20 किलो की जगह 5 किलो चावल देने का आरोप, नेटवर्क के बहाने फिंगरप्रिंट लेकर रसीद फाड़ने की शिकायत
JLKM नेता तरुण महतो के सामने डीलर ने मानी गलती, ग्रामीणों ने 10 दिन में व्यवस्था नहीं सुधरने पर उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
सरायकेला। विजय कुमार गोप की रिपोर्ट
ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के लेपाटाड़ पंचायत के पाटपुर गांव में जन वितरण प्रणाली की कथित अनियमितताओं ने गरीब और आदिवासी ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया। राशन वितरण में गड़बड़ी और महीनों से अनाज नहीं मिलने के आरोपों को लेकर बुधवार को करीब 400 से 450 महिला-पुरुष ग्रामीण सड़क पर उतर आए। ग्रामीणों ने राशन डीलर विशु हेम्ब्रम के खिलाफ जमकर विरोध जताते हुए उसे हटाकर नया डीलर नियुक्त करने की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस राशन व्यवस्था का उद्देश्य गरीब परिवारों के घर का चूल्हा जलाना है, वही व्यवस्था कथित तौर पर उनके लिए परेशानी का कारण बन गई है। कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्हें निर्धारित मात्रा में अनाज नहीं दिया जाता। 20 किलो की जगह कभी 10 किलो तो कभी मात्र 5 किलो चावल देकर मामले को निपटाने की कोशिश की जाती है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि निर्धारित समय पर राशन लेने नहीं पहुंचने पर उन्हें अनाज देने से साफ इनकार कर दिया जाता है।
नेटवर्क का बहाना, पहले अंगूठा फिर राशन से इनकार का आरोप
ग्रामीणों ने सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राशन वितरण के दौरान नेटवर्क नहीं होने का बहाना बनाकर दुकान के बाहर ही फिंगरप्रिंट ले लिया जाता है। इसके बाद जब उपभोक्ता अगले दिन राशन लेने पहुंचते हैं तो कथित तौर पर रसीद फाड़ दी जाती है और राशन देने से इनकार कर दिया जाता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कुछ ग्रामीणों ने तो यह भी आरोप लगाया कि दारू-मुर्गा खिलाने वाले लोगों को तुरंत राशन उपलब्ध करा दिया जाता है, जबकि जरूरतमंद कार्डधारियों को उनके अधिकार के अनाज के लिए चक्कर काटना पड़ता है। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच होना बेहद जरूरी है।
चार से आठ महीने का राशन नहीं मिलने का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि कई परिवारों को चार से आठ महीने तक का राशन नहीं मिला है। पाटपुर मध्य विद्यालय परिसर में ग्रामीणों की बैठक हुई। इसके बाद महिलाएं और पुरुष हाथों में बैग-झोला लेकर राशन लेने के लिए डीलर की दुकान की ओर पहुंचे और लंबी कतार लग गई।
मौके पर जांच के दौरान ग्रामीणों के अनुसार दुकान में करीब 25 बोरा चावल और छह बोरा गेहूं मौजूद मिला। ग्रामीणों का सवाल था कि जब कार्डधारियों की संख्या 200 से अधिक है और कई परिवारों का राशन बकाया बताया जा रहा है, तो उपलब्ध अनाज का वितरण किस आधार पर और किस व्यवस्था के तहत होगा?
JLKM नेता के सामने ग्रामीणों ने खोली शिकायतों की पूरी परत
मामले की जानकारी मिलने पर JLKM के केंद्रीय उपाध्यक्ष सह ईचागढ़ के पूर्व प्रत्याशी तरुण महतो मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने उनके सामने राशन वितरण से जुड़ी अपनी शिकायतें खुलकर रखीं। ग्रामीणों के विरोध और सवालों के बीच डीलर की ओर से भी अपनी गलती स्वीकार किए जाने की बात सामने आई।
तरुण महतो ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनके हक के राशन में किसी भी प्रकार की कथित कटौती या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ग्रामीणों ने भी साफ कर दिया कि अब वे अपने अधिकार के राशन के लिए चुप बैठने वाले नहीं हैं।
10 दिन की मोहलत, नहीं मिला राशन तो आंदोलन
ग्रामीणों ने डीलर को 10 दिन के भीतर सभी पात्र उपभोक्ताओं को लंबित राशन उपलब्ध कराने की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्धारित समय में व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई और बकाया राशन का वितरण नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी कि आगामी 6 नवंबर तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो राज्यपाल को लिखित शिकायत भेजी जाएगी तथा ईचागढ़ प्रखंड कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
प्रशासन के सामने बड़ा सवाल
पाटपुर की घटना ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर गरीबों के नाम पर आवंटित राशन की वास्तविक स्थिति क्या है? कितने कार्डधारियों को कितना अनाज मिला? कितने महीनों का राशन लंबित है? फिंगरप्रिंट लेने के बाद रसीद क्यों फाड़े जाने की शिकायत सामने आ रही है? दुकान में मौजूद स्टॉक और सरकारी रिकॉर्ड में कितना अंतर है?
इन सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच और राशन वितरण के रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, लंबित राशन तत्काल वितरित कराने और आवश्यकता पड़ने पर वर्तमान डीलर को हटाकर नया डीलर नियुक्त करने की मांग की है।
विरोध कार्यक्रम में JLKM प्रखंड अध्यक्ष रूपेश बनर्जी, जिला उपाध्यक्ष गुरुपद महतो, केंद्रीय सदस्य फूलचंद महतो, अनूप महतो, राम कृष्णा महतो सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।





