गर्भवती को डराकर 500 रुपये वसूलने का आरोप, नीमडीह CHC में शिकायत के बाद भी कार्रवाई कब?

बच्चे को नुकसान होने का डर दिखाने का आरोप, पीड़िता ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से की शिकायत; उपायुक्त से विधायक तक भेजी प्रतिलिपि

सरायकेला-खरसावां। विजय कुमार गोप की रिपोर्ट

सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में इलाज और जांच के लिए पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और भरोसा मिलना चाहिए। लेकिन सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में पदस्थापित एक लैब टेक्नीशियन पर गर्भवती महिला को कथित तौर पर डराकर 500 रुपये लेने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़िता ने लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। अब सवाल यह है कि शिकायत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग इस मामले में कब तक कदम उठाएगा?

नीमडीह CHC में पदस्थापित लैब टेक्नीशियन सुनील कुमार राम पर यह आरोप ग्राम बाडेदा निवासी नूनी बाला सिंह ने लगाया है। उनके पति का नाम सिमन्त सिंह बताया गया है। महिला ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नीमडीह को लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत पर 9 अक्टूबर 2026 की प्राप्ति तिथि दर्ज है।

जांच नहीं कराने पर बच्चे को नुकसान होने का डर दिखाने का आरोप

शिकायत के मुताबिक, महिला 24 जून 2026 को अपने गर्भस्थ बच्चे की जांच कराने नीमडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची थी। आरोप है कि इस दौरान लैब टेक्नीशियन सुनील कुमार राम ने कथित तौर पर कहा कि यदि उनसे रक्त जांच नहीं कराई गई, तो बच्चा सात महीने में पैदा हो सकता है अथवा रक्तस्राव होने के साथ गर्भस्थ बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है।

महिला का आरोप है कि इस तरह की बातें कहकर उसे भयभीत किया गया और उससे 500 रुपये ले लिए गए। शिकायत में पीड़िता ने मानसिक रूप से आहत होने और होने वाले बच्चे को लेकर भयभीत रहने की बात कही है।

हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित लैब टेक्नीशियन का पक्ष और घटना के संबंध में स्वास्थ्य केंद्र का आधिकारिक जवाब भी सामने आना बाकी है। मामले की वास्तविक स्थिति निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

उपायुक्त से विधायक तक शिकायत, अब कार्रवाई का इंतजार

पीड़िता ने मामले में उचित कार्रवाई की मांग करते हुए अपनी शिकायत की प्रतिलिपि प्रखंड विकास पदाधिकारी, नीमडीह; प्रखंड प्रमुख; जिला परिषद के संबंधित प्रतिनिधियों; जिला अध्यक्ष एवं जिला उपाध्यक्ष; सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, सरायकेला-खरसावां; उपायुक्त, सरायकेला-खरसावां; और ईचागढ़ विधायक को भी भेजी है।

शिकायत की प्रतिलिपि कई अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाए जाने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग मामले की जांच के लिए क्या कदम उठाता है।

यह मामला केवल 500 रुपये लिए जाने के आरोप तक सीमित नहीं है। यह सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में मरीजों के साथ व्यवहार, जांच के नाम पर कथित वसूली और शिकायत मिलने के बाद विभागीय जवाबदेही से भी जुड़ा है।

सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले मरीजों को यह भरोसा होना चाहिए कि उन्हें उचित जानकारी, आवश्यक जांच और सम्मानजनक व्यवहार मिलेगा। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की चिकित्सकीय जानकारी स्पष्ट और जिम्मेदारी के साथ दी जानी चाहिए, ताकि अनावश्यक भय या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।

यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी स्वास्थ्यकर्मी ने अनुचित तरीके से डराकर पैसे लिए, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए शिकायतकर्ता और संबंधित कर्मचारी का पक्ष सुनना तथा उपलब्ध दस्तावेजों की जांच करना भी जरूरी है।

जमीनी आवाज के सवाल: शिकायत पर विभाग कब देगा जवाब?

इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के सामने कुछ महत्वपूर्ण सवाल हैं।

पहला सवाल: गर्भवती महिला की लिखित शिकायत मिलने के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई है?

दूसरा सवाल: क्या 500 रुपये लिए जाने के आरोप की विभागीय जांच कराई जाएगी?

तीसरा सवाल: क्या शिकायतकर्ता और संबंधित लैब टेक्नीशियन का बयान लेकर निष्पक्ष जांच की जाएगी?

चौथा सवाल: सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को कथित वसूली और डराने जैसी स्थितियों से बचाने के लिए विभाग क्या कदम उठाएगा?

इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों की ओर से दिया जाना जरूरी है। शिकायत की जांच और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होने से न केवल पीड़िता को न्याय मिलने की संभावना मजबूत होगी, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति आम लोगों का भरोसा भी कायम रहेगा।

जमीनी आवाज का सवाल सीधा है—जब सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में गंभीर आरोपों को लेकर लिखित शिकायत दी गई है, तो उसकी जांच और कार्रवाई की स्थिति जनता के सामने कब आएगी?

स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षा है कि वह मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर उचित कदम उठाए और शिकायतकर्ता को कार्रवाई की स्थिति से अवगत कराए।

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