सरायकेला/जमशेदपुर। झारखंड की राजनीति में युवा चेहरों में शुमार पूर्व विधायक एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल सारंगी इन दिनों ग्रीस के रोड्स आइलैंड में हैं। काइंड्रिल इंडिया के आमंत्रण पर वे 15 से 18 सितंबर तक आयोजित होने वाले कंपनी के वैश्विक कॉरपोरेट समिट ‘द हार्ट ऑफ काइंड्रिल-2026’ में हिस्सा ले रहे हैं। कुणाल सारंगी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी साझा करते हुए इसे वैश्विक स्तर पर सीखने और नए विचारों से जुड़ने का अवसर बताया है।
तकनीक और सामाजिक जिम्मेदारी पर होगा मंथन
कुणाल सारंगी के अनुसार, इस वैश्विक कार्यक्रम में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े प्रतिभाशाली लोगों के साथ संवाद करने और तकनीक एवं कारोबार में सामाजिक रूप से जिम्मेदार कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलेगा। उनका यह दौरा ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब झारखंड की नई पीढ़ी रोजगार, तकनीक, स्टार्टअप, शिक्षा और वैश्विक अवसरों को लेकर लगातार नई दिशा तलाश रही है।
युवाओं के लिए ग्लोबल एक्सपोजर क्यों जरूरी?
कुणाल सारंगी की राजनीति में लंबे समय से युवाओं की भागीदारी और नई सोच पर जोर देने की छवि रही है। ऐसे में ग्रीस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी भागीदारी को केवल एक कॉरपोरेट कार्यक्रम में शिरकत के तौर पर देखना शायद पूरी तस्वीर नहीं होगी। आज का युवा सिर्फ स्थानीय राजनीति या नौकरी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहता है।
तकनीक किस तरह समाज को बदल सकती है, कारोबार किस तरह सामाजिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ सकता है और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में काम करने वाले लोग किस तरह नए विचारों पर काम कर रहे हैं—ऐसे विषय झारखंड जैसे राज्य के युवाओं के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
ग्लोबल सोच और लोकल जरूरतों के बीच पुल बनाने की कोशिश
कुणाल सारंगी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि वे इस कार्यक्रम के दौरान दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए प्रतिभाशाली लोगों से जुड़कर सीखने को लेकर उत्साहित हैं। उनका यह अनुभव यदि झारखंड की युवा पीढ़ी तक विचार और अवसर के रूप में पहुंचता है, तो यह दौरा सिर्फ एक नेता की विदेश यात्रा न रहकर ग्लोबल सोच और लोकल जरूरतों के बीच पुल बनाने की कोशिश बन सकता है।
जमीनी आवाज की नजर में असली सवाल यही है—वैश्विक मंचों से हासिल अनुभव झारखंड के युवाओं, तकनीक, रोजगार और विकास की जमीन तक कैसे पहुंचेगा? यही किसी भी अंतरराष्ट्रीय exposure की असली उपयोगिता तय करेगा।





