घाटशिला। असित भट्टाचार्य की रिपोर्ट

घाटशिला अनुमंडल में जनस्वास्थ्य से जुड़ी एक गंभीर समस्या को लेकर सक्रिय संवेदना ने जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया है। संगठन के सहसंयोजक विजय कुमार पांडे ने खुले में बिक रहे मांस और मछली की दुकानों की स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रशासन से तत्काल पहल की मांग की है।

सक्रिय संवेदना का कहना है कि अनुमंडल के कई हिस्सों में मांस और मछली की बिक्री ऐसे स्थानों पर हो रही है, जहां स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के मानकों का समुचित पालन दिखाई नहीं देता। खुले में लटकता मांस, खुले में रखी मछलियां, आसपास फैली गंदगी, दुर्गंध और आवारा कुत्तों की मौजूदगी न केवल बाजार की स्थिति पर सवाल खड़े करती है, बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता पैदा करती है।

संगठन ने प्रशासन से इस मामले में औचक निरीक्षण और नियमित निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। खासकर त्योहारी मौसम में मांस-मछली की बिक्री बढ़ने के कारण खाद्य पदार्थों की स्वच्छता और सुरक्षित रखरखाव पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई गई है।

बीमारी से पहले बचाव की सोच

सक्रिय संवेदना लगातार प्रदूषण, गंदगी और उनसे पैदा होने वाले संभावित स्वास्थ्य संकटों को लेकर आवाज उठाती रही है। संगठन का कहना है कि किसी बीमारी या महामारी के फैलने के बाद उसके उपचार की व्यवस्था करने से बेहतर है कि उन परिस्थितियों को पहले ही नियंत्रित किया जाए, जो बीमारी के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती हैं।

मांस और मछली की दुकानों में स्वच्छता की कमी भी इसी व्यापक जनस्वास्थ्य चिंता का हिस्सा है। यदि खाद्य पदार्थों की बिक्री ऐसे स्थानों पर होती है जहां साफ-सफाई, पानी की निकासी, अपशिष्ट प्रबंधन और सुरक्षित रखरखाव की उचित व्यवस्था नहीं है, तो सवाल केवल दुकानदार का नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था का भी बनता है।

बाजार हो ऐसा, जहां ग्राहक निश्चिंत होकर खरीद सके

विजय कुमार पांडे ने प्रशासन से मांग की है कि घाटशिला में मांस-मछली की बिक्री के लिए सुनियोजित बाजार विकसित किया जाए। ऐसे बाजार में स्वच्छता के स्पष्ट मानक निर्धारित हों, दुकानों की नियमित सफाई और धुलाई की व्यवस्था हो तथा मांस-मछली के अपशिष्ट के निस्तारण की भी उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

सक्रिय संवेदना का मानना है कि यदि बिक्री के लिए व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराया जाए और वहां नियमित प्रशासनिक निगरानी हो, तो दुकानदारों के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिलेगा। लोगों को ऐसी जगह खाद्य सामग्री खरीदने का भरोसा मिलेगा, जहां साफ-सफाई और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती हो।

सवाल सिर्फ गंदगी का नहीं, जवाबदेही का भी

घाटशिला में मांस-मछली की दुकानों के आसपास की स्थिति अब एक स्थानीय समस्या से आगे बढ़कर जनस्वास्थ्य और प्रशासनिक निगरानी का सवाल बनती जा रही है। सवाल यह है कि खाद्य पदार्थों की बिक्री से जुड़े निर्धारित मानकों की जांच कितनी नियमित होती है और नियमों का उल्लंघन मिलने पर क्या कार्रवाई की जाती है?

सक्रिय संवेदना ने जिला प्रशासन से इस दिशा में ठोस पहल की उम्मीद जताई है। संगठन का कहना है कि जनता को बीमारी का इंतजार नहीं, सुरक्षित वातावरण चाहिए।

आज जरूरत ऐसी व्यवस्था की है, जहां मांस-मछली खरीदने वाला उपभोक्ता यह सोचकर घर न लौटे कि उसने भोजन खरीदा है या बीमारी का जोखिम।

जमीनी आवाज का सवाल:

जब मामला सीधे जनता की सेहत से जुड़ा है, तो घाटशिला में व्यवस्थित और स्वच्छ मांस-मछली बाजार के लिए प्रशासनिक पहल कब होगी?