सूरदा खदान में वेतन भुगतान को लेकर मजदूरों ने रोका काम, प्रबंधन से हुई वार्ता

वेतन भुगतान की तारीख को लेकर असमंजस, तीन महीने से क्लिप बकाया होने की भी शिकायत; शमशेर खान ने कहा—नियमानुसार 7 तारीख को होना है भुगतान

जमीनी आवाज | विशेष रिपोर्ट

सूरदा। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) की सूरदा खदान में शुक्रवार को वेतन भुगतान को लेकर मजदूरों का असंतोष सामने आया। धनतेरस के अवसर पर समय पर वेतन नहीं मिलने से नाराज मजदूरों ने काम बंद कर दिया और कंपनी परिसर में धरने पर बैठ गए। मजदूरों का कहना है कि वेतन के साथ-साथ पिछले तीन महीने से उनका क्लिप भी बकाया है, जिससे उनकी आर्थिक परेशानियां बढ़ रही हैं।

मजदूरों की मांग थी कि बकाया भुगतान का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए। इस दौरान कंपनी प्रबंधन के अधिकारियों और मजदूरों के बीच बातचीत हुई, लेकिन तत्काल कोई सहमति नहीं बन सकी। काम बंद रहने से खदान के उत्पादन कार्य पर भी असर पड़ा।

वेतन भुगतान की तारीख को लेकर असमंजस

वेतन भुगतान की निर्धारित तारीख को लेकर मजदूरों के बीच अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं। कुछ मजदूरों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार प्रत्येक महीने की 5 तारीख तक वेतन भुगतान होना चाहिए। हालांकि, इस कथित आदेश की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

वहीं, मजदूर नेता एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शमशेर खान ने कहा कि नियमानुसार मजदूरों का वेतन भुगतान प्रत्येक महीने की 7 तारीख को किया जाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ शरारती तत्वों ने मजदूरों के बीच गलत जानकारी फैलाकर भ्रम की स्थिति पैदा की, जिसके कारण बिना पूरी जानकारी के काम बंद करने की नौबत आई। उन्होंने मजदूरों से अपील की कि किसी भी सूचना पर भरोसा करने से पहले उसकी वास्तविकता की जानकारी जरूर लें।

शमशेर खान ने जमीनी आवाज को बताया कि मजदूरों का वेतन जरूर मिलेगा और भुगतान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होगा। उन्होंने कहा कि मजदूरों और कंपनी प्रबंधन, दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए आपसी बातचीत से समाधान निकालना जरूरी है।

समय पर भुगतान और संवाद जरूरी

गौरतलब है कि सूरदा खदान हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की महत्वपूर्ण खदानों में शामिल है। यहां काम करने वाले मजदूरों की आजीविका और कंपनी का उत्पादन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। ऐसे में वेतन भुगतान को लेकर पैदा हुई असमंजस की स्थिति का जल्द समाधान होना सभी के हित में है।

मजदूरों को समय पर उनका मेहनताना मिले और उत्पादन कार्य भी प्रभावित न हो, इसके लिए प्रबंधन तथा मजदूर प्रतिनिधियों के बीच सकारात्मक संवाद और पारदर्शिता बेहद जरूरी है। अब देखना होगा कि बातचीत के बाद मजदूरों के बकाया भुगतान और कामकाज को लेकर क्या समाधान निकलता है।