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संपादकीय
संपादकीय
चीन जब तक बनारस में न घुसे, तब तक भारत में घुसपैठ कैसे मानी जाए?
चीन और भारत की सीमा से जुड़े सवालों पर राजनीतिक व्यंग्य के जरिए यह संपादकीय राष्ट्रीय सुरक्षा, सरकारी जवाबदेही और देशभक्ति के नाम पर उठने वाले सवालों को सामने रखता है। जमीनी आवाज का सवाल है—सीमा पर किसी घटना की सच्चाई नारों से नहीं, तथ्यों और निष्पक्ष जांच से सामने आनी चाहिए।
27 Oct 2026 9
संपादकीय
30 सेकंड में हर मामला सुलझा सकता है… छोड़िए सत्ता का लोभ, आपसे न होगा!
दूसरों के बयान पर नैतिकता का पहाड़ खड़ा करने वाली राजनीति अपने खेमे की विवादित टिप्पणियों पर चुप क्यों हो जाती है? जमीनी आवाज के इस व्यंग्यात्मक संपादकीय में सत्ता के अहंकार, राजनीतिक दोहरे मापदंड, विपक्ष की भूमिका और जनता के सवालों पर तीखा प्रहार किया गया है।
27 Oct 2026 14
संपादकीय
गरीब भगवान के भरोसे, बेईमानों के दरवाजे पर सुख! आखिर कैसी व्यवस्था में जी रहा है देश?
गरीब की आस्था अटूट है, लेकिन उसकी जिंदगी में संघर्ष खत्म क्यों नहीं होता? मेहनतकश को उचित सम्मान और अवसर कब मिलेंगे? जमीनी आवाज के विशेष संपादकीय में असित भट्टाचार्य ने गरीबी, ईमानदारी, राजनीतिक जवाबदेही और व्यवस्था की जिम्मेदारी पर उठाए अहम सवाल।
20 Oct 2026 10
संपादकीय
महाभारत में सौ पुत्र थे, अमृत काल में लाखों! सत्ता की आंखों पर पट्टी है या भक्तों की आंखों पर?
महाभारत में धृतराष्ट्र के सौ पुत्रों का प्रसंग आज की राजनीति पर व्यंग्य करने का अवसर देता है। जमीनी आवाज के संपादक असित भट्टाचार्य का यह विशेष संपादकीय सत्ता, राजनीतिक अंधभक्ति, युवाओं की अपेक्षाओं और लोकतंत्र में सवाल पूछने के अधिकार पर गंभीर विमर्श करता है। क्या किसी नेता का समर्थन करने का अर्थ उसकी हर बात को सही मान लेना है, या सच्ची लोकतांत्रिक निष्ठा सवाल पूछने में भी है?
19 Oct 2026 13
संपादकीय
रंग में भगवा, इंसान में गाली! सोशल मीडिया के सियासी विद्वानों पर जमीनी आवाज का तीखा सवाल
सोशल मीडिया पर राजनीतिक दलों के नाम के अक्षरों से अपमानजनक शब्द गढ़ने की प्रवृत्ति पर जमीनी आवाज का तीखा सवाल। भाजपा हो या कांग्रेस, क्या विचारों की लड़ाई अब गालियों से लड़ी जाएगी? असित भट्टाचार्य के इस विशेष संपादकीय में अंधसमर्थन, राजनीतिक भाषा की गिरती मर्यादा और जनता के असली मुद्दों से भटकती बहस पर बेबाक टिप्पणी।
17 Oct 2026 7
संपादकीय
कहां तो हर घर तिरंगा पहुंचाने का दावा था, अब तिरंगा लहरा रहा है तो फटा क्यों है? लोकतंत्र से तीखे सवाल
हर घर तिरंगा अभियान के दावों के बीच जमीनी आवाज का सवाल है कि क्या तिरंगे का सम्मान केवल उसे फहराने तक सीमित है, या लोकतंत्र में नागरिकों के अधिकारों और असहमति की रक्षा करना भी जरूरी है? छात्र आंदोलनों, विपक्ष के सवालों, सार्वजनिक संवाद की मर्यादा और कानून के समान अनुपालन पर केंद्रित असित भट्टाचार्य का धारदार संपादकीय।
17 Oct 2026 4
संपादकीय
प्रधानमंत्री जी, भक्तों से कब तक चलेगी सत्ता की गाड़ी? जनता जागी तो नट-बोल्ट वाले रोबोट कहां से लाइएगा?
