जमशेदपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से पहले झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने UPI भुगतान पर संभावित शुल्क के मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा कटाक्ष किया है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने पोस्ट में कुणाल षाड़ंगी ने सवाल उठाया कि जिस डिजिटल भुगतान व्यवस्था को देश की आर्थिक तरक्की और डिजिटल क्रांति की पहचान बताया गया, उसमें अब बड़े भुगतान पर शुल्क की संभावना आम आदमी और दुकानदार के लिए किस तरह का बोझ लेकर आएगी।
₹2,000 से अधिक भुगतान पर शुल्क की चर्चा
कुणाल षाड़ंगी ने अपने पोस्ट में लिखा कि ₹2,000 तक के UPI भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, लेकिन ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर शुल्क लगाने का रास्ता साफ हो गया है। उन्होंने अनुमानित 0.3 से 0.5 प्रतिशत शुल्क का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि यदि कोई ग्राहक ₹5,000 का सामान खरीदता है तो अतिरिक्त ₹15 से ₹25 का भुगतान आखिर कौन करेगा।
"दुकानदार अपनी जेब से पैसा क्यों देगा?"
उनका कटाक्ष यहीं नहीं रुका। उन्होंने लिखा कि आज कई जगह क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने पर अतिरिक्त पैसा मांगा जाता है और अब यदि UPI पर भी ऐसा हुआ तो दुकानदार अपनी जेब से पैसा क्यों देगा। जाहिर है, या तो ग्राहक से नकद लिया जाएगा या फिर अतिरिक्त शुल्क ग्राहक को ही देना पड़ेगा। कुणाल षाड़ंगी का सवाल सीधे डिजिटल इंडिया के दावे पर चोट करता नजर आया—"फिर डिजिटल क्रांति का क्या होगा?"
राजनीतिक माहौल में असहज सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर राजनीतिक दल और समर्थक जहां सरकार की उपलब्धियों को गिनाने की तैयारी में हैं, वहीं कुणाल षाड़ंगी की यह टिप्पणी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर सरकार से असहज सवाल पूछती दिखाई दे रही है। अब बड़ा सवाल यही है—जिस UPI को आम आदमी की जेब में रखा गया ‘डिजिटल हथियार’ बताया गया, क्या बड़े भुगतान पर शुल्क की तलवार उसकी धार कुंद करेगी?
नोट: अभी ₹2,000 से अधिक UPI भुगतान पर 0.3–0.5% शुल्क लगना तय नहीं है; यह संभावित शुल्क की चर्चा/अनुमान है।





