बंगाल सीमा पर हो रही अवैध बालू की डंपिंग, सरकार को करोड़ों के राजस्व नुकसान का आरोप; छोटे वाहनों पर कार्रवाई और बड़े बालू माफियाओं को संरक्षण देने का लगाया आरोप

सरायकेला-खरसावां। ब्यूरो चीफ

जिले के तिरूलडीह थाना क्षेत्र में अवैध बालू खनन और तस्करी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तिरूलडीह थाना पुलिस पर अवैध बालू कारोबारियों को संरक्षण देने और राज्य सरकार को भारी राजस्व क्षति पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया गया है।

शनिवार को टाटा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग-33 स्थित चौका के एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में तिरूलडीह सीरकाडीह के ग्राम प्रधान सह पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष अशोक कुमार साहू उर्फ माझी साव ने तिरूलडीह थाना प्रभारी पर सनसनीखेज आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि थाना प्रभारी स्वयं दिन-रात गश्त कर बालू लदे हाइवा वाहनों को क्षेत्र से पार कराने में भूमिका निभाते हैं।

अशोक साहू ने आरोप लगाया कि तिरूलडीह क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन किया जा रहा है और बालू को हाइवा वाहनों के माध्यम से बंगाल सीमा की ओर ले जाकर डंप किया जा रहा है। उनके अनुसार, इस पूरे अवैध कारोबार के बावजूद पुलिस की कार्रवाई बड़े बालू कारोबारी और भारी वाहनों के खिलाफ प्रभावी रूप से दिखाई नहीं देती।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब ग्रामीणों या मीडिया की ओर से अवैध बालू परिवहन को लेकर दबाव बनाया जाता है, तब कार्रवाई के नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा निजी मकान निर्माण के लिए सीमित मात्रा में बालू ले जा रहे छोटे ट्रैक्टरों को पकड़कर मामला दर्ज कर दिया जाता है। जबकि दूसरी ओर, बड़े पैमाने पर बालू ढोने वाले हाइवा वाहनों को कथित तौर पर खुलेआम आवाजाही करने दी जाती है।

"20 लाख CFT बालू जब्त हुआ, नीलामी 1 लाख CFT की और बाकी बालू गायब हो गया"

प्रेस वार्ता में अशोक साहू ने पूर्व में जब्त बालू को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि खनन विभाग द्वारा लगभग 20 लाख CFT बालू जब्त किया गया था। बाद में विभाग की ओर से लगभग 1 लाख CFT बालू की नीलामी की गई, लेकिन उनकी शिकायत है कि नीलामी की आड़ में कथित रूप से बड़ी मात्रा में जब्त बालू को चोरी-छिपे बेच दिया गया।

साहू ने कहा कि यदि जब्त बालू की मात्रा और नीलामी की मात्रा के बीच इतना बड़ा अंतर है, तो शेष बालू कहां गया, इसकी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबंध में शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस जांच या कार्रवाई सामने नहीं आई है।

राज्य सरकार को राजस्व की भारी क्षति का आरोप

अवैध बालू खनन और परिवहन का मामला केवल पर्यावरण या कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि इससे राज्य सरकार के राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचने का आरोप है। बिना वैध खनन अनुमति, चालान और राजस्व भुगतान के यदि बड़े पैमाने पर बालू का खनन और परिवहन हो रहा है, तो इसका सीधा नुकसान सरकारी खजाने को उठाना पड़ता है।

ग्राम प्रधान अशोक कुमार साहू ने आरोप लगाया कि अवैध बालू कारोबार के कारण सरकार को लगातार राजस्व की हानि हो रही है और यदि इस पर तत्काल रोक नहीं लगी तो बालू माफियाओं का नेटवर्क और मजबूत होता जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर भारी वाहनों के माध्यम से होने वाले कथित अवैध बालू परिवहन पर निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी कौन तय करेगा।

वरीय पुलिस अधिकारियों और खनन विभाग से शिकायत की तैयारी

अशोक साहू ने कहा कि पूरे मामले की लिखित शिकायत वरीय पुलिस पदाधिकारियों और जिला खनन विभाग से की जाएगी। उन्होंने तिरूलडीह थाना क्षेत्र में कथित अवैध बालू खनन, परिवहन और बंगाल सीमा पर डंपिंग की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर यह पता लगाया जाए कि क्षेत्र से प्रतिदिन कितना बालू निकाला जा रहा है, किन वाहनों से उसका परिवहन हो रहा है, बंगाल सीमा पर कहां-कहां डंपिंग की जा रही है और इस कथित अवैध कारोबार से सरकार को कितना राजस्व नुकसान हुआ है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई और अवैध बालू कारोबार पर रोक नहीं लगी, तो ग्रामीण इस मुद्दे को लेकर बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

अब सबसे बड़ा सवाल—बड़े हाइवा पर चुप्पी क्यों?

तिरूलडीह क्षेत्र में उठे इन गंभीर आरोपों ने पुलिस और खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि छोटे ट्रैक्टरों पर कार्रवाई हो रही है, लेकिन भारी हाइवा वाहनों से कथित रूप से बड़े पैमाने पर बालू का परिवहन जारी है, तो प्रशासन को इसका स्पष्ट जवाब देना होगा।

अब जरूरत है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, संबंधित वाहनों की जांच की जाए, बालू डंपिंग स्थलों का भौतिक सत्यापन किया जाए और जब्त बालू के रिकॉर्ड का मिलान किया जाए। क्योंकि मामला केवल बालू चोरी का नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों की कथित लूट और राज्य सरकार के राजस्व को होने वाले संभावित भारी नुकसान का भी है।

हालांकि, प्रेस वार्ता में लगाए गए आरोपों पर तिरूलडीह थाना प्रभारी अथवा पुलिस प्रशासन का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका। प्रशासनिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।