फेंसिंग के लिए रेलवे लाइन के पास बिछे केबल से डेढ़ फीट जगह छोड़कर काम करने पर बनी सहमति, दुकानदारों को दोबारा दुकान लगाने का मिला आश्वासन
दुर्गा पूजा के दौरान छोटे दुकानदारों की आजीविका का मुद्दा उठा, तापस चटर्जी, फारूक शेख, रिंकू सिंह और जगदीश भगत ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
गोपालपुर | असित भट्टाचार्य की रिपोर्ट

गोपालपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास रेलवे सुरक्षा के लिए फेंसिंग लगाने की कार्रवाई के दौरान स्थानीय छोटे दुकानदारों की आजीविका का सवाल उठ खड़ा हुआ। अतिक्रमण हटाने और निर्माण कार्य के लिए पहुंचे रेलवे पुलिसकर्मियों एवं ठेकेदारों के सामने दुकानदारों ने अपनी परेशानी रखी। इसके बाद कांग्रेस नेता तापस चटर्जी और फारूक शेख तथा झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता रिंकू सिंह ने मौके पर पहुंचकर दुकानदारों का पक्ष रखा। झामुमो के वरिष्ठ नेता जगदीश भगत भी वहां पहुंचे और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की पहल में शामिल हुए।

रेलवे की सुरक्षा और छोटे दुकानदारों के रोजगार, दोनों को ध्यान में रखते हुए रास्ता निकालने पर जोर दिया गया। बातचीत के बाद रेलवे लाइन के पास बिछे केबल से डेढ़ फीट जगह छोड़कर फेंसिंग का काम करने पर सहमति बनी। इससे रेलवे की सुरक्षा के लिए जरूरी निर्माण कार्य पूरा करने और दुकानदारों की आजीविका को कम से कम प्रभावित करने की उम्मीद जगी है।
रेलवे की सुरक्षा जरूरी, लेकिन छोटे दुकानदारों का रोजगार भी महत्वपूर्ण
मौके पर मौजूद ठेकेदारों ने बताया कि दुकानदारों को अतिक्रमण हटाने के लिए पहले ही समय दिया गया था और निर्धारित समय सीमा पूरी हो चुकी थी। रेलवे लाइन के पास फेंसिंग लगाने का उद्देश्य जानवरों की आवाजाही रोकना और संभावित दुर्घटनाओं की आशंका कम करना है। हाथी, गाय, बैल, बकरी सहित अन्य जानवरों के रेलवे लाइन तक पहुंचने से सुरक्षा संबंधी खतरे पैदा हो सकते हैं।

दूसरी ओर, स्थानीय दुकानदारों के सामने अपनी रोजी-रोटी बचाने की चुनौती भी है। दुर्गा पूजा और त्योहारों के मौसम में छोटी दुकानें कई परिवारों की आय का महत्वपूर्ण साधन होती हैं। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान दुकानदारों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालना जरूरी था।
कांग्रेस नेता तापस चटर्जी ने कहा कि दुर्गा पूजा जैसे त्योहार के समय छोटे दुकानदारों के रोजगार का सवाल महत्वपूर्ण है। सुरक्षा और विकास से जुड़े कार्य आवश्यक हैं, लेकिन उन लोगों की आजीविका का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, जो छोटी-छोटी दुकानें चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

तापस चटर्जी, फारूक शेख और रिंकू सिंह ने मौके पर मौजूद रेलवे पुलिस, अधिकारियों एवं ठेकेदारों की बातें सुनीं और सुरक्षा संबंधी जरूरतों को समझा। इसके बाद दुकानदारों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसा रास्ता निकालने पर जोर दिया गया, जिससे रेलवे का निर्माण कार्य भी पूरा हो और छोटे दुकानदारों का रोजगार भी पूरी तरह प्रभावित न हो।
दो-तीन दिनों में काम पूरा करने का आश्वासन, दुकानदारों ने सहयोग का दिया भरोसा

बातचीत के बाद रेलवे लाइन के पास बिछे केबल से डेढ़ फीट जगह छोड़कर फेंसिंग लगाने पर सहमति बनी। ठेकेदार की ओर से आश्वासन दिया गया कि दो-तीन दिनों के भीतर काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद दुकानदारों को निर्धारित जगह पर दोबारा दुकानें लगाने का अवसर देने की बात कही गई।
स्थानीय दुकानदारों ने भी सहयोग का परिचय देते हुए निर्माण कार्य पूरा करने के लिए दो-तीन दिनों तक अपनी दुकानें हटाने पर सहमति जताई। दुकानदारों का आग्रह था कि काम पूरा होने के बाद उन्हें उसी स्थान पर दोबारा अपना रोजगार चलाने का अवसर मिलना चाहिए।
मौके पर पहुंचे झामुमो के वरिष्ठ नेता जगदीश भगत ने भी दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत और सहमति पर अपनी सहमति जताई। स्थानीय दुकानदारों ने तापस चटर्जी, फारूक शेख, रिंकू सिंह और जगदीश भगत के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस पूरे घटनाक्रम में बातचीत के जरिए ऐसा रास्ता निकालने का प्रयास किया गया, जिसमें रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी के बीच संतुलन बनाया जा सके।
जमीनी आवाज का सवाल: क्या तय समय में पूरा होगा काम और बचेगा दुकानदारों का रोजगार?

रेलवे की सुरक्षा सुनिश्चित करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी छोटे दुकानदारों की आजीविका का ध्यान रखना भी है। गोपालपुर रेलवे क्रॉसिंग पर हुई बातचीत से समाधान की उम्मीद जगी है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि फेंसिंग का काम तय दो-तीन दिनों में पूरा होता है या नहीं और दुकानदारों को दोबारा दुकान लगाने के लिए सहमति के अनुरूप जगह मिलती है या नहीं।
जमीनी आवाज का मानना है कि सुरक्षा और रोजगार के बीच टकराव के बजाय संवाद से समाधान निकालना ही बेहतर रास्ता है।