सरायकेला---विजय कुमार गोप नीमडीह थाना क्षेत्र की झिमड़ी स्थित शांखा नदी में कथित अवैध बालू खनन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में कोई सरकारी बालू घाट संचालित नहीं होने के बावजूद रात के अंधेरे में नदी से बड़े पैमाने पर बालू का उठाव और उसका परिवहन किया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, दिन के उजाले में गतिविधियां अपेक्षाकृत कम दिखाई देती हैं, लेकिन शाम ढलते ही ट्रैक्टरों की आवाजाही बढ़ जाती है। आरोप है कि देर रात तक नदी से बालू निकालकर आसपास के क्षेत्रों में भेजा जाता है। लगातार हो रहे कथित खनन से नदी के तल और किनारों पर गहरे गड्ढे बनने की बात भी सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस पर तत्काल रोक नहीं लगी तो शांखा नदी का प्राकृतिक स्वरूप बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। एनजीटी की रोक के बावजूद कारोबार कैसे? मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि बालू खनन पर रोक है, तो फिर रात के अंधेरे में यह कथित कारोबार किसकी निगरानी में चल रहा है? ग्रामीणों के सवाल सीधे हैं— क्या रात होते ही नियम बदल जाते हैं? क्या नदी में चल रहे ट्रैक्टर प्रशासन को दिखाई नहीं देते? अगर अवैध खनन हो रहा है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इन सवालों का जवाब संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की कार्रवाई और जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा। महंगा बालू, गरीबों के सपने पर भारी ग्रामीणों का कहना है कि बालू की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ रहा है। आरोप है कि रघुनाथपुर और चांडिल क्षेत्र में एक ट्रैक्टर बालू की कीमत करीब 4,000 से 5,000 रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे में पीएम आवास और अबुआ आवास योजना के लाभुकों के सामने अपने घर का निर्माण पूरा करना चुनौती बनता जा रहा है। ग्रामीणों का सवाल है कि अगर सरकारी योजनाओं के तहत गरीबों को घर देने की कोशिश हो रही है, तो निर्माण सामग्री इतनी महंगी होने पर इन परिवारों को राहत कैसे मिलेगी? राजस्व का नुकसान, पर्यावरण पर भी संकट ग्रामीणों का आरोप है कि कथित अवैध खनन से जहां सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं नदी और आसपास के पर्यावरण पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि रात के समय विशेष गश्ती बढ़ाई जाए, बालू लदे वाहनों की जांच की जाए और नदी क्षेत्र में औचक छापेमारी कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। अब देखना यह है कि शांखा नदी में उठ रहे इन सवालों पर प्रशासन जांच और कार्रवाई करता है या फिर रात के अंधेरे में कथित बालू कारोबार यूं ही चलता रहता है।