने का दावा किया जाता है, तो घाटशिला के बेरोजगार युवाओं का सवाल भी उतना ही स्वाभाविक है—'अगर हमारी शिकायतें गलत हैं तो निष्पक्ष जांच कराकर हमें गलत साबित क्यों नहीं किया जाता?'
और दूसरा सवाल—'अगर सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो AEBAS, प्लेसमेंट, EPF/ESIC और भुगतान रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच में किसी को आपत्ति क्यों होनी चाहिए?'
मुख्यमंत्री से जमीनी आवाज़ के तीन सीधे सवाल
जमीनी आवाज़ किसी संस्था या व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं कर रहा है। लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और संबंधित विभाग से तीन स्पष्ट सवाल जरूर पूछता है—
पहला: मुख्यमंत्री सारथी योजना के घाटशिला केंद्र से संबंधित शिकायतों और आरोपों की स्वतंत्र जांच हुई है या नहीं?
दूसरा: यदि जांच हुई है तो क्या AEBAS Raw Server Log, बैचवार उपस्थिति, प्रमाणपत्र, प्लेसमेंट और सरकारी भुगतान का मिलान किया गया?
तीसरा: यदि जांच अभी नहीं हुई है तो क्या मुख्यमंत्री कार्यालय या संबंधित विभाग एक स्वतंत्र जांच कराकर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा?
क्योंकि यह मामला किसी भाजपा नेता बनाम JMM सरकार का राजनीतिक विवाद नहीं होना चाहिए। यह झारखंड के उन बेरोजगार युवाओं का मामला है, जिनके नाम पर सरकार कौशल प्रशिक्षण और रोजगार की व्यवस्था कर रही है।
सरकारी योजना में पैसा जनता का है, रिकॉर्ड सरकार के पास है और भविष्य युवाओं का है। इसलिए सवालों का जवाब भी रिकॉर्ड से ही मिलना चाहिए।
जमीनी आवाज़ की पड़ताल जारी रहेगी।