महा सप्तमी पर जमीनी आवाज के संपादक असित भट्टाचार्य का सत्ता से सीधा सवाल—क्या लोकतंत्र में बिना सवाल किए समर्थन करना ही देशभक्ति है? महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों के बीच यह संपादकीय सत्ता की जवाबदेही, जनता के विवेक और अंधसमर्थन की राजनीति पर तीखा व्यंग्य करता है।
17 Oct 2026 3
संपादकीय
7.8% जीडीपी का ढोल पीटने वालों! पोल्टू की थाली में भी झांकिए, विकास का उजाला गरीब तक कब पहुंचेगा?
7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के दावों के बीच सवाल यह है कि आर्थिक विकास का लाभ आम आदमी तक कितना पहुंचा? दुर्गापूजा के दिन दोपहर की कड़ी धूप में बर्तन धोते पोल्टू की मेहनत महंगाई, आमदनी और गरीब परिवारों की आर्थिक परेशानियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। असित भट्टाचार्य की कलम से सत्ता से सीधा सवाल—विकास का उजाला गरीब की झोपड़ी तक कब पहुंचेगा?
17 Oct 2026 5
संपादकीय
आंखें दान कर जाइए, शायद अगली सदी में विकास दिखाई दे!
स्मार्ट सिटी से बुलेट ट्रेन तक विकास के बड़े सपनों के बीच आम आदमी की जिंदगी में बदलाव कितना दिखाई दे रहा है? सोशल मीडिया पर चर्चित नेत्रदान वाले व्यंग्य के बहाने असित भट्टाचार्य का यह संपादकीय अंधसमर्थन, राजनीतिक प्रचार और सरकारी जवाबदेही पर सवाल उठाता है। संदेश साफ है—विकास का स्वागत कीजिए, लेकिन जमीन की सच्चाई देखना मत भूलिए।
14 Oct 2026 6
संपादकीय
जंतर-मंतर जाने से रोकने के लिए दिल्ली में इतनी बंदिशें क्यों? जनता के सवालों से कब तक बचेगी सत्ता
दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रस्तावित आंदोलन से पहले सुरक्षा प्रतिबंधों और आम नागरिकों की परेशानी पर सवाल उठे हैं। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, रेजीनगर उपचुनाव के विवादित आंकड़ों और चुनावी पारदर्शिता की मांग के बीच बड़ा सवाल है—लोकतंत्र में जनता की आवाज कितनी सुनी जा रही है?
09 Oct 2026 10
संपादकीय
जब सत्ता पर हंसना गुनाह हो जाए तो लोकतंत्र किसके लिए?
इंदौर से शुरू हुआ पुलकित मणि का मिमिक्री विवाद अब सिर्फ एक कॉमेडियन तक सीमित नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक व्यंग्य पर बड़ा सवाल बन गया है।
23 Sep 2026 284
संपादकीय
बैंक खाते में पैसा या सिर्फ एक ‘बुक एंट्री’? सवाल मुद्रा का नहीं, भरोसे का है!
क्या बैंक खाते में दर्ज रकम को Legal Tender कहा जा सकता है या यह महज एक बुक एंट्री है? Coinage Act, RBI Act और Contract Act के हवाले से इस कानूनी सवाल की पड़ताल करता संपादकीय।
16 Sep 2026 421