जमशेदपुर/रांची (जमीनी आवाज): असित भट्टाचार्य
राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन जब व्यक्तिगत संबंध और मानवीय संवेदनाएं राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर दिखाई देती हैं, तब वह समाज के लिए एक प्रेरक संदेश बन जाती हैं। ऐसा ही एक उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब झारखंड सरकार के वित्त मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण किशोर ने अस्पताल पहुंचकर विधायक सरयू राय का कुशलक्षेम जाना।
जानकारी के अनुसार, विधायक सरयू राय ने स्वयं आग्रह किया था कि फिलहाल उनसे मिलने अस्पताल न आया जाए। इसके बावजूद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर अस्पताल पहुंचे और उनका हालचाल लिया। इस पहल को राजनीतिक शिष्टाचार से आगे बढ़कर व्यक्तिगत सम्मान, आत्मीयता और मानवीय संवेदना का प्रतीक माना जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात की व्यापक चर्चा है। इसे इस बात का उदाहरण माना जा रहा है कि सार्वजनिक जीवन में व्यक्ति की वास्तविक पहचान केवल उसके पद या राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि उसके प्रति समाज और राजनीतिक विरोधियों तक के सम्मान से होती है।
सरयू राय लंबे समय से झारखंड की राजनीति में अपनी स्पष्टवादिता, जनहित के मुद्दों पर मुखर भूमिका और स्वच्छ सार्वजनिक जीवन के लिए पहचाने जाते रहे हैं। यही कारण है कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच भी उनके प्रति सम्मान का भाव देखने को मिलता है। वहीं राधाकृष्ण किशोर का अस्पताल पहुंचकर कुशलक्षेम जानना भी इसी राजनीतिक संस्कृति का परिचायक माना जा रहा है, जहां मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आज के दौर में जब राजनीतिक कटुता अक्सर सुर्खियां बनती है, ऐसे घटनाक्रम लोकतांत्रिक मूल्यों, आपसी सम्मान और स्वस्थ राजनीतिक परंपरा को मजबूत करने का संदेश देते हैं। जनता भी ऐसे व्यवहार को सकारात्मक राजनीति का उदाहरण मान रही है।
— जमीनी आवाज
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