सरायकेला..... जमीनी आवाज विशेष संवाददाता

2019 में शुरू हुआ चांडिल–पुरुलिया–धनबाद न्यू बायपास NH-18 का निर्माण कार्य वर्षों बाद भी पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सका है। चांडिल जंक्शन के पितकी रेलवे फाटक (JC-56) पर बन रहा स्टील गार्डर रेलवे ओवरब्रिज (ROB) अब विकास की रफ्तार से ज्यादा टलती डेडलाइन और बढ़ती जन परेशानी का प्रतीक बन गया है।

NHAI और निर्माण एजेंसी Dinesh Chandra R. Agarwal Infracon Pvt. Ltd. की ओर से बनाए जा रहे ओवरब्रिज के दोनों ओर लॉन्चिंग का काम पूरा होने की बात कही जा रही है, लेकिन सड़क का आवागमन शुरू नहीं हो सका है। दावा किया गया था कि जून के अंत तक एक ओर से सड़क चालू कर दी जाएगी, लेकिन समय बीतता गया और जनता इंतजार करती रह गई।

एक फाटक बंद, कई किलोमीटर तक थम जाती है जिंदगी

पितकी रेलवे फाटक पर ट्रेनों की आवाजाही के कारण दिनभर बार-बार फाटक बंद होता है। हर बार फाटक बंद होने के साथ वाहनों की कतार बढ़ती जाती है। स्थिति यह है कि रावताड़ा से चांडिल-भालूकोचा की ओर करीब 4 किलोमीटर, जबकि दूसरी ओर नीमडीह के लुपुंगडीह तक करीब 2 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।

फाटक खुलने के बाद भी जाम तुरंत खत्म नहीं होता। सैकड़ों वाहन एक साथ निकलने की कोशिश करते हैं और इसी बीच दूसरी ट्रेन के आने पर फाटक फिर बंद हो जाता है। परिणाम—घंटों तक सड़क पर खड़े वाहन और बेबस यात्री।

इस जाम में ट्रक, बस, ट्रेलर और मालवाहक वाहनों के साथ स्कूल बस, ऑटो, बाइक और मरीजों को ले जाने वाली एंबुलेंस भी फंसती हैं।

चार बार बढ़ी डेडलाइन, फिर भी ओवरब्रिज अधूरा

पितकी ROB को शुरू करने की पहली समयसीमा 31 मार्च 2026 तय की गई थी। काम पूरा नहीं हुआ तो इसे बढ़ाकर 15 जून, फिर 31 जुलाई और उसके बाद अगस्त के पहले सप्ताह तक कर दिया गया। लेकिन अगस्त का पहला सप्ताह भी गुजर गया और जनता को अब भी ओवरब्रिज के उद्घाटन और यातायात शुरू होने का इंतजार है।

निर्माण एजेंसी की ओर से लगातार बारिश को काम प्रभावित होने की वजह बताया जा रहा है। तर्क है कि यदि दो-चार दिन लगातार बारिश नहीं हुई तो काम पूरा किया जा सकता है। वहीं स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब परियोजना वर्षों से चल रही थी तो अंतिम समय में बारिश ही देरी का कारण क्यों बन रही है?

रोज गुजरते हैं हजारों वाहन, फिर भी स्थायी समाधान का इंतजार

पितकी फाटक रांची–टाटा–पुरुलिया–धनबाद मार्ग का बेहद महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां रोजाना हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। मालवाहक ट्रकों और ट्रेलरों के साथ बस, स्कूल वाहन, एंबुलेंस, टेंपो और दोपहिया वाहन भी इसी रास्ते पर निर्भर हैं।

रेलवे फाटक के बार-बार बंद होने से केवल यातायात ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों की दिनचर्या तक प्रभावित हो रही है।

मंत्री के निर्देश के बाद भी नहीं बदली तस्वीर

रांची सांसद एवं केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ द्वारा रेलवे और NHAI अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में जुलाई के अंत तक पितकी ओवरब्रिज चालू करने का निर्देश दिए जाने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद काम पूरा नहीं हुआ।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सांसद समय-समय पर चांडिल जंक्शन का निरीक्षण करते रहे हैं। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि जब निर्देश के बावजूद समयसीमा लगातार बढ़ रही है तो जवाबदेही किसकी तय होगी?

जनता के सीधे सवाल—बारिश के नाम पर कब तक चलेगा इंतजार?

ईचागढ़ क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि बारिश वास्तव में बाधा है तो निर्माण कार्य को गति देने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की जाती? क्या निर्माण स्थल पर आवश्यक सुरक्षा और कवरिंग की व्यवस्था कर काम को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता?

लोगों का आक्रोश अब सिर्फ जाम को लेकर नहीं, बल्कि लगातार टलती समयसीमा और जवाबदेही के अभाव को लेकर है।

जनता पूछ रही है—2019 से चल रही परियोजना आखिर कब पूरी होगी? चार बार डेडलाइन बढ़ने के बाद भी ओवरब्रिज कब खुलेगा? रोजाना घंटों जाम में फंसने वाले लोगों की जिम्मेदारी कौन लेगा? और सबसे बड़ा सवाल—पितकी फाटक की इस स्थायी समस्या से ईचागढ़ की जनता को आखिर कब स्थायी मुक्ति मिलेगी?