सूर्या हांसदा एनकाउंटर से होटवार जेल कांड तक उठाए सवाल, बोले—कानून का पैमाना सबके लिए एक होना चाहिए

पुलिस एसोसिएशन से सीधा सवाल—आरोप सिद्ध होने पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ बर्खास्तगी की मांग पर क्या है रुख?

सरायकेला। ब्यूरो चीफ विजय कुमार गोप

चांडिल के न्यू बायपास एनएच-18 स्थित बाबलू होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय उपाध्यक्ष सह ईचागढ़ के पूर्व प्रत्याशी तरुण महतो ने पुलिस एसोसिएशन की भूमिका पर तीखा सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों के खिलाफ किसी मामले में विधायकी रद्द करने की मांग उठाई जा सकती है, तो गंभीर आरोपों में घिरे पुलिसकर्मियों के मामले में भी कार्रवाई का वही पैमाना क्यों नहीं होना चाहिए?

तरुण महतो ने कहा कि कानून और जवाबदेही का पैमाना व्यक्ति, पद या वर्दी देखकर अलग नहीं हो सकता। उन्होंने पुलिस एसोसिएशन से सवाल किया कि यदि किसी पुलिसकर्मी पर लगे गंभीर आरोप जांच में या न्यायिक प्रक्रिया में सिद्ध हो जाते हैं, तो क्या उसके खिलाफ नौकरी से बर्खास्तगी की मांग का समर्थन किया जाएगा?

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने पांच मामलों का उल्लेख करते हुए पुलिस व्यवस्था और जवाबदेही पर सवाल उठाए।

तरुण महतो के प्रमुख सवाल

1. सूर्या हांसदा के कथित फर्जी एनकाउंटर का मामला: उन्होंने पूछा कि यदि जांच में पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी साबित होती है, तो उनके खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई कब होगी?

2. तरुण महतो के कथित थर्ड डिग्री टॉर्चर का मामला: उन्होंने अपने साथ कथित पुलिस ज्यादती का जिक्र करते हुए सवाल किया कि जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर जवाबदेही कब तय होगी?

3. जमशेदपुर में जीत महतो की थाने में कथित मौत: उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका या लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

4. आदिवासी बेटी अल्पना महली से कथित दुर्व्यवहार और मारपीट: तरुण महतो ने इस मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि आदिवासी महिलाओं के सम्मान और अधिकारों से जुड़े मामलों में भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

5. रांची के होटवार जेल में महिला कैदी के गर्भवती होने का मामला: उन्होंने इस मामले में भी जिम्मेदार लोगों की पहचान और कार्रवाई की मांग का सवाल उठाते हुए कहा कि जेल जैसी संवेदनशील व्यवस्था में ऐसी घटना होने पर जवाबदेही तय करना जरूरी है।

तरुण महतो ने कहा कि उनके द्वारा उठाए गए मामलों में अंतिम दोष सिद्धि का निर्णय सक्षम जांच एजेंसी और न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए, लेकिन आरोपों की निष्पक्ष जांच और दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

उन्होंने पुलिस एसोसिएशन से सवाल करते हुए कहा, "अगर विधायकी रद्द करने की मांग लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था में उठाई जा सकती है, तो गंभीर मामलों में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों की नौकरी रद्द करने की मांग पर पुलिस एसोसिएशन का रुख क्या है?"

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में वर्दी हो या राजनीतिक पद—जवाबदेही सभी की समान होनी चाहिए। कानून का सम्मान तभी कायम रहेगा, जब कानून की कसौटी पर आम नागरिक, जनप्रतिनिधि और सरकारी कर्मचारी सभी समान रूप से परखे जाएंगे।